US-Iran War: अमेरिका-ईरान युद्ध फिर चरम पर, होर्मुज में हमलों के बाद अमेरिकी एयरस्ट्राइक, ईरान ने दी कड़ी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी

US-Iran War: अमेरिकी हमले के बाद ईरान में कई जगह विस्फोटों की खबर है। ईरान के बंदर अब्बास, केशम और सीरिक इलाके में जोरदार धमाके सुने गए। सीजफायर के बाद ईरान पर अमेरिका का अब तक का सबसे बड़ा हमला है। होर्मुज में ईरान द्वारा तीन जहाजों को निशाना बनाए जाने के जवाब में अमेरिका ने कार्रवाई की है

अपडेटेड Jul 08, 2026 पर 7:35 AM
US-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर से तनाव चरम पर पहुंच गया है

US-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तीन कमर्शियल जहाजों पर हुए हमलों के बाद अमेरिका ने बुधवार (8 जुलाई) सुबह ईरान के खिलाफ शक्तिशाली सैन्य हमले किए। ईरान में कई जगह विस्फोटों की खबर है। ईरान के बंदर अब्बास, केशम और सीरिक इलाके में जोरदार धमाके सुने गए। सीजफायर के बाद ईरान पर अमेरिका का अब तक का सबसे बड़ा हमला है।

होर्मुज में ईरान द्वारा तीन जहाजों को निशाना बनाए जाने के जवाब में अमेरिका ने कार्रवाई की है। हमले के बाद क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल शुरू हो गया है। अब नजर ईरान की जवाबी कार्रवाई पर है। खाड़ी देशों में फिर तनाव के हालात पैदा हो गए हैं।

अमेरिकी सेना का कहना है कि यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय समुद्री रूट्स पर हुए हमलों के जवाब में की गई है। वहीं, ईरान ने अमेरिका पर दोनों देशों के बीच हुए समझौते (MoU) का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। तेल प्रतिबंधों में दी गई राहत खत्म होने के तुरंत बाद ये टकराव बढ़ा है।


अमेरिका ने क्यों किया हमला?

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव बुधवार को उस समय और बढ़ गया, जब अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन कमर्शियल जहाजों पर हुए हमलों के बाद ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, यह हमला ईरान की ओर से अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग से गुजर रहे कमर्शियल जहाजों पर किए गए हमलों के जवाब में किया गया।

अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने ईरान के उन ठिकानों को निशाना बनाया, जिन्हें समुद्री हमलों से जुड़ा माना जा रहा है। हालांकि, अभी तक हमलों से हुए नुकसान या हताहतों के संबंध में आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

तेल प्रतिबंधों में राहत वापस लेने के बाद बढ़ा तनाव

अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब वॉशिंगटन ने ईरान को कच्चे तेल के उत्पादन, बिक्री और आपूर्ति के लिए दी गई अस्थायी प्रतिबंध राहत (Sanctions Waiver) वापस ले ली। यह राहत दोनों देशों के बीच जून में हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत दी गई थी और 21 अगस्त तक लागू रहने वाली थी। इस फैसले के तुरंत बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया।

ईरान में कई स्थानों पर विस्फोट

ईरान के सरकारी मीडिया के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास कई जगह विस्फोट हुए हैं। इनमें केश्म द्वीप (Qeshm Island), सीरिक (Sirik) और बंदर अब्बास (Bandar Abbas) बंदरगाह शहर शामिल हैं। हालांकि, इन विस्फोटों से हुए नुकसान की विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

ईरान ने अमेरिका को दी चेतावनी

अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान के विदेश मंत्रालय ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। मंत्रालय ने अमेरिका पर दोनों देशों के बीच हुए समझौते का बार-बार उल्लंघन करने का आरोप लगाया और कहा कि ईरान अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए निर्णायक कदम उठाएगा। विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका द्वारा समझौते का उल्लंघन गंभीर परिणाम लेकर आएगा और ईरान इसका उचित जवाब देगा।

ईरानी उप विदेश मंत्री गरीबाबादी ने एक बयान में कहा, "ईरान की तेल बिक्री पर लगे बैन से छूट को रद्द करने का अमेरिका का कदम आर्टिकल 10 का खुला उल्लंघन है। इसके बाद ईरान के खिलाफ इस देश (अमेरिका) के मिलिट्री ऑपरेशन भी इस्लामाबाद 'मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग' के आर्टिकल 1 और 2 का गंभीर उल्लंघन है।"

ईरानी नेता ने आगे कहा, "पिछले तीन हफ्तों में लेबनान में जायोनी शासन की कार्रवाइयों और ईरान के ख़िलाफ़ धमकी भरे बयानों की वजह से भी अमेरिका ने MoU के आर्टिकल 1 और 2 का बार-बार उल्लंघन किया है। ईरान, अमेरिका के समझौते को तोड़ने के नतीजों के बारे में गंभीर चेतावनी देते हुए, अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा की रक्षा के लिए पक्के कदम उठाएगा।"

वैश्विक बाजार पर पड़ सकता है असर

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल रूट्स में से एक है। वैश्विक स्तर पर बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति इसी रूट्स से होती है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ता सैन्य तनाव अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार, समुद्री व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर डाल सकता है। यदि हालात और बिगड़ते हैं, तो कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

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