ट्रंप के चक्रव्यूह में बुरा फंसा पाकिस्तान! अगर इजरायल को दी मान्यता, तो रद्दी हो जाएगा अपना ही 'पासपोर्ट'

Trump Pakistan Abraham Accord: पाकिस्तान के 78 साल के इतिहास में उसने कभी इजरायल को स्वीकार नहीं किया। इसी वजह से पाकिस्तान के हर पासपोर्ट पर साफ-साफ लिखा है, 'यह पासपोर्ट इजरायल को छोड़कर दुनिया के सभी देशों के लिए मान्य है'। ट्रंप के बयान के बाद पाक के सामने बड़ी दुविधा वाली स्थिति हो गई है

अपडेटेड May 27, 2026 पर 11:36 AM
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ट्रंप ने पाकिस्तान को ऐसे चौराहे पर ला खड़ा किया है, जहां अमेरिकी बात मानने पर देश के भीतर बगावत का खतरा है और न मानने पर अमेरिका से दुश्मनी का

Trump Abraham Accord: ट्रंप ने ईरान युद्ध के बीच एक ऐसा कूटनीतिक दांव चला है, जिसने पाकिस्तान को आगे कुआं पीछे खाई वाली स्थिति में फंसा दिया है। ट्रंप ने पाकिस्तान के सामने एक ऐसा चक्रव्यूह तैयार किया है, जहां से उसके लिए निकलना नामुमकिन नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति लगातार दबाव बना रहे हैं कि पाकिस्तान 'अब्राहम अकॉर्ड' में शामिल होकर इजरायल को एक संप्रभु देश के रूप में आधिकारिक मान्यता दे।

ट्रंप का कहना है कि ईरान के साथ भविष्य में होने वाले किसी भी स्थायी शांति समझौते के लिए पाकिस्तान का इस कूटनीतिक गठबंधन में आना अनिवार्य है। इस एक चाल से ट्रंप ने पाकिस्तान को ऐसे चौराहे पर ला खड़ा किया है, जहां अमेरिकी बात मानने पर देश के भीतर बगावत का खतरा है और न मानने पर अमेरिका से दुश्मनी का।

ट्रंप ने की मुस्लिम देशों को घेरने की तैयारी


ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक लंबी पोस्ट लिखकर पाकिस्तान समेत अन्य मुस्लिम देशों को लेकर एक खाका पेश किया। ट्रंप ने लिखा, 'अब्राहम अकॉर्ड में मिडिल ईस्ट के सभी मुस्लिम देशों को शामिल होना ही होगा। वैसे इसमें शामिल देशों के लिए आर्थिक और सामाजिक रूप से एक बड़ा बूस्टर साबित हुआ है। युद्ध के इस दौर में भी किसी सदस्य देश ने इससे हटने का सुझाव नहीं दिया।'

ट्रंप ने साफ कहा कि अमेरिका एक 'बेहद जटिल कूटनीतिक पहेली' को सुलझाने में लगा है, जिसके तहत प्रमुख मुस्लिम बहुल देशों को हर हाल में इजरायल के साथ अपने रिश्ते सामान्य करने ही होंगे। पाकिस्तान ट्रंप के इसी भंवर में फंस गया है। एक तरफ वो अमेरिका से दोस्ती चाहता है दूसरी तरफ इजरायल को मान्यता देने के खिलाफ है।

इजरायल से हाथ मिलाया तो बदलना होगा देश का कानून!

अगर ट्रंप के भारी दबाव के आगे झुककर पाकिस्तान, इजरायल से हाथ मिलाने की सोचता भी है, तो वह एक ऐसे कानूनी पचड़े में फंस जाएगा जिससे निकलना उसके सरकारी तंत्र के लिए बड़ा सिरदर्द बन जाएगा।

पाकिस्तान के 78 साल के इतिहास में उसने कभी इजरायल को स्वीकार नहीं किया। इसी वजह से पाकिस्तान के हर पासपोर्ट पर साफ-साफ लिखा है, 'यह पासपोर्ट इजरायल को छोड़कर दुनिया के सभी देशों के लिए मान्य है'।

अगर पाकिस्तान अब्राहम अकॉर्ड साइन करता है, तो उसे अपनी संप्रभुता और पहचान से समझौता कर अपने पासपोर्ट के मूल स्वरूप को बदलना होगा। इसके अलावा वीजा सिस्टम, दूतावास और इमिग्रेशन नियमों को नए सिरे से तैयार करना होगा, जो पाकिस्तान के लिए घरेलू स्तर पर राजनीतिक आत्मघाती कदम साबित हो सकता है।

'जिन पर भरोसा नहीं, उनके साथ कैसे बैठें'

इस कूटनीतिक घेराबंदी से तिलमिलाए पाकिस्तान ने फिलहाल ट्रंप के सामने घुटने टेकने से इनकार करते हुए कड़ा रुख दिखाने की कोशिश की है। लेकिन इस बयानबाजी में भी उनकी बेबसी साफ झलक रही है।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक इंटरव्यू में ट्रंप के बयान पर कहा, 'मुझे नहीं लगता कि हमें किसी ऐसे समझौते में शामिल होना चाहिए जो हमारी बुनियादी विचारधाराओं के पूरी तरह खिलाफ हो। हम उन लोगों के साथ टेबल पर कैसे बैठ सकते हैं, जिनकी बात पर एक दिन के लिए भी भरोसा नहीं किया जा सकता?'

एक तरफ दिवालिया होने की कगार पर खड़ा पाकिस्तान अमेरिकी वित्तीय मदद और आईएमएफ के भरोसे जी रहा है, वहीं दूसरी तरफ ट्रंप ने इजरायल को मान्यता देने का नया पेंच फंसा दिया है। अब देखना यह होगा कि पाकिस्तान इस अंतरराष्ट्रीय चक्रव्यूह से कैसे बाहर निकलता है।

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