ईरान और अमेरिका के बीच जंग रूकवाने के बड़े-बड़े दावों के फेल होने के बाद अब पाकिस्तान को और झटका लगा है। एक तरफ पाकिस्तान दुनिया भर में शांतिदूत बनने का ढोंग कर रहा है तो वहीं दूसरी तरफ उसके मुल्क की हालत किसी से छिपी नहीं है। बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना की हालात खराब है। वहीं अपनी इज्जत बचाने के लिए बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना ने लॉकडाउन जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। . द बलूचिस्तान पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के सुरक्षा बलों ने नोशकी जिले में आम लोगों की आवाजाही पर सख्त पाबंदियां लगा दी हैं।
शहर में लॉकडाउन जैसे हालात
रिपोर्ट में कहा गया है कि पूरे शहर को सुरक्षा कारणों से लगभग लॉकडाउन कर दिया गया है। लोगों के आने-जाने पर रोक लगा दी गई है और स्थानीय बाजार भी बंद करवा दिए गए हैं। रविवार को शहर के सभी रास्तों को भारी सुरक्षा के बीच सील कर दिया गया, जिससे लोग न तो शहर में आ पा रहे थे और न ही बाहर जा पा रहे थे। स्थानीय लोगों के अनुसार, सुबह से ही नोशकी बाजार, काज़ीबाद, ग्रिड स्टेशन और गरीबाबाद जैसे इलाकों में बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात कर दिए गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, एक स्थानीय निवासी ने बताया कि सुरक्षा बलों की इतनी ज्यादा मौजूदगी है कि शहर पूरी तरह घेराबंदी जैसी स्थिति में नजर आ रहा है।
लोगों को लिया जा रहा है हिरासत में
यह घटना एक दिन पहले किल्ली कादिरबाद में हुए एक ऑपरेशन के बाद सामने आई है। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान के सुरक्षा बलों ने कई घंटों तक पूरे इलाके की घेराबंदी कर रखी थी। स्थानीय लोगों के अनुसार, ऑपरेशन के दौरान गोलियों की आवाजें भी सुनी गईं, हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दो लोगों—नूर मोहम्मद मेंगल के बेटे आबिद मेंगल और मोहम्मद रहीम जान बादिनी के बेटे ताहिर खान को कादिरबाद से हिरासत में लिया गया। बताया जा रहा है कि उन्हें किसी अज्ञात जगह पर ले जाया गया है। फिलहाल, इन गिरफ्तारियों और पूरे ऑपरेशन को लेकर अधिकारियों की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
बलूचिस्तान में पाक सेना का जुल्म
पिछले दो महीनों से नोशकी में आंशिक कर्फ्यू जैसी पाबंदियां लागू हैं। द बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, इन नियमों के तहत बाजार शाम को जल्दी बंद कर दिए जाते हैं और उन्हें सुबह 9 बजे के बाद ही खोलने की अनुमति होती है। रात के समय लोगों के बाहर निकलने पर पूरी तरह रोक रहती है। बलूचिस्तान में लोगों का जबरन गायब होना और बिना कानूनी प्रक्रिया के हत्याएं (एक्स्ट्राज्यूडिशियल किलिंग) आज भी एक गंभीर मानवाधिकार मुद्दा बना हुआ है। कई परिवार अपने लापता परिजनों को ढूंढ़ते-ढूंढ़ते सालों बिता देते हैं।
मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि सुरक्षा एजेंसियां लोगों को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में रखती हैं और कई मामलों में फर्जी मुठभेड़ भी करती हैं। लगातार विरोध और रिपोर्ट्स के बावजूद इन मामलों में जिम्मेदारी तय करना अभी भी मुश्किल बना हुआ है। इन अनसुलझे मामलों के कारण लोगों में डर, गुस्सा और सरकार के प्रति अविश्वास लगातार बढ़ता जा रहा है।