World Bank Update: कंगाली से उबरकर श्रीलंका बना अपर-मिडिल इनकम देश, वर्ल्ड बैंक ने भारत को किस कैटिगरी में रखा?

भारत अभी भी वर्ल्ड बैंक की लोअर मिडिल इनकम वाले देशों की कटैगरी में है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि देश की अर्थव्यवस्था कमजोर है। दरअसल, वर्ल्ड बैंकदेशों को उनकी प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (GNI Per Capita) के आधार पर अलग-अलग कटैगरी में रखता है। यानी यह देखा जाता है कि देश के हर व्यक्ति की एवरेज इनकम कितनी है, न कि केवल देश की कुल अर्थव्यवस्था कितनी बड़ी है

अपडेटेड Jul 04, 2026 पर 5:20 PM
वर्ल्ड बैंक ने श्रीलंका को एक बार फिर अपर-मिडिल इनकम वाले देशों की श्रेणी में शामिल कर दिया है।

वर्ल्ड बैंक ने श्रीलंका को एक बार फिर अपर मिडिल इनकम वाले देशों की कैटेगरी में शामिल कर दिया है। यह 2022 में आए गंभीर आर्थिक संकट से उबरने की दिशा में श्रीलंका के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। वहीं, वियतनाम और फिलीपींस को भी बेहतर आय वर्ग में जगह मिली है, जो उनकी लगातार मजबूत होती अर्थव्यवस्था को दिखाता है।

भारत की नहीं बदली कटैगरी

दूसरी ओर, भारत अब भी लोअर मिडिल इनकम वाले देशों की कैटेगरी में बना हुआ है। भारत को यह दर्जा साल 2007 में मिला था और अभी तक इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। हालांकि, यह वर्गीकरण केवल देश की कुल अर्थव्यवस्था पर नहीं, बल्कि प्रति व्यक्ति आय और लोगों के बीच आय के डिस्ट्रीब्यूशन पर भी आधारित होता है। वर्ल्ड बैंक ने अपनी नई रिपोर्ट में श्रीलंका की वापसी को आर्थिक सुधार की बड़ी सफलता बताया है।


श्रीलंका ने तीन साल में की अच्छी वापसी 

वर्ल्ड बैंक ने कहा कि 2022 के गंभीर आर्थिक संकट के बाद श्रीलंका ने सिर्फ तीन साल में अच्छी वापसी की है। साल 2025 में देश की अर्थव्यवस्था में 5 प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज की गई। इसके पीछे उद्योगों में सुधार, पर्यटन क्षेत्र की तेज़ रफ्तार और वित्तीय सेवाओं का बेहतर प्रदर्शन मुख्य वजह रहे। वर्ल्ड बैंक के अनुसार, श्रीलंका का दोबारा अपर मिडिल इनकम वाले देशों की कटैगरी में पहुंचना उसकी आर्थिक मजबूती का संकेत है। हालांकि, यह तय सीमा को बहुत कम अंतर से पार कर सका है।

श्रीलंका पहली बार साल 2019 में ऊपरी-मध्यम आय वाले देशों की सूची में शामिल हुआ था। लेकिन इसके बाद आर्थिक रफ्तार धीमी पड़ गई और देश गंभीर वित्तीय संकट में फंस गया। हालात इतने बिगड़ गए कि 2022 में श्रीलंका अपने सरकारी कर्ज का भुगतान भी नहीं कर सका। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के सहयोग से कई आर्थिक सुधार किए गए। सरकार ने खर्च पर नियंत्रण रखा, कर्ज का दोबारा प्रबंधन किया, पर्यटन को बढ़ावा दिया और विदेशों में रहने वाले श्रीलंकाई लोगों से आने वाली रकम भी बढ़ी। इन कदमों की मदद से देश की अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे फिर से पटरी पर लौटने लगी।

वियतनाम और फिलीपींस ने भी लगातार कई सालों तक मजबूत आर्थिक विकास के दम पर वर्ल्ड बैंक की अपर मिडिल इनकम वाले देशों की श्रेणी में जगह बना ली है। वियतनाम का निर्यात आधारित मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र लगातार विदेशी निवेश को आकर्षित कर रहा है। वहीं, फिलीपींस में भी कई क्षेत्रों में तेज आर्थिक विकास देखने को मिला है। इन दोनों देशों के शामिल होने के बाद अब दक्षिण-पूर्व एशिया की पांचों प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं—सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड, वियतनाम और फिलीपींस—या तो अपर मिडिल इनकम वाले देशों की कटैगरी में हैं या उससे भी ऊपर के आय वर्ग में पहुंच चुकी हैं।

भारत का दर्जा क्यों नहीं बदला?

भारत अभी भी वर्ल्ड बैंक की लोअर मिडिल इनकम वाले देशों की कटैगरी में है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि देश की अर्थव्यवस्था कमजोर है। दरअसल, वर्ल्ड बैंकदेशों को उनकी प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (GNI Per Capita) के आधार पर अलग-अलग कटैगरी में रखता है। यानी यह देखा जाता है कि देश के हर व्यक्ति की एवरेज इनकम कितनी है, न कि केवल देश की कुल अर्थव्यवस्था कितनी बड़ी है। भारत की आबादी बहुत ज्यादा है, इसलिए आय का औसत बढ़ाने के लिए देश की कुल कमाई में भी काफी बड़ी बढ़ोतरी की जरूरत होती है।

वर्ल्ड बैंकके नए नियमों के अनुसार, जिन देशों की प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (GNI) 1,136 डॉलर से 4,495 डॉलर के बीच होती है, उन्हें लोअर मिडिल इनकम वाले देशों की श्रेणी में रखा जाता है। वहीं, जिन देशों की प्रति व्यक्ति आय 4,496 डॉलर से 13,935 डॉलर के बीच होती है, वे ऊपरी-मध्यम आय वाले देशों की श्रेणी में आते हैं। भारत की प्रति व्यक्ति GNI फिलहाल करीब 2,500 से 2,700 डॉलर के बीच है। यही वजह है कि दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने के बावजूद भारत अभी भी लोअर मिडिल इनकम वाले देशों की श्रेणी में बना हुआ है।

वर्ल्ड बैंक ने देशों का इनकम कटैगरी तय करने के लिए GDP नहीं, बल्कि प्रति व्यक्ति आय (GNI) को आधार मानता है। GDP से पता चलता है कि किसी देश में एक साल के दौरान कितना उत्पादन और सेवाएं हुई हैं, जबकि GNI यह बताती है कि उस देश के लोगों और कंपनियों ने कुल कितनी आय कमाई, चाहे वह देश के भीतर से हो या विदेश से। भारत जैसे बड़ी आबादी वाले देश में केवल GDP बढ़ने से हर व्यक्ति की औसत आय तेजी से नहीं बढ़ती। इसकी वजह यह है कि देश की कुल आय बहुत बड़ी आबादी में बंट जाती है। इसलिए अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ने के बावजूद प्रति व्यक्ति आय बढ़ने में ज्यादा समय लगता है।

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