आम ने बिगाड़ा पाकिस्तान का खेल! मिडिल ईस्ट जंग के बीच एक्सपोर्ट थमने से भारी नुकसान, नहीं मिल रहे खरीदार

Pakistan Mango Exports Crisis: एक्सपोर्ट ठप होने की वजह से पाकिस्तान के घरेलू बाजारों में आमों की बाढ़ आ गई है। कराची जैसे बड़े शहरों के बाजारों में जो आम पिछले साल के मुकाबले आधी कीमत यानी 200 पाकिस्तानी रुपये प्रति किलोग्राम पर बिक रहे हैं, उन्हें भी कोई खरीदने वाला नहीं मिल रहा

अपडेटेड Jun 21, 2026 पर 2:25 PM
जून के शुरुआत से शुरू हुआ यह सीजन अब बर्बादी की कगार पर है

Pakistan Mango Crisis: पाकिस्तान के दक्षिणी हिस्से में इस समय आम का सीजन पूरे शबाब पर है। पेड़ों पर मजदूरों की टोलियां तेजी से रसीले आम तोड़ने में जुटी हैं। लेकिन इस बार इस मिठास में भारी कड़वाहट घुली हुई है। पाकिस्तान की कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था इस समय मिडिल ईस्ट में तनाव के चलते गहरे संकट में है, जिसका सीधा असर इस्लामाबाद के आम एक्सपोर्ट पर पड़ा है।

हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच इस हफ्ते स्विट्जरलैंड में शुरू हुई शांति वार्ता से एक अंतरिम समझौता तो हुआ है, लेकिन पाकिस्तान के आम व्यापारियों के लिए यह राहत बहुत देर से आई है। जून से शुरू हुआ यह सीजन अब बर्बादी की कगार पर है। व्यापारियों का अनुमान है कि इस साल प्रमुख विदेशी बाजारों में मांग घटने और शिपिंग लागत आसमान छूने के कारण आम के एक्सपोर्ट में कम से कम 30 फीसदी की भारी गिरावट आएगी।

दुनिया का चौथा सबसे बड़ा एक्सपोर्टर संकट में


दक्षिण एशिया में 'फलों का राजा' कहे जाने वाले आम की पाकिस्तान में दो दर्जन से अधिक किस्में उगाई जाती हैं। पाकिस्तान सामान्य तौर पर हर साल अंतरराष्ट्रीय बाजार में आम बेचकर करीब 11 करोड़ डॉलर की कमाई करता है। इसके साथ ही वह दुनिया का चौथा सबसे बड़ा आम निर्यातक देश है।

लेकिन इस साल जियोपॉलिटिकल तनाव ने इस पूरी कमाई पर पानी फेर दिया है। ऑल पाकिस्तान फ्रूट एंड वेजिटेबल एक्सपोर्टर एसोसिएशन के चीफ पेट्रन वहीद अहमद के मुताबिक:

'पाकिस्तान के कुल आम निर्यात का लगभग 80 फीसदी हिस्सा खाड़ी देशों, ईरान और अफगानिस्तान में जाता है। लेकिन पिछले कुछ महीनों से ये सभी देश किसी न किसी तरह के संघर्ष और युद्ध की चपेट में हैं।'

30000 टन कम होगा एक्सपोर्ट, बंद हैं सीमाएं

वहीद अहमद ने बताया कि पिछले सीजन के मुकाबले इस साल आम का कुल निर्यात 30000 टन घटकर सिर्फ 80000 टन रह जाने की आशंका है। इसके पीछे मुख्य वजहें ये हैं:

बंद बॉर्डर: पड़ोसी देश अफगानिस्तान के साथ विवाद के चलते सीमा बंद है, जिससे सैकड़ों आम से लदे ट्रक महीनों से बॉर्डर पर फंसे हैं।

मिडिल ईस्ट में जंग: ईरान और पूरे मिडिल ईस्ट में फैले तनाव ने सप्लाई चेन को तोड़ दिया है।

होर्मुज संकट और महंगा किराया: होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी ब्लॉकेड के चलते ऊर्जा की कीमतें बढ़ी हैं, जिससे समुद्री जहाजों का किराया आसमान छू रहा है। पिछले साल जिस 25 टन के आम के कंटेनर को भेजने की लागत $1400 थी, वह इस साल बढ़कर $6000 से $7000 तक पहुंच गई है।

'पहले रोटी खरीदें या आम?'

एक्सपोर्ट ठप होने की वजह से पाकिस्तान के घरेलू बाजारों में आमों की बाढ़ आ गई है। कराची जैसे बड़े शहरों के बाजारों में जो आम पिछले साल के मुकाबले आधी कीमत यानी 200 पाकिस्तानी रुपये प्रति किलोग्राम पर बिक रहे हैं, उन्हें भी कोई खरीदने वाला नहीं मिल रहा।

इसकी वजह है पाकिस्तान में मिडिल ईस्ट संकट के बाद पैदा हुई रिकॉर्ड तोड़ महंगाई। सरकारी सर्वे के मुताबिक, युद्ध शुरू होने के बाद पाकिस्तान की महंगाई दर 5.5 फीसदी से उछलकर सीधे 10 फीसदी पर पहुंच गई है।

तंडो अल्लाहयार के आम उत्पादक मोहम्मद शकील बताते हैं कि स्थानीय लोग अब फल खरीदने की स्थिति में नहीं हैं। उन्होंने लाचारी जताते हुए कहा, 'देश के हालात देखिए, खर्चे बढ़ रहे हैं और आमदनी कम है। ऐसे में लोग पहले अपने बच्चों के लिए रोटी खरीदें या हमारा आम?' घाटे के डर से कई ठेकेदारों ने तो एडवांस पैसे छोड़कर बगीचों के कॉन्ट्रैक्ट ही बीच में रद्द कर दिए हैं।

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