बीते तीन महीने से ईरान और अमेरिका के बीच जंग जारी है। इन तीन महीनों में अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर जमकर हमला बोला तो वहीं ईरान ने खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी एयरबेस को निशाना बनाया। वहीं अब दोनों देशों के बीच जारी जंग सीजफायर की ओर बढ़ती दिख रही है। ईरान-अमेरिका के बीच फाइनल डील लॉक होने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच लंबे वक्त से चल रहे विवाद को समाप्त करने वाली डील अब अंतिम फेज में है।
वहीं ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी 'मेहर' की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच प्रस्तावित समझौते में कई अहम मुद्दे शामिल हैं। इस समझौते के तहत ईरान पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने, अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी खत्म करने और ईरान के आसपास तैनात अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने पर सहमति बन सकती है। यह खबर ऐसे समय में सामने आई है जब दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय तनाव कम करने और रिश्तों में सुधार लाने के लिए बातचीत जारी है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और ईरान एक ऐसे प्रस्ताव पर भी चर्चा कर रहे हैं, जिसके तहत ईरान को कतर और अन्य देशों में रोके गए 16 अरब डॉलर से अधिक के फंड तक पहुंच मिल सकती है।
ईरान को मिल सकता है बड़ा फंड
यह धनराशि पहले कुछ सीमित जरूरतों और खरीदारी के लिए इस्तेमाल की जा सकती थी। हालांकि, साल 2023 में इज़राइल और हमास के बीच युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका ने बैंकों से इस रकम को जारी नहीं करने को कहा था। अब यदि अमेरिका इसकी मंजूरी देता है, तो ऐसे इंतजाम किए जा सकते हैं जिनकी मदद से ईरान इस पैसे का लाभ उठा सके। इससे ईरान को धन तक पहुंच तो मिलेगी, लेकिन वह सीधे अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन नहीं करेगा और न ही फ्रीज़ की गई संपत्तियों का सीधे उपयोग करेगा।
हालांकि, अगर ईरान को इन फंडों तक सीमित पहुंच मिलती है, तो इससे उसकी लंबे समय से चली आ रही आर्थिक राहत की मांग को कुछ हद तक पूरा किया जा सकता है। इससे दोनों देशों के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह कदम शुरुआती भरोसा बनाने का काम कर सकता है। इसके बाद दोनों पक्ष ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे अधिक संवेदनशील और विवादित मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं।
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने पिछले सप्ताह कांग्रेस को बताया कि होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा पूरी तरह खोलने के बदले अमेरिका अभी से ईरान पर लगे प्रतिबंधों में कोई राहत नहीं देगा।
उन्होंने कहा कि प्रतिबंधों में ढील देने जैसे मुद्दों पर बातचीत के अगले चरण में ही विचार किया जाएगा। इसके लिए जरूरी होगा कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर तय की जाने वाली शर्तों और सीमाओं को मानने के लिए तैयार हो जाए। अगर दोनों देशों के बीच ये डील फाइनल होती है, तो इससे दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने में मदद मिल सकती है और क्षेत्र में स्थिरता बढ़ने की उम्मीद है।