अब तक कांगो में इबोला के 1,000 से अधिक संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं और कम से कम 246 लोगों की मौत होने की जानकारी मिली है। वहीं पड़ोसी देश युगांडा में भी संक्रमण के नौ मामलों की पुष्टि हुई है, जिनमें एक व्यक्ति की जान जा चुकी है। इससे क्षेत्र में स्वास्थ्य अधिकारियों की चिंता और बढ़ गई है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि इस बीमारी पर काबू पाने में कई चुनौतियां सामने आ रही हैं। प्रभावित क्षेत्रों में जांच सुविधाएं सीमित हैं, सुरक्षा संबंधी समस्याएं बनी हुई हैं और स्वास्थ्य व्यवस्था भी पूरी तरह मजबूत नहीं है। इसके अलावा, कई इलाके पहले से ही संघर्ष और लोगों के पलायन जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं, जिससे हालात और कठिन हो गए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का मानना है कि संक्रमण के वास्तविक मामले मौजूदा आंकड़ों से अधिक हो सकते हैं, क्योंकि बीमारी का फैलाव इसकी पहचान होने से पहले ही शुरू हो चुका था।