US-Iran Deal पर नया बवाल, ईरान के दावे और लीक रिपोर्ट्स को ट्रंप ने बताया झूठ

US-Iran Deal : ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा कि, अमेरिका-ईरान समझौते को लेकर सामने आई खबरें भ्रामक हैं। उन्होंने ईरान पर बातचीत के दौरान ईमानदारी नहीं बरतने का भी आरोप लगाया। ट्रंप ने अपने पोस्ट में लिखा, “ईरान की ओर से फेक न्यूज़ मीडिया को जो शर्तें बताई गई हैं, उनका उन शर्तों से कोई लेना-देना नहीं है जिन पर लिखित रूप से सहमति बनी थी

अपडेटेड Jun 12, 2026 पर 9:54 PM
ट्रंप ने कहा कि ईरान की तरफ से मीडिया में जो खबरें और दावे किए गए हैं, वे उस समझौते से मेल नहीं खाते

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को ईरान पर अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित समझौते से जुड़ी गलत जानकारी सार्वजनिक करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ईरानी मीडिया में जिन शर्तों का जिक्र किया गया है, उनका वास्तविक बातचीत या प्रस्तावित समझौते से कोई संबंध नहीं है। ट्रंप ने कहा कि ईरान की तरफ से मीडिया में जो खबरें और दावे किए गए हैं, वे उस समझौते से मेल नहीं खाते जिस पर दोनों देश तैयार हुए हैं।

ट्रंप का सख्त रिएक्शन

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा कि, अमेरिका-ईरान समझौते को लेकर सामने आई खबरें भ्रामक हैं। उन्होंने ईरान पर बातचीत के दौरान ईमानदारी नहीं बरतने का भी आरोप लगाया। ट्रंप ने अपने पोस्ट में लिखा, “ईरान की ओर से फेक न्यूज़ मीडिया को जो शर्तें बताई गई हैं, उनका उन शर्तों से कोई लेना-देना नहीं है जिन पर लिखित रूप से सहमति बनी थी।” उन्होंने यह भी संकेत दिया कि समझौते को लेकर फैल रही कई रिपोर्टें सही तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और लोगों को ऐसी खबरों से सावधान रहना चाहिए।


ट्रंप ने आगे कहा, “ईरान की ओर से जो बातें कही जा रही हैं, जिनमें समझौते को लेकर दिए गए उनके हालिया बयान भी शामिल हैं, उनका सच्चाई से कोई संबंध नहीं है। ऐसे लोगों के साथ बातचीत करना बेहद निराशाजनक है। उनके व्यवहार से नहीं लगता कि वे पूरी ईमानदारी और गंभीरता के साथ बातचीत कर रहे हैं।” ट्रंप का यह बयान उस समय आया है जब ईरान के सरकारी मीडिया संस्थानों ने अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत से जुड़े एक मसौदा समझौते (ड्राफ्ट मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) की कुछ कथित शर्तें प्रकाशित कीं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मसौदे में ईरान की अरबों डॉलर की जमी हुई संपत्तियों को जारी करने, कुछ प्रतिबंधों में राहत देने, होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह खोलने और भविष्य में परमाणु कार्यक्रम पर होने वाली बातचीत के लिए एक रूपरेखा तैयार करने जैसे प्रस्ताव शामिल थे। हालांकि, ट्रंप ने इन सभी रिपोर्टों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि मीडिया में सामने आई शर्तें अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वास्तविक बातचीत या संभावित समझौते की सही तस्वीर पेश नहीं करती हैं।

अमेरिका और ईरान की ओर से अलग-अलग दावे

अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत को लेकर अभी भी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है। दोनों देशों के बयानों में अंतर देखने को मिल रहा है, जिससे समझौते को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

यह बातचीत कई महीनों से दोनों देशों के बीच चल रहे तनाव और विवाद को खत्म करने के उद्देश्य से की जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार कह चुके हैं कि समझौता करीब है। उनका दावा है कि ईरान के नेताओं ने एक मसौदा समझौते को मंजूरी भी दे दी है।

वहीं, ईरान के अधिकारियों का कहना है कि अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान अपने कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर पीछे हटने को तैयार नहीं है। इनमें उसका यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) कार्यक्रम भी शामिल है, जिसे वह अपनी प्रमुख शर्तों में मानता है। हाल ही में ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि बातचीत के अधिकांश हिस्से का मसौदा तैयार हो चुका है, लेकिन अभी तक कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच बातचीत का दौर अभी भी जारी है।

डील पर अबतक नहीं बनी कोई बात!

अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हो रही है, लेकिन अभी तक किसी अंतिम समझौते की घोषणा नहीं हुई है। बातचीत का मुख्य फोकस ईरान पर लगे प्रतिबंधों में राहत, उसके परमाणु कार्यक्रम का भविष्य, विदेशों में जमे हुए ईरानी धन तक पहुंच और होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह खोलने जैसे मुद्दों पर है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है।

हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उम्मीद है कि जल्द समझौता हो सकता है, लेकिन दोनों देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर मतभेद अब भी बने हुए हैं। खास तौर पर यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट), आर्थिक प्रतिबंधों में ढील और खाड़ी क्षेत्र में समुद्री आवाजाही पर नियंत्रण जैसे विषयों पर दोनों पक्षों की राय अलग-अलग है। इन्हीं मतभेदों की वजह से बातचीत जारी है और समझौते को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

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