ईरान से मिली धमकी के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दौरे में गुपचुप तरीके से बदलाव किया गया था। ट्रंप तुर्की से एक छोटे अमेरिकी सैन्य विमान में सवार होकर ब्रिटेन के लिए रवाना हुए थे। ट्रंप नाटो शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए तुर्की की राजधानी अंकारा पहुंचे थे। तुर्की जाने के लिए उन्होंने कतर की ओर से उपहार में दिए गए और नए सिरे से तैयार किए गए बोइंग 747-8 विमान का इस्तेमाल किया था। इस विमान को संभावित रूप से भविष्य में ‘एयर फोर्स वन’ के तौर पर इस्तेमाल किया जाना है।
बदला गया था ट्रंप का प्लेन
हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार तुर्की से लौटते समय ट्रंप को उसी विमान से रवाना नहीं किया गया। सार्वजनिक कार्यक्रम के मुताबिक उन्हें पुराने ‘एयर फोर्स वन’ विमान से भी नहीं जाना था। इसके बजाय सुरक्षा कारणों से उन्हें चुपचाप अमेरिकी वायु सेना के सी-32ए विमान में बैठाया गया। यह विमान ट्रंप को तुर्की से ब्रिटेन लेकर गया। यह पूरा बदलाव 8 जुलाई को किया गया था। उस समय अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा हुआ था और ईरान की ओर से ट्रंप को धमकी मिलने की खबरें सामने आई थीं।
ईरान की धमकी के बाद उठाया गया था कदम
ईरान की सीमा तुर्की से लगती है। ऐसे में ईरान से बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप की यात्रा में किए गए इस बदलाव को सुरक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है। रिपोर्ट में ऑपरेशन से जुड़े एक अमेरिकी अधिकारी और ट्रंप की यात्रा की जानकारी रखने वाले एक अन्य व्यक्ति के हवाले से बताया गया है कि ट्रंप ने सबसे पहले अंकारा एयरपोर्ट पर कैमरों के सामने पुराने ‘एयर फोर्स वन’ विमान में सवार होने की औपचारिकता पूरी की।
इसके बाद उन्हें चुपचाप एक कैटरिंग ट्रक में बैठाकर दूसरे हिस्से में ले जाया गया। यह ट्रक उन्हें अमेरिकी वायु सेना के छोटे सी-32ए विमान तक लेकर गया। इसके बाद सी-32ए विमान ट्रंप को लेकर ब्रिटेन के लिए रवाना हो गया। ट्रंप रात करीब 10:20 बजे ब्रिटेन पहुंचे। वहीं, पत्रकारों और दूसरे कर्मचारियों को लेकर चल रहा पुराना ‘एयर फोर्स वन’ विमान कुछ मिनट बाद ब्रिटेन पहुंचा। इस तरह ट्रंप और उनके साथ यात्रा कर रहे मीडिया कर्मचारियों के विमान के पहुंचने के समय में कुछ मिनट का अंतर रहा।
अमेरिकी मीडिया ने इससे पहले भी बताया था कि ईरान से मिली धमकी के कारण ट्रंप कतर की ओर से दिए गए नए विमान से तुर्की से रवाना नहीं हुए थे। कई मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि यह धमकी ईरान से जुड़े प्रॉक्सी समूहों की ओर से मिली थी। इसी खतरे को देखते हुए ट्रंप की सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव किया गया और उन्हें चुपचाप दूसरे अमेरिकी सैन्य विमान से ब्रिटेन भेजा गया।