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US-Iran War: हर व्यक्ति पर बढ़ेगा 3,000 डॉलर का बोझ...जानें 40 दिन की जंग में कौन चुका रहा है भारी कीमत

अमेरिका और इजरायल के सैन्य अभियान से हुआ कुल नुकसान लगभग 270 अरब डॉलर के आसपास है। वहीं, अलग-अलग रिपोर्ट्स और अर्थशास्त्रियों के अनुमान के मुताबिक यह नुकसान 150 अरब डॉलर से लेकर 300 अरब डॉलर के बीच हो सकता है। इसका सीधा असर आम लोगों पर भी पड़ेगा। अनुमान है कि हर व्यक्ति पर करीब 1,600 डॉलर से लेकर 3,000 डॉलर से ज्यादा का आर्थिक बोझ आ सकता है

Edited By: Rajat Kumarअपडेटेड Apr 16, 2026 पर 4:56 PM
US-Iran War: हर व्यक्ति पर बढ़ेगा 3,000 डॉलर का बोझ...जानें 40 दिन की जंग में कौन चुका रहा है भारी कीमत
US Iran War: ईरान के साथ हो रहे जंग में भले ही अमेरिका जीत के बड़े बड़े दावे कर रहा हो पर असलियत में इस युद्ध की उसे बी भारी कीमत चुकानी पड़ी है।

एक पुरानी कहावत है कि जंग में किसी की जीत नहीं होती...हर तरफ बस नुकसान होता है। ईरान के साथ हो रहे जंग में भले ही अमेरिका जीत के बड़े बड़े दावे कर रहा हो पर असलियत में इस युद्ध की उसे भारी कीमत चुकानी पड़ी है। वहीं ईरान को इस जंग ने समय से काफी पीछे ढकेल दिया है। ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान में हालिया संघर्ष के कारण सिर्फ 40 दिनों में करीब 270 अरब डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ है। व्यापार में लगातार रुकावट और ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी की वजह से यह नुकसान आगे और बढ़ सकता है।

सरकारी प्रवक्ता फातिमा मोहजेरानी ने बताया कि अमेरिका और इजरायल के सैन्य अभियान से हुआ कुल नुकसान लगभग 270 अरब डॉलर के आसपास है। वहीं, अलग-अलग रिपोर्ट्स और अर्थशास्त्रियों के अनुमान के मुताबिक यह नुकसान 150 अरब डॉलर से लेकर 300 अरब डॉलर के बीच हो सकता है। इसका सीधा असर आम लोगों पर भी पड़ेगा। अनुमान है कि हर व्यक्ति पर करीब 1,600 डॉलर से लेकर 3,000 डॉलर से ज्यादा का आर्थिक बोझ आ सकता है।

सुधार में लग सकते हैं कई साल

ईरान के केंद्रीय बैंक ने चेतावनी दी है कि देश की अर्थव्यवस्था को दोबारा मजबूत बनने में काफी लंबा समय लग सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अंदरूनी आकलन में कहा गया है कि हालात पूरी तरह संभलने में करीब 12 साल तक लग सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह नुकसान पहले से ही कमजोर अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका है। इसमें सड़कों, इमारतों जैसे बुनियादी ढांचे को नुकसान, उत्पादन का रुकना और व्यापार में आई रुकावटें शामिल हैं, जिससे हालात और मुश्किल हो गए हैं।

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