ईरान पर होने वाला है न्यूक्लियर अटैक! पूर्व अमेरिकी सांसद के ट्रंप की 'सीक्रेट मीटिंग' के दावे से सनसनी
Trump Planning Nuclear Attack on Iran: पूर्व अमेरिकी सांसद मार्जोरी टेलर ग्रीन ने दावा किया है कि ट्रंप प्रशासन के उच्च अधिकारी ईरान पर परमाणु हमले की गुप्त बैठकें कर रहे हैं। दावा ये भी है कि हिरोशिमा जैसी तबाही दोहराने की योजना बन रही है। आखिरी बार 6 और 9 अगस्त 1945 को जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराया गया था
आखिरी बार 6 और 9 अगस्त 1945 को जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराया गया था
US-Iran Nuclear War Allegation: रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व में जारी भारी तनातनी के बीच अमेरिका के राजनीतिक गलियारों से आई एक खबर ने पूरी दुनिया में सनसनी फैला दी है। पूर्व अमेरिकी कांग्रेसवुमन मार्जोरी टेलर ग्रीन ने दावा किया है कि ट्रंप प्रशासन के उच्च अधिकारी ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की रणनीति पर सीक्रेट बैठकें कर रहे हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर रविवार (16 अगस्त 2026) को किए गए इस दावे के बाद कूटनीतिक हलकों में खलबली मच गई है। आइए जानते हैं कि पूर्व महिला सांसद ने क्या-क्या आरोप लगाए हैं और इस पूरे विवाद की सच्चाई क्या है।
'यह कोई अटकलबाजी नहीं, सच में चल रही है मीटिंग'
पूर्व अमेरिकी सांसद मार्जोरी टेलर ग्रीन ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि व्हाइट हाउस में वरिष्ठ अधिकारी ईरान पर परमाणु हमला करने की रणनीति पर चर्चा कर रहे हैं।
ग्रीन ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'वे रणनीति बैठकों में ईरान पर परमाणु हथियारों का उपयोग करने पर चर्चा कर रहे हैं। हां, आपने बिल्कुल सही पढ़ा। यह सच है। मैं कोई अटकलबाजी नहीं लगा रही, मुझे पता है। और यह विशुद्ध पाप है।'
उन्होंने दुनिया को चेताते हुए याद दिलाया कि आखिरी बार 6 और 9 अगस्त 1945 को जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराया गया था। अगर ऐसा कदम उठाया गया, तो यह भीषण वैश्विक तबाही लेकर आएगा।
इंटेलिजेंस रिपोर्ट की अनदेखी और इजराइल का दबाव?
मार्जोरी टेलर ग्रीन ने ट्रंप प्रशासन पर अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट को नजरअंदाज करने का भी आरोप लगाया। उनके मुताबिक, अमेरिकी खुफिया आकलन से संकेत मिलता है कि ईरान तुरंत परमाणु हथियार बनाने की कगार पर नहीं है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन इस रिपोर्ट को खारिज कर रहा है।
ग्रीन का दावा है कि वाशिंगटन अपनी खुफिया एजेंसियों के बजाय इजराइल से मिलने वाली चेतावनियों के प्रभाव में आकर रणनीतिक फैसले ले रहा है। उन्होंने ट्रंप के चुनावी वादों का जिक्र करते हुए लिखा कि ट्रंप ने विदेशों में कोई नया युद्ध न शुरू करने का वादा किया था, लेकिन यह कदम दुनिया को एक बड़े वैश्विक युद्ध में झोंक सकता है।
दावों में कितनी सच्चाई? व्हाइट हाउस और डिफेंस का रुख
पूर्व सांसद के इन सनसनीखेज दावों के बाद कई अहम सवाल खड़े हो रहे हैं:
कोई सबूत नहीं: मार्जोरी टेलर ग्रीन ने अपने इस दावे के समर्थन में न तो कोई दस्तावेज पेश किए हैं और न ही उन अधिकारियों के नामों का खुलासा किया है जो इन बैठकों में शामिल हैं।
व्हाइट हाउस की चुप्पी: अमेरिकी प्रशासन या रक्षा विभाग की ओर से इन दावों पर तुरंत कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है।
नीति में बदलाव का प्रमाण नहीं: अमेरिकी सरकार या सैन्य अधिकारियों की ओर से ऐसा कोई सार्वजनिक संकेत नहीं मिला है कि वाशिंगटन ने अपनी परमाणु नीति बदली है या वह ईरान के खिलाफ परमाणु हमले की तैयारी कर रहा है।
अमेरिका और ईरान के बीच क्यों बढ़ा तनाव?
मार्जोरी टेलर ग्रीन का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वाशिंगटन और तेहरान के बीच सैन्य तनातनी चरम पर है। अमेरिका फारस की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे रणनीतिक समुद्री मार्गों पर दबाव बनाए हुए है, जिसका ईरान लगातार विरोध कर रहा है।
ईरानी सेना प्रमुख अमीर हतामी ने अमेरिकी सैनिकों को पकड़ने या मारने वाले के लिए इनाम की घोषणा की है, जिससे दोनों देशों की बयानबाजी और तीखी हो गई है। जून 2025 में ईरानी परमाणु ठिकानों पर हुए अमेरिकी हमलों के बाद से ही ग्रीन ट्रंप की विदेश नीति का विरोध करती रही हैं। वहीं, ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रही कूटनीतिक बातचीत बेनतीजा साबित हुई है।
वैसे मार्जोरी टेलर ग्रीन के इन दावों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और ये दावे असत्यापित हैं। हालांकि, एक पूर्व वरिष्ठ राजनेता द्वारा ऐसा बयान आना यह स्पष्ट संकेत देता है कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनातनी किस बेहद संवेदनशील और खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुकी है।