Prambanan Temple: 1000 साल पुराने प्रम्बानन मंदिर जाएंगे पीएम मोदी, जानिए भारत-इंडोनेशिया के रिश्तों में क्यों है इसकी खास अहमियत

इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ संयुक्त बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "कल मुझे राष्ट्रपति प्रबोवो के साथ प्रम्बानन मंदिर संरक्षण परियोजना की शुरुआत करने का अवसर मिलेगा। करीब 1,000 साल पुराना प्रम्बानन मंदिर भारत और इंडोनेशिया की साझा सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है

अपडेटेड Jul 07, 2026 पर 3:43 PM
भारत-इंडोनेशिया के रिश्तों में क्यों है इसकी खास अहमियत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ योग्याकार्ता शहर में स्थित प्रसिद्ध प्रम्बानन मंदिर का दौरा करेंगे। इस दौरान भारत और इंडोनेशिया मिलकर करीब 1,000 साल पुराने इस ऐतिहासिक मंदिर के संरक्षण और मरम्मत के काम की शुरुआत करेंगे। प्रम्बानन मंदिर दोनों देशों की साझा संस्कृति, इतिहास और प्राचीन सभ्यता का एक महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है।

1000 साल पुराना है मंदिर

इसका उद्देश्य भारत और इंडोनेशिया के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्तों को और मजबूत बनाना है। इस परियोजना के जरिए दोनों देश अपनी प्राचीन विरासत की रक्षा करने के साथ-साथ आपसी सहयोग और रणनीतिक संबंधों को भी आगे बढ़ाना चाहते हैं। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ संयुक्त बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "कल मुझे राष्ट्रपति प्रबोवो के साथ प्रम्बानन मंदिर संरक्षण परियोजना की शुरुआत करने का अवसर मिलेगा। करीब 1,000 साल पुराना प्रम्बानन मंदिर भारत और इंडोनेशिया की साझा सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है।"


इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर

प्रम्बानन इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर परिसर माना जाता है। यह देश की सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों में से एक है। इस विशाल मंदिर परिसर का निर्माण 9वीं सदी में मतारम साम्राज्य के समय हुआ था। उस दौर में यहां करीब 240 मंदिर थे। समय के साथ इनमें से कई मंदिर टूट-फूट गए और आज उनके अवशेष ही बचे हैं। इतिहास के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण हिंदू संजय राजवंश के राजा राकाई पिकाटन ने कराया था। उस समय मध्य जावा में बौद्ध शैलेंद्र राजवंश का भी काफी प्रभाव था। शैलेंद्र राजवंश ने बोरोबुदुर समेत कई बड़े बौद्ध स्मारकों का निर्माण कराया था।

जानें मंदिर का इतिहास

इतिहासकारों के अनुसार, प्रम्बानन मंदिर का निर्माण उस समय हुआ, जब इस क्षेत्र में फिर से हिंदू धर्म को मजबूत करने की कोशिश की जा रही थी। यह मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं था, बल्कि राजसत्ता, एकता और शासन की ताकत का भी प्रतीक माना जाता था। उस समय राजा को ईश्वर का प्रतिनिधि माना जाता था। धीरे-धीरे प्रम्बानन मंदिर साम्राज्य का प्रमुख धार्मिक और राजनीतिक केंद्र बन गया। प्रम्बानन मंदिर परिसर का सबसे बड़ा आकर्षण 47 मीटर ऊंचा भगवान शिव को समर्पित शिव महादेव मंदिर है। यह पूरे परिसर की सबसे ऊंची इमारत है। इसके अलावा यहां भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा को समर्पित दो प्रमुख मंदिर भी मौजूद हैं।

भूकंप से हुआ था मंदिर का भारी नुकसान

साल 1991 में प्रम्बानन मंदिर को उसकी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और शानदार वास्तुकला के कारण यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया था। यह दुनिया के सबसे सुंदर हिंदू मंदिर परिसरों में से एक माना जाता है और हर साल यहां हजारों देशी-विदेशी पर्यटक घूमने आते हैं। भूकंप से नुकसान होने के बावजूद इस मंदिर की ऐतिहासिक पहचान को बचाने के लिए समय-समय पर बड़े स्तर पर मरम्मत और संरक्षण का काम किया गया है।

प्रम्बानन मंदिर की पत्थर की दीवारों पर रामायण की कहानी को बेहद सुंदर नक्काशी के जरिए उकेरा गया है। श्रद्धालु और पर्यटक मंदिर की परिक्रमा करते हुए इन चित्रों के माध्यम से पूरी रामायण की कथा को क्रमवार देख सकते हैं। इंडोनेशिया की संस्कृति में भी रामायण का विशेष महत्व है। यहां प्रम्बानन मंदिर की भव्य पृष्ठभूमि में रामायण बैले का मंचन किया जाता है, जो इस सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखता है।

पीएम मोदी करेंगे दौरा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रम्बानन मंदिर दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब भारत और इंडोनेशिया के बीच सांस्कृतिक, रणनीतिक और आर्थिक सहयोग लगातार बढ़ रहा है। इस ऐतिहासिक मंदिर के संरक्षण और मरम्मत की परियोजना से दोनों देशों के सदियों पुराने सांस्कृतिक रिश्ते और साझा विरासत को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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