US Iran War Ceasefire Update: अमेरिका और ईरान के बीच पिछले दो हफ्तों से ज्यादा समय से चल रहे भीषण संघर्ष को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जद्दोजहद जारी हैं। कतर, ओमान, मिस्र और पाकिस्तान जैसे क्षेत्रीय देश वाशिंगटन और तेहरान को बातचीत की मेज पर लाने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। यहां तक कि 10 दिनों के एक अस्थायी सीजफायर का प्रस्ताव भी तैयार है।
लेकिन इन सब के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फिलहाल युद्ध पर 'पॉज' बटन दबाने के मूड में नजर नहीं आ रहे हैं। Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन का मानना है कि अभी युद्ध उस मोड़ पर नहीं पहुंचा है जहां कूटनीति सैन्य दबाव से बेहतर डील दे सके। आइए समझते हैं कि अमेरिका सीजफायर के प्रस्ताव पर कदम पीछे क्यों खींच रहा है और इसके पीछे की असली वजह क्या है।
10 दिनों का सीजफायर प्रस्ताव क्या है और किसने तैयार किया?
क्षेत्रीय स्थिरता और शांति बनाए रखने के लिए मध्य पूर्व के 4 प्रमुख देश कतर, ओमान, मिस्र और पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। प्रस्ताव के ये है मुख्य बिंदु:
ईरान ने इस बात को स्वीकार किया है कि उसे सीजफायर का प्रस्ताव मिला है और वह इस पर विचार कर रहा है, हालांकि उसने अभी तक कोई औपचारिक जवाब नहीं दिया है।
सीजफायर के प्रस्ताव को क्यों टाल रहे हैं डोनाल्ड ट्रंप?
डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इस प्रस्ताव पर तुरंत मुहर न लगाने के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े रणनीतिक कारण हैं:
A. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और बार्गेनिंग पावर: अमेरिकी हमलों के बावजूद ईरान ने अभी तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को जहाजों की आवाजाही के लिए नहीं खोला है। यह वही समुद्री मार्ग है जहां से दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल गुजरता है। वाशिंगटन का मानना है कि ईरान पर सैन्य दबाव जारी रखने से अमेरिका को बातचीत की मेज पर ज्यादा बढ़त मिलेगी।
B. अमेरिकी सैनिकों की मौत का बदला: हाल ही में जोर्डन में हुए एक ईरानी मिसाइल हमले में 2 अमेरिकी सैनिक शहीद हो गए थे। इस घटना ने वाशिंगटन के रुख को और सख्त कर दिया है। अब अमेरिका का ध्यान युद्ध रोकने से हटकर जवाबी कार्रवाई पर केंद्रित हो गया है। अमेरिका किसी भी स्थिति में खुद को कमजोर दिखाकर बातचीत में शामिल नहीं होना चाहता।
ये 4 देश ही क्यों कर रहे हैं मध्यस्थता?
इन चारों देशों के अमेरिका और ईरान दोनों के साथ गहरे कूटनीतिक और रणनीतिक संबंध हैं:
ओमान: ओमान लंबे समय से अमेरिका और ईरान के बीच एक गुप्त बैकचैनल के रूप में काम करता आया है।
कतर: कतर में मध्य पूर्व का सबसे बड़ा अमेरिकी सैन्य अड्डा है, और साथ ही ईरान के साथ भी इसके कामकाजी संबंध हैं।
मिस्र: मिस्र अरब जगत का एक प्रमुख देश है, जो क्षेत्रीय युद्ध को फैलने से रोकने के लिए लगातार सक्रिय रहता है।
पाकिस्तान: पाकिस्तान की सीमाएं ईरान से लगती हैं और खाड़ी देशों व अमेरिका दोनों के साथ उसके करीबी संबंध हैं। वह इस डर से मध्यस्थता में जुटा है ताकि युद्ध से उसका अपना क्षेत्र अस्थिर न हो।
इस युद्ध से दांव पर क्या लगा है?
यह सीजफायर सिर्फ लड़ाई रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर ग्लोबल इकोनॉमी पर भी पड़ रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हुई है और कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। अगर यह समुद्री मार्ग जल्द नहीं खुलता है, तो भारत जैसे प्रमुख ऊर्जा आयातक देशों के लिए क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ना और आर्थिक दबाव महसूस होना तय है।