ईरान से जंग में कूदा सऊदी अरब! इराक में US संग मिलकर तबाह किए कई ठिकाने, कुरान की आयत का दिया हवाला

Saudi Arabia Airstrikes Iraq Iran: बुधवार को सऊदी ने अमेरिकी वायुसेना के साथ मिलकर पूर्वी इराक में सक्रिय ईरान-समर्थित उग्रवादी गुटों के ठिकानों पर भीषण एयरस्ट्राइक की। सऊदी रक्षा मंत्रालय ने इसे 'आत्मरक्षा' में की गई सैन्य कार्रवाई बताया है, लेकिन अपनी इस कार्रवाई को सही ठहराने के लिए पवित्र कुरान की एक आयत का हवाला देकर यह साफ कर दिया है कि अगर उसकी संप्रभुता और तेल सुविधाओं पर हमला हुआ, तो वह खामोश नहीं रहेगा

अपडेटेड Jul 30, 2026 पर 4:26 PM
सऊदी ने अपनी कार्रवाई को धार्मिक और अंतरराष्ट्रीय कानून दोनों आधारों पर सही ठहराया

US Saudi Joint Airstrikes in Iraq: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच एक बहुत बड़ा भू-राजनीतिक मोड़ आया है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष से अब तक दूरी बनाकर रख रहा सऊदी अरब अब इस युद्ध में सीधे तौर पर शामिल हो गया है। बुधवार को सऊदी ने अमेरिकी वायुसेना के साथ मिलकर पूर्वी इराक में सक्रिय ईरान-समर्थित उग्रवादी गुटों के ठिकानों पर भीषण एयरस्ट्राइक की।

सऊदी रक्षा मंत्रालय ने इसे 'आत्मरक्षा' में की गई सैन्य कार्रवाई बताया है, लेकिन अपनी इस कार्रवाई को सही ठहराने के लिए पवित्र कुरान की एक आयत का हवाला देकर यह साफ कर दिया है कि अगर उसकी संप्रभुता और तेल सुविधाओं पर हमला हुआ, तो वह खामोश नहीं रहेगा।

कुरान की आयत और UN चार्टर का दिया हवाला


हमलों के तुरंत बाद सऊदी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मल्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक बेहद कड़ा बयान जारी किया। उन्होंने लिखा कि सऊदी वायु रक्षा प्रणाली ने रियाद और पूर्वी प्रांत में स्थित तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाने आ रहे कई ईरानी ड्रोनों को मार गिराया। ये ड्रोन इराक की सरजमीं से दागे गए थे।

सऊदी अरब ने अपनी कार्रवाई को धार्मिक और अंतरराष्ट्रीय कानून दोनों आधारों पर सही ठहराया। सऊदी मंत्रालय ने कुरान का संदर्भ देते हुए लिखा, 'अगर कोई आप पर हमला/आक्रमण करे, तो उस पर उसी तरह हमला करो जैसे उसने आप पर हमला किया है।' इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र के अनुच्छेद 51 का हवाला देते हुए सऊदी ने कहा कि हर देश को अपनी रक्षा और आत्मरक्षा का वैध अधिकार है।

अमेरिका और सऊदी का संयुक्त हमला: CENTCOM

अमेरिकी सेंट्रल कमान ने पुष्टि की कि अमेरिकी और सऊदी फाइटर जेट्स ने पूर्वी इराक में ईरान के 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) द्वारा संचालित उग्रवादी अड्डों, हथियारों के गोदामों और लॉजिस्टिक्स हब को निशाना बनाया।

CENTCOM के अनुसार, यह कार्रवाई पिछले 72 घंटों में IRGC के इशारे पर सऊदी अरब और अमेरिकी ठिकानों पर किए गए 30 से अधिक हवाई ड्रोन हमलों के जवाब में की गई है। फरवरी से शुरू हुए इस युद्ध में यह पहली बार है जब सऊदी अरब ने इराक के भीतर किसी उग्रवादी समूह के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में शामिल होने की बात खुलकर सार्वजनिक रूप से स्वीकार की है।

'मजबूरी में लिया युद्ध में कूदने का फैसला'

न्यू यॉर्क टाइम्स से बातचीत में गल्फ इंटरनेशनल फोरम के सीनियर फेलो अब्दुलअजीज अल घशियान ने बताया कि सऊदी अरब अब तक संयम बरत रहा था, लेकिन ईरान और उसके समर्थक गुटों ने सऊदी के इस संयम को उसकी 'कमजोरी या चुप्पी' समझ लिया।

रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इस एयरस्ट्राइक के जरिए सऊदी अरब अपने चारों तरफ मौजूद दुश्मनों को यह कड़ा संदेश देना चाहता है कि सऊदी इंफ्रास्ट्रक्चर या तेल सुविधाओं को नुकसान पहुंचाने की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।

मध्य पूर्व से जुड़े मामलों के एक्सपर्ट हसन अलहसन का कहना है कि हालांकि सऊदी इस युद्ध को और बढ़ाना नहीं चाहता, लेकिन यह हमला तेहरान के लिए एक सख्त चेतावनी है कि अगर उकसावे की कार्रवाई जारी रही, तो सऊदी को मजबूरी में अमेरिका के साथ मिलकर पूर्ण सैन्य मोर्चा खोलना पड़ेगा।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।