बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने शुक्रवार (23 जनवरी) को नई दिल्ली में अपनी पिछली सरकार के सदस्यों की तरफ से आयोजित एक हाई-प्रोफाइल मीडिया ब्रीफिंग में अपनी बात रखीं। इस दौरान एक चुनौती भरा ऑडियो संदेश दिया। न्यूज 18 के मुताबिक, साउथ एशिया के फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब में हुए इस कार्यक्रम में ऑडियो लिंक के जरिए बोलते हुए हसीना ने अपनी मौजूदा स्थिति को निर्वासन में लोकतंत्र बताया। उन्होंने नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर जोरदार हमला किया।
हसीना अगस्त 2024 में अपनी सरकार गिरने के बाद से भारत में रह रही हैं। हसीना सुरक्षा कारणों से वीडियो का इस्तेमाल नहीं किया। उनका संदेश उनके समर्थकों के लिए एक एकजुट होने की अपील थी। साथ ही यह ढाका में मौजूदा प्रशासन की वैधता के लिए एक सीधी चुनौती थी। हसीना ने अंतरिम प्रशासन को सत्ता की लालच और धोखे से प्रेरित खूनी, फासीवादी गुट बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके षड्यंत्रकारी तरीके से हटाए जाने के बाद से देश 'खूनी अराजकता' में डूब गया है।
उन्होंने बांग्लादेश के नागरिकों से अभी हार न मानने का आग्रह किया। हसीना ने समर्थकों से लोकतंत्र को वापस पाने और किसी भी कीमत पर विदेशी-समर्थक शासन को उखाड़ फेंकने के लिए सार्वजनिक समर्थन जुटाने की अपील की। पूर्व प्रधानमंत्री ने मोहम्मद यूनुस से अपने ही लोगों को नजरअंदाज करना बंद करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी अवैध सरकार सत्ता में है, तब तक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव असंभव है।
NDTV के मुताबिक, 'बांग्लादेश में लोकतंत्र बचाओ' टाइटल वाले इस कार्यक्रम में हसीना की अवामी लीग सरकार के कई पूर्व मंत्री और बांग्लादेशी प्रवासी समुदाय के सदस्य शामिल हुए। लेकिन सुरक्षा कारणों से हसीना खुद नहीं आ सकीं। हालांकि उनका भाषण खचाखच भरे हॉल में जारी किया गया। उन्होंने अपने भाषण के दौरान यूनुस सरकार पर हमला बोलते हुए बार-बार 'हत्यारा फासीवादी', 'खूनी अराजकता', 'सूदखोर', 'मनी लॉन्डरर' और 'सत्ता-लोभी गद्दार' करार दिया।
मंत्रियों ने बांग्लादेश में कानून और व्यवस्था के व्यवस्थित पतन का जिक्र किया। ब्रीफिंग का एक बड़ा हिस्सा धार्मिक अल्पसंख्यकों की दुर्दशा को समर्पित था। उन्हें हसीना ने समाज में सबसे कमजोर बताया। उन्होंने दावा किया कि अंतरिम अधिकारियों की देखरेख में हिंदुओं, बौद्धों और ईसाइयों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। उन पर हमला किया जा रहा है।
इस ब्रीफिंग का समय बहुत अहम है, क्योंकि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने 12 फरवरी को नेशनल चुनाव कराने का अस्थायी शेड्यूल तय किया है। हालांकि, आवामी लीग पर अभी चुनाव में हिस्सा लेने पर बैन लगा हुआ है। उसकी टॉप लीडरशिप या तो देश से बाहर है या ढाका में मुकदमे का सामना कर रही है। इसलिए हसीना के समर्थकों ने आने वाले चुनावों को मुकाबला न मानकर 'राज्याभिषेक' बताया है।
भारत सरकार ने एक नाजुक डिप्लोमैटिक संतुलन बनाए रखा है। हसीना को शरण दी है। लेकिन आधिकारिक तौर पर कहा है कि उनकी टिप्पणियां व्यक्तिगत तौर पर की गई हैं। इस बीच, बांग्लादेश ने गुरुवार को अगले महीने भारत में होने वाले टी20 वर्ल्ड कप के लिए अपनी राष्ट्रीय क्रिकेट टीम भेजने से इनकार कर दिया। इस फैसले से स्कॉटलैंड के लिए टूर्नामेंट में बांग्लादेश की जगह लेने का रास्ता साफ हो गया।