अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 23 मई को कहा कि ईरान के साथ बातचीत में कुछ प्रगति हुई है। भारत की यात्रा पर आए रुबियो ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की कोशिश कुछ आगे बढ़ी है। पूरी दुनिया की नजरें अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते पर लगी हैं।
रुबियो को एक या दो दिन में बड़े ऐलान होने की उम्मीद
भारत में पत्रकारों से बातचीत में रुबियो ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत पर्दे के पीछे चल रही है। उन्होंने कहा, "कुछ प्रगति हुई है, बात कुछ आगे बढ़ी है। मैं जब आपसे बात कर रहा हूं तब कुछ काम चल रहा है।" रायटर्स ने रुबियो को उद्धृत करते हुए यह जानकारी दी है। अमेरिकी विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि अगर बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है तो इस बारे में जल्द ऐलान हो सकता है। उन्होंने कहा कि इस बात की संभावना है कि आज, कल या दो दिन बाद हमारे पास कुछ कहने के लिए होगा।
ईरान ने अमेरिका को दो चरणों वाला प्रस्ताव सौंपा
इस बीच खबर है कि ईरान ने कुछ समय पहले अमेरिका दो चरणों वाला प्रस्ताव सौंपा है। ये प्रस्ताव काफी अहम है क्योंकि इसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में टोल वसूलने के प्रस्ताव को निलंबित रखा गया है। अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान के टोल वसूलने के खिलाफ है। उसने यह साफ किया है कि वह ईरान को टोल वसूलने की इजाजत नहीं देगा। भारत सहित दुनिया के कई बड़े देशों ने भी इसका विरोध किया है।
ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मजु में टोल की वसूली रोकने को तैयार
पहले चरण के प्रस्ताव में यह संकेत दिया गया है कि ईरान अमेरिका के साथ लड़ाई आधिकारिक रूप से खत्म करना चाहता है। उसने अमेरिकी नाकेबंदी हटाए जाने की मांग की है। उसका यह भी कहना है कि ईरान के जब्त किए गए फंड्स रिलीज किए जाए। इसके अलावा लड़ाई से हुए नुकसान की भरपाई की जाए। उसने कहा है कि अगर ये मांगें मान ली जाती हैं तो वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में टोल वसूलने का प्लान निलंबित कर सकता है।
ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाने का वादा करने को भी तैयार
ईरान ने दूसरे चरण के प्रस्ताव में परमाणु हथियारों को लेकर अपना रुख साफ किया है। उसने कहा है कि वह 10 सालों के लिए 3.6 फीसदी से ज्यादा यूरेनियम संवर्द्धन नहीं करेगा। उसने यह भी कहा है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाने का वादा करने को तैयार है। लेकिन, इसके एवज में उस पर लगे सभी प्रतिबंध पूरी तरह से हटने चाहिए। लेकिन, साथ में उसकी यह मांग भी है कि अमेरिका को यूरेनियम संवर्धन के ईरान के अधिकार को मान्यता देनी होगी।