Pakistan Fuel Price: अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जारी उतार-चढ़ाव के बीच पाकिस्तान सरकार ने एक बार फिर पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया है। पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के हवाले से न्यूज एजेंसी ANI ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि पाकिस्तान में ये नई कीमतें शुक्रवार से लागू हो गई हैं।
कितना महंगा हुआ पेट्रोल और डीजल?
पेट्रोलियम डिवीजन के नोटिफिकेशन के मुताबिक पेट्रोल की कीमत में 0.45 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया गया है। बाद अब पाकिस्तान में 1 लीटर पेट्रोल की कीमत 325.43 पाकिस्तानी रुपये हो गई है। हाई-स्पीड डीजल के दाम में 1.16 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। अब 1 लीटर डीजल की कीमत 383.95 पाकिस्तानी रुपये हो गई है। तेल की इन कीमतों के साथ-साथ पाकिस्तान सरकार पेट्रोल पर प्रति लीटर 114 रुपये और डीजल पर प्रति लीटर 100 रुपये का भारी टैक्स और ड्यूटी वसूलना जारी रखे हुए है।
आपको बता दें कि ईरान और अमेरिका के बीच नए सिरे से शुरू हुई शत्रुता और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। मार्च के पहले सप्ताह में पेट्रोल की कीमत 266 रुपये प्रति लीटर थी। ये बढ़ते-बढ़ते 3 अप्रैल को 458.41 रुपये प्रति लीटर के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद डीजल की कीमत 281 रुपये प्रति लीटर थी। ये 3 अप्रैल को 520.35 रुपये प्रति लीटर के रिकॉर्ड स्तर पर जा पहुंची थी। हालांकि, उस रिकॉर्ड ऊंचाई की तुलना में अब डीजल की कीमतों में काफी गिरावट देखी गई है।
अब रोज तय होंगी पेट्रोल-डीजल की कीमतें
पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने हाल ही में घोषणा की थी कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए ईंधन की कीमतें अब दैनिक आधार पर तय की जाएंगी। केंद्रीय कैबिनेट और प्रधानमंत्री ने अंतर्राष्ट्रीय बाजार के रुझानों के आधार पर रोजाना की कीमत तय करने का जिम्मा ऑयल एंड गैस रेगुलेटरी अथॉरिटी (OGRA) को सौंपने का फैसला किया है। सरकार के इस फैसले का ऑल पाकिस्तान डीलर्स एसोसिएशन ने कड़ा विरोध किया है और कहा है कि वे इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन की योजना पर विचार कर रहे हैं।
आपको बता दें कि मार्च की शुरुआत से पाकिस्तान सरकार साप्ताहिक आधार पर फ्यूल प्राइस की समीक्षा कर रही थी। तेल आपूर्ति में बाधा की आशंका की वचह से फ्यूल बचाने के उपाय लागू किए जा रहे थे।