पहले निक्सन और अब ट्रंप...54 साल बाद अमेरिका का क्यों जागा पाकिस्तान प्रेम? भारत सतर्क!

Similarities Between Trump and Nixon: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पूर्व विवादास्पद अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन में कई अजीबोगरीब समानताएं पाई गई हैं। दोनों ही नेता रिपब्लिकन पार्टी से थे। उनके राष्ट्रपति कार्यकाल घोटालों से भरे रहे। निक्सन ने वाटरगेट कांड में महाभियोग से बचने के लिए इस्तीफा दे दिया था। जबकि ट्रंप पर दो बार महाभियोग चलाया गया। हालांकि, उन्हें सीनेट से राहत मिल गई

अपडेटेड Jul 31, 2025 पर 10:33 PM
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Similarities Between Trump and Nixon: निक्सन और ट्रंप दोनों ही चीन से निपटने में कमजोर दिखे, जबकि पाकिस्तान को लाड़-प्यार दिया

US-Pakistan Trade Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों और कुछ कदमों, जैसे पाकिस्तान के सेना प्रमुख से दोस्ती, भारत पर टैरिफ लगाना और रूस के साथ नई दिल्ली के गहरे संबंधों पर नाराजगी व्यक्त करने से भारतीय कूटनीतिक हलकों में बेचैनी भरी यादें ताजा कर दी हैं। कई लोगों के लिए ये कदम एक और रिपब्लिकन राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन की याद दिला रही है। ट्रंप और पूर्व विवादास्पद राष्ट्रपति निक्सन में कई अजीबोगरीब समानताएं पाई गई हैं। दोनों ही नेता रिपब्लिकन पार्टी से थे। उनके राष्ट्रपति कार्यकाल घोटालों से भरे रहे।

निक्सन ने वाटरगेट कांड में महाभियोग से बचने के लिए इस्तीफा दे दिया था। जबकि ट्रंप पर दो बार महाभियोग चलाया जा चुका है। हालांकि, उन्हें सीनेट से राहत मिल गई। एक और समानता यह भी है कि दोनों ही चीन से निपटने में कमजोर दिखे। जबकि पाकिस्तान को लाड़-प्यार दिया।

ट्रंप लगातार कह रहे हैं कि उनकी मध्यस्थता के बाद भारत-पाकिस्तान में सीजफायर हुआ। जबकि, भारत सरकार ने ट्रंप के दावों को कई खारिज कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के साथ एक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने की घोषणा की है। साथ ही कहा है कि अमेरिका विशाल तेल भंडार विकसित करने के लिए पाकिस्तान के साथ काम करेगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर यह भी सवाल उठाया कि क्या पाकिस्तान कभी भारत को तेल बेच सकता है। ट्रंप ने बुधवार को 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में कहा, "हमने अभी-अभी पाकिस्तान के साथ एक समझौता किया है। इसके तहत अमेरिका पाकिस्तान के विशाल तेल भंडार को विकसित करने के लिए मिलकर काम करेगा" उन्होंने कहा, "हम उस तेल कंपनी को चुनने की प्रक्रिया शुरू कर चुके हैं जो इस साझेदारी का नेतृत्व करेगी। कौन जानता है, शायद वे किसी दिन भारत को तेल बेचेंगे!"

निक्सन की क्यों आई याद?


ट्रंप से पहले निक्सन ने भी खुलकर पाकिस्तान का समर्थन किया था। उस समय की वर्तमान भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से उनका रिश्ता काफी तनावपूर्ण रहाडोनाल्ड ट्रंप और साल 1969 से 1974 तक अमेरिका के राष्ट्रपति रहे निक्सन में कई अनोखी समानताएं हैं। वाटरगेट मामले को छुपाने के लिए निक्सन  का इस्तीफा अमेरिकी राजनीतिक इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक हैइसके अलावा उन पर विनाशकारी विदेश नीतिगत फैसले लेने का भी आरोप हैखासकर 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान उनका पाक प्रेम शर्मनाक था

उस वक्त पाकिस्तानी सेना पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में बड़े पैमाने पर अत्याचार कर रही थीफरवरी 1972 में, निक्सन की नाटकीय चीन यात्रा कोल्ड वार डिप्लोमेसी में एक निर्णायक क्षण बन गई। ऐसे कई मौके हैं जहां दोनों ही राष्ट्रपति चीन के साथ व्यवहार में लुंजपुंज और पाकिस्तान पर मेहरबान रहेभारत के लिए दोनों का कार्यकाल के लगभग सयम तक रवैया रुखा रहा

निक्सन की चीन यात्रा ने वैश्विक तौर पर सुर्खियाँ बटोरीं। वहीं, 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान पाकिस्तान के साथ उनके गुप्त गठबंधन ने उनकी विदेश नीति के भयावह पहलू को भी उजागर किया। दक्षिण एशिया पर अमेरिका द्वारा लगाए गए हथियार प्रतिबंध के बावजूद निक्सन ने जॉर्डन और ईरान जैसे तीसरे पक्ष के देशों के माध्यम से पाकिस्तान को हथियार आपूर्ति करने के लिए सक्रिय रूप से काम किया।

ट्रंप की नीति में अतीत का झलक

डोनाल्ड ट्रंप का भारत के प्रति शत्रुतापूर्ण रुख और पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व के प्रति गर्मजोशी दिखाना अजीब तरह से निक्सन की याद दिला रही है। निक्सन की तरह पाकिस्तान के प्रति ट्रंप का झुकाव एक गलतफहमी साबित हो सकता है। खासकर ऐसे समय में जब भारत चीनी विस्तारवाद और इस्लामी चरमपंथ के ख़िलाफ़ एक रणनीतिक ढाल बनकर उभरा है। ऐसा लगता है कि इतिहास खुद को दोहरा रहा है।

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हाल ही में बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने दावा किया कि 3 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान द्वारा भारत के पश्चिमी मोर्चों पर हमले किए जाने के बाद पूर्व पीएम इंदिरा गांधी ने निक्सन को चिट्ठी लिखी थी। ठाकुर ने सदन में उस चिट्ठी के कुछ हिस्से को दिखाते हुए दावा किया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति से पाकिस्तान पर अपने प्रभाव का प्रयोग करने और भारत के खिलाफ उसकी आक्रामक गतिविधियों को रोकने का आग्रह किया था।

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