सूडान की खदानों से ऐसे निकला जा रहा है सोना, भुखमरी से बचने के लिए मेटल डिटेक्टर लेकर मौत की सुरंगों में उतरे लोग!
Sudan Gold Mining: सूडान में अधिकांश माइनिंग छोटे पैमाने पर और अवैध तरीके से होती है, जहां सुरक्षा के कोई नियम नहीं हैं। मजदूर पहले अयस्क को खोदकर निकालते हैं, उसे पीसते हैं और फिर सोने को अलग करने के लिए बेहद जहरीले पारे का इस्तेमाल करते हैं। यह प्रक्रिया खनिकों और आसपास रहने वाले लोगों के फेफड़ों और स्वास्थ्य के लिए बेहद जानलेवा है
माइनिंग में लोग न सिर्फ जहरीले पारे का सामना कर रहे हैं, बल्कि आए दिन ढहने वाली खदानों में दबकर अपनी जान भी गंवा रहे हैं
Sudan Gold Mining: युद्ध और तबाही की मार झेल रहे सूडान से ऐसे तस्वीरें सामने आईं है जिससे हर किसी का दिल दहल जाए। देश में जारी भीषण गृहयुद्ध के बीच अपनी जान बचाने और भुखमरी से बचने के लिए लाखों लोग मौत के कुओं में उतरने को मजबूर हैं। सूडान के उत्तरी शहर डाल्गो महास (Dalgo Mahas) सहित देश के हजारों इलाकों में लोग हाथों में मेटल डिटेक्टर और फावड़े लेकर सोने की तलाश में पहाड़ों और अवैध खदानों की खाक छान रहे हैं।
सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर की जा रही इस माइनिंग में लोग न सिर्फ जहरीले पारे का सामना कर रहे हैं, बल्कि आए दिन ढहने वाली खदानों में दबकर अपनी जान भी गंवा रहे हैं। समझिए कैसे सूडान की 'वॉर इकोनॉमी' इस समय पूरी तरह सोने की तस्करी और इस जानलेवा खेल पर टिकी हुई है।
आइए आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर वो 5 बड़े मुद्दे कौन से हैं, जिन पर यह डील कभी भी टूट सकती है।
तेल छिनने के बाद सूडान के लिए 'लाइफलाइन' बना सोना
सूडान के लिए सोना सिर्फ एक धातु नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को चलाने का एकमात्र जरिया बन चुका है। साल 2011 में जब दक्षिण सूडान अलग हुआ, तो सूडान ने अपने तेल राजस्व का दो-तिहाई हिस्सा गंवा दिया। इसके बाद देश के खजाने को भरने के लिए सोने पर निर्भरता बढ़ गई। सूडान के राष्ट्रीय राजस्व में सोने की हिस्सेदारी 70% तक पहुंच गई, जिससे सरकार को जरूरी विदेशी मुद्रा मिलती है।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, सूडान ने पिछले साल 70 टन सोने का उत्पादन किया, जो 2024 के 64 टन से अधिक है। सूडान की सरकारी मिनरल रिसोर्सेज कंपनी के अनुसार, साल 2025 में सोने से करीब 1.8 अरब डॉलर का राजस्व मिला। इसके साथ ही सूडान अफ्रीका के सबसे बड़े सोना उत्पादक देशों में शामिल हो गया है।
भुखमरी और युद्ध ने छुड़ाई खेती, खदानों की ओर रुख किए लोग
सूडान में जारी सेना और पैरामिलिट्री रैपिड सपोर्ट फोर्सेज के बीच के युद्ध ने दुनिया का सबसे बड़ा मानवीय संकट पैदा कर दिया है। इस संघर्ष में अब तक 59000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और 1 करोड़ से ज्यादा लोग अपना घर छोड़ने पर मजबूर हुए हैं। देश का एक बड़ा हिस्सा भुखमरी और अकाल की कगार पर है।
विस्थापित हुए युवाओं और परिवारों के पास आजीविका का कोई साधन नहीं बचा है। खेती-बाड़ी छोड़कर माइनिंग में उतरे 28 वर्षीय अत्ता अल-खाजिन ने बताया, 'ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण खेती में लागत भी नहीं निकल रही थी, अब जिंदा रहने के लिए सोना तलाशना ही एकमात्र सहारा है'।
मौत का नहीं है कोई डर, जहरीली सुरंगों में उतर रहे लोग
सूडान में अधिकांश माइनिंग छोटे पैमाने पर और अवैध तरीके से होती है, जहां सुरक्षा के कोई नियम नहीं हैं। मजदूर पहले अयस्क को खोदकर निकालते हैं, उसे पीसते हैं और फिर सोने को अलग करने के लिए बेहद जहरीले पारे का इस्तेमाल करते हैं। इस मलबे को बाद में स्टोव पर गर्म करके वाष्पीकृत किया जाता है, जिससे शुद्ध सोना मिलता है। यह प्रक्रिया खनिकों और आसपास रहने वाले लोगों के फेफड़ों और स्वास्थ्य के लिए जानलेवा है।
इन बिना पिलर वाली कच्ची सुरंगों के ढहने से अक्सर मौतें होती हैं। पिछले महीने रेड सी प्रांत में खदान ढहने से 7 मजदूरों की मौत हो गई थी, जबकि जनवरी में साउथ कोरडोफान प्रांत में ऐसे ही एक हादसे में 13 लोग जिंदा दफन हो गए थे।
ब्लैक मार्केट और तस्करी से हो रही आधी से ज्यादा कमाई
यूनाइटेड नेशंस (UN) के विशेषज्ञों के पैनल की रिपोर्ट के मुताबिक, सूडान में निकाला जाने वाला 50% से अधिक सोना आधिकारिक चैनलों के बजाय अवैध रूप से देश से बाहर स्मगल कर दिया जाता है।इस सोने की तस्करी का इस्तेमाल मुख्य रूप से युद्ध के लिए हथियार और फंडिंग जुटाने में हो रहा है।
पैरामिलिट्री फोर्सेज, जिसका दारफुर और कोरडोफान जैसे प्रमुख सोना उत्पादक क्षेत्रों पर कब्जा है, इस अवैध सोने को बेचकर युद्ध लड़ रही है। साल 2019 में तानाशाह ओमर अल-बशीर के तख्तापलट के बाद आई नागरिक सरकार ने इस इंडस्ट्री को रेगुलेट करने की कोशिश की थी, लेकिन 2021 के सैन्य तख्तापलट और 2023 में शुरू हुए युद्ध ने उन कोशिशों को पूरी तरह खत्म कर दिया।