क्या अमेरिका के इस टॉप साइंटिस्ट ने वुहान लैब को दिए थे पैसे, जहां से फैली थी Covid-19 महामारी? इस 'खुलासे' से दुनिया में मचा तहलका!
DNI तुलसी गबार्ड के दफ्तर से जारी बयान में कहा गया है कि 85 वर्षीय डॉ. फाउची, जो 38 सालों तक अमेरिका की प्रमुख स्वास्थ्य संस्था (NIAID) के हेड रहे, उन्होंने बड़ी-बड़ी फार्मा कंपनियों (दवा निर्माताओं) के फायदे और ट्रिलियन डॉलर के वैक्सीन बाजार के चक्कर में इस खतरनाक रिसर्च को बढ़ावा दिया
क्या अमेरिका के इस टॉप साइंटिस्ट ने वुहान लैब को दिए थे पैसे, जहां से फैली थी Covid-19 महामारी? इस 'खुलासे' से दुनिया में मचा तहलका! (FILE PHOTO)
अमेरिका की राजनीति और खुफिया विभाग से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। अमेरिका की निवर्तमान डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस (DNI) तुलसी गबार्ड ने अपने कार्यकाल के आखिरी दिन कुछ ऐसे सीक्रेट दस्तावेज जारी किए हैं, जिसने पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया है। गबार्ड ने सीधे तौर पर पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के मुख्य चिकित्सा सलाहकार रहे डॉ. एंथनी फाउची पर कोरोना महामारी (COVID-19) के सच को दबाने और अमेरिका की संसद से झूठ बोलने का गंभीर आरोप लगाया है।
गबार्ड के दफ्तर से जारी बयान के मुताबिक, डॉ. फाउची ने चीन की उसी वुहान लैब (WIV) को पैसे दिए थे, जहां से कोरोना वायरस के लीक होने का दावा पूरी दुनिया में किया जाता है।
Today, on my final day as Director of National Intelligence, I’m releasing never-before-seen communications and documents exposing how Dr. Fauci provided millions in US taxpayer dollars to fund dangerous gain-of-function research at the Wuhan lab, worked with politicized elements… pic.twitter.com/ZMdliW4zyS
चीनी लैब को दिए अमेरिकी टैक्सपेयर्स के करोड़ों डॉलर
तुलसी गबार्ड ने अपने आखिरी दिन "पहले कभी न देखे गए" खुफिया दस्तावेजों को सार्वजनिक करते हुए सनसनीखेज दावे किए हैं:
खतरनाक रिसर्च की फंडिंग: डॉ. फाउची ने अमेरिकी जनता के टैक्स के लाखों-करोड़ों डॉलर चीन के 'वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी' (WIV) को दिए थे। इस पैसे का इस्तेमाल चमगादड़ों के कोरोना वायरस पर बेहद खतरनाक 'गेन-ऑफ-फंक्शन' (वायरस की ताकत और फैलने की क्षमता बढ़ाने वाली) रिसर्च के लिए किया गया था।
सच्चाई को दबाया: जब 2020 की शुरुआत में कोरोना महामारी फैली, तो फाउची ने खुफिया एजेंसियों के कुछ बड़े अधिकारियों के साथ मिलकर इस बात को पूरी तरह दबा दिया कि यह वायरस चीन की लैब से लीक (Lab-Leak) हुआ था।
'डीप स्टेट' का हथकंडा: खुफिया एजेंसियों को मोहरा बनाया
गबार्ड के दफ्तर द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि 85 वर्षीय डॉ. फाउची, जो 38 सालों तक अमेरिका की प्रमुख स्वास्थ्य संस्था (NIAID) के हेड रहे, उन्होंने बड़ी-बड़ी फार्मा कंपनियों (दवा निर्माताओं) के फायदे और ट्रिलियन डॉलर के वैक्सीन बाजार के चक्कर में इस खतरनाक रिसर्च को बढ़ावा दिया।
पीछे से घुमाई पूरी बाजी
बयान के मुताबिक, फाउची ने पर्दे के पीछे से खेल रचा। उन्होंने अपने पसंदीदा वैज्ञानिकों की एक टीम बनाई और अमेरिकी खुफिया एजेंसियों पर दबाव डाला कि वे जनता के सामने यही कहें कि कोरोना वायरस किसी लैब से नहीं, बल्कि प्राकृतिक रूप से जानवरों के जरिए फैला है। उन्होंने एक फर्जी रिसर्च पेपर भी तैयार करवाया ताकि लैब-लीक थ्योरी को झुठलाया जा सके। जो भी वैज्ञानिक या अधिकारी फाउची की बात से असहमत होता था, उसे नौकरी से हटाने या करियर बर्बाद करने की धमकियां दी जाती थीं।
"संसद के सामने कसम खाकर बोला झूठ"
तुलसी गबार्ड, जिन्होंने हाल ही में अपने बीमार पति की देखभाल के लिए डोनाल्ड ट्रंप की इंटेलिजेंस चीफ का पद छोड़ने का फैसला किया था, उन्होंने कहा कि फाउची के ये पैंतरे सीधे तौर पर 'डीप स्टेट' (पर्दे के पीछे से सरकार चलाने वाले सीक्रेट नेटवर्क) जैसे हैं।
गबार्ड ने बताया कि जून 2024 में जब अमेरिकी संसद की सुनवाई के दौरान फाउची से कसम खिलवाकर पूछा गया था कि— "क्या उन्होंने महामारी के पहले या बाद में एफबीआई (FBI), सीआईए (CIA) या किसी अन्य खुफिया एजेंसी से वायरस रिसर्च को लेकर कोई बात की थी?" तो फाउची ने सवालों से बचते हुए साफ झूठ बोल दिया कि उनके संज्ञान में ऐसी कोई बात नहीं है। जबकि नए दस्तावेज गवाही दे रहे हैं कि वे लगातार खुफिया अधिकारियों के संपर्क में थे।
अमेरिकी जनता को चाहिए इंसाफ
तुलसी गबार्ड ने भावुक होते हुए कहा, "कोविड-19 महामारी ने लाखों अमेरिकी नागरिकों और दुनिया भर के अनगिनत लोगों को असहनीय दर्द और तकलीफें दी हैं। सालों के झूठ, सेंसरशिप और सच को छुपाने के खेल के बाद, अब अमेरिकी जनता पारदर्शिता, सच्चाई और इंसाफ की हकदार है।"
गबार्ड के इन बेहद संगीन और सीधे आरोपों पर फिलहाल डॉ. एंथनी फाउची या उनके करीबियों की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या सफाई सामने नहीं आई है। लेकिन इस खुलासे ने दुनिया के सबसे बड़े वैश्विक संकट यानी कोरोना वायरस के जन्म को लेकर एक बार फिर महासंग्राम छेड़ दिया है।