Trump Tariff: रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिका लगाएगा 500% तक का टैरिफ, निशाने पर भारत और चीन

US Tariffs: रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने ट्रंप के साथ बैठक के बाद जानकारी दी कि यह बिल राष्ट्रपति को अभूतपूर्व शक्तियां देगा। रूस से तेल, गैस या यूरेनियम खरीदने वाले देशों से आयात होने वाले सभी सामानों पर 500% तक का टैरिफ लगाया जा सकता है

अपडेटेड Jan 08, 2026 पर 11:48 AM
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अगर रूस 50 दिनों के भीतर यूक्रेन के साथ शांति समझौते के लिए तैयार नहीं होता है, तो ये कड़े प्रतिबंध लागू हो जाएंगे

Trump Tariff: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसे विधेयक को हरी झंडी दे दी है, जो रूस से व्यापार जारी रखने वाले देशों के लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है। 'सेंक्शनिंग ऑफ रशिया एक्ट 2025' नाम के इस बिल का उद्देश्य रूस के राजस्व स्रोतों को खत्म कर उसे यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के लिए मजबूर करना है। इसके तहत रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500% तक टैरिफ लगाया जा सकता है। इस बिल से विशेष रूप से भारत, चीन और ब्राजील जैसे देश प्रभावित होंगे।

500% टैरिफ की चेतावनी


रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने ट्रंप के साथ बैठक के बाद जानकारी दी कि यह बिल राष्ट्रपति को अभूतपूर्व शक्तियां देगा। रूस से तेल, गैस या यूरेनियम खरीदने वाले देशों से आयात होने वाले सभी सामानों पर 500% तक का टैरिफ लगाया जा सकता है। ग्राहम ने इसे एक 'लीवरेज' बताया है, ताकि भारत और चीन जैसे बड़े खरीदार रूसी तेल छोड़कर अमेरिकी या अन्य विकल्पों की ओर मुड़ें।

क्या है बिल की मुख्य शर्तें

अगर रूस 50 दिनों के भीतर यूक्रेन के साथ शांति समझौते के लिए तैयार नहीं होता है, तो ये कड़े प्रतिबंध लागू हो जाएंगे। इस विधेयक पर अगले हफ्ते अमेरिकी कांग्रेस में मतदान होने की संभावना है। इसे डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन दोनों का भारी समर्थन प्राप्त है। विशेषज्ञों का कहना है कि जहां अमेरिका ने भारत पर सीधे टैरिफ लगाए हैं, वहीं चीन के खिलाफ वह फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है ताकि वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित न हो।

भारत पर बढ़ता दबाव

भारत पहले ही अमेरिका के व्यापारिक और कूटनीतिक दबाव का सामना कर रहा है। अगस्त 2025 से अमेरिका ने चुनिंदा भारतीय सामानों पर पहले ही 50% तक टैरिफ लगा रखा है, जिसमें से 25% सीधा रूसी तेल खरीद से जुड़ा है। अमेरिकी दबाव और अक्टूबर 2025 में रूसी तेल कंपनियों (रोसनेफ्ट, लुकोइल) पर लगे प्रतिबंधों के कारण भारत का रूसी तेल आयात दिसंबर में 3 साल के निचले स्तर 1.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन पर पहुंच गया है।

ट्रंप ने हाल ही में कहा कि पीएम मोदी उनके अच्छे दोस्त हैं, लेकिन वे इन शुल्कों से खुश नहीं हैं। वहीं, भारत ने स्पष्ट किया है कि उसकी ऊर्जा खरीद राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों पर आधारित है।

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