स्वीडन में लेफ्ट विंग ब्लॉक ने जीता चुनाव तो PM उल्फ क्रिस्टरसन ने दिया इस्तीफा! एक करोड़ की आबादी वाले इस मुल्क के चुनाव को समझिए

स्वीडन की राजनीति में होने राजनीति में होने वाली है बड़ी उथल-पुथल होने वाली। खबरें हैं कि स्वीडन में लेफ्ट विंग ब्लॉक ने चुनाव जीत लिया है। स्वीडन की राजनीति में क्या कुछ चल रहा है वो समझने के लिए पढ़ें पूरी खबर....

अपडेटेड Sep 17, 2026 पर 11:12 PM
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Sweden Election 2026

Sweden Election 2026: क्या स्वीडन की राजनीति में होने वाला है बड़ा उलटफेर ? आखिर क्यों स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन दिया इस्तीफा ? स्वीडव जैसे कम आबादी वाले में मुल्क में अचनाक ऐसी राजनीतिक हलचल क्यों शुरू हो गई। दरअसल स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने देश में हुए संसदीय चुनाव में हार के बाद इस्तीफा देने का ऐलान किया है। चुनाव के अंतिम नतीजे सामने आने के बाद उन्होंने यह फैसला लिया है। आम चुनाव में उनकी सरकार को विपक्षी दलों से मामूली अंतर से हार का सामना करना पड़ा। विपक्षी गठबंधन ने सिर्फ 26,169 वोटों के अंतर से बहुमत हासिल कर लिया।

किस पार्टी को मिली कितनी सीटें

आम चुनाव के अंतिम नतीजों में चार विपक्षी दलों को 349 सदस्यीय रिक्सडाग में 176 सीटें मिलीं, जबकि क्रिस्टरसन के सत्तारूढ़ गठबंधन को 173 सीटें मिलीं। विदेशों से आए वोटों समेत देर से मिले मतपत्रों की गिनती के बाद नतीजे की पुष्टि की गई।


नतीजे सामने आने के बाद क्रिस्टरसन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट किया जिसमें उन्होंने लिखा, "अब नए प्रधानमंत्री के लिए आगे की प्रक्रिया स्पीकर के नेतृत्व में होगी। इसलिए मैं प्रधानमंत्री पद से मुक्त किए जाने का अनुरोध करता हूं, ताकि यह काम तुरंत शुरू हो सके।"

सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता मैग्डेलेना एंडरसन के चार साल विपक्ष में रहने के बाद अब वे फिर से सत्ता में आने और दोबारा प्रधानमंत्री बनने की उम्मीद है। चुनाव में उनकी पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। वहीं, व्यापक केंद्र-वाम गठबंधन ने 349 सदस्यीय रिक्सडाग में बहुमत के लिए पर्याप्त सीटें हासिल कर ली हैं। लेकिन सरकार बनाने के लिए सोशल डेमोक्रेट्स को केंद्र-वाम गठबंधन में शामिल अलग-अलग दलों के बीच मौजूद मतभेदों को संभालना होगा। ये चार दलों वाला विपक्षी बहुमत बेहद मामूली बताया जा रहा है। ऐसे में नई सरकार को अपने सरकार के कामकाज को आगे बढ़ाने के लिए संसद में पूरा समर्थन जुटाना होगा।

1 करोड़ की आबादी वाले इस मुल्क के चुनाव को समझिए

करीब 1 करोड़ की आबादी वाले स्वीडन में हुए आम चुनाव के नतीजों ने देश की राजनीति हलचल मचा दी है। चलिए समझते है आखिर कैसे होते हैं इस छोटी आबादी वाले मुल्क में चुनाव। चुनाव की पूरी प्रक्रिया को समझने की कोशश करते हैं। स्वीडन की आबादी करीब 1.06 करोड़ है और इस बार के चुनाव में 80 लाख से ज्यादा लोग वोट देने के पात्र थे। संसद यानी Riksdag में कुल 349 सीटें हैं। स्वीडन में जनता संसद के सदस्यों के लिए वोट करती है। इसके बाद Riksdag प्रधानमंत्री का चुनाव करती है। यानी चुनाव में सबसे ज्यादा वोट पाने वाला नेता अपने आप प्रधानमंत्री नहीं बन जाता, उसे संसद में पर्याप्त समर्थन हासिल करना पड़ता है।

चुनाव की प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझने के लिए हाल के चुनावों का उदाहरण लेते हैं। स्वीडन के इस चुनाव के अंतिम नतीजों में विपक्षी केंद्र-वाम दलों को 176 सीटें मिलीं, जबकि क्रिस्टरसन के नेतृत्व वाले गठबंधन को 173 सीटें मिलीं। यानी दोनों पक्षों के बीच सिर्फ 3 सीटों का अंतर ही रहा। वोटों में भी अंतर काफी कम रहा। लेकिन फिर भी विपक्षी केंद्र-वाम दलों के लिए सरकार बनाना इतना आसान नहीं होगा।

बता दें कि करीब 1 करोड़ की आबादी वाले स्वीडन में प्रधानमंत्री का चुनाव सीधे जनता नहीं करती। जनता संसद यानी रिक्सडाग (Riksdag) के लिए अपने प्रतिनिधि चुनती है और फिर संसद प्रधानमंत्री का चुनाव करती है। इस बार 349 सीटों वाली संसद में केंद्र-वाम गठबंधन को 176 सीटें मिली हैं, जबकि प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन के गठबंधन को 173 सीटें मिलीं। सिर्फ 3 सीटों के इस अंतर ने चुनाव को बेहद करीबी बना दिया है। अब पूर्व प्रधानमंत्री मैग्डेलेना एंडरसन के सामने अलग-अलग विपक्षी दलों को साथ लाकर नई सरकार बनाने की चुनौती साफ नजर आ रही है।

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