अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों को लेकर वहां की जनता ही सड़क पर उतर आई है। इसकी चर्चा पूरी दुनिया में तेज हो गई है। राष्ट्रपति ट्रंप के सरकारी आवास व्हाइट हाउस को हजारों लोगों ने घेराव किया। अमेरिका की जनता ट्रंप की नीतियों के खिलाफ धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। इसमें टैरिफ वॉर और सरकारी नौकरी समेत कई मुद्दे शामिल हैं। ये प्रदर्शन देश के सभी 50 राज्यों में हो रहा है। इससे पहले अमेरिका के लोगों ने ट्रंप के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था। विरोध प्रदर्शन का यह दूसरा दौर है, जब अमेरिकी लोग फिर से सड़क पर उतर आए हैं।
लोगों ने ट्रंप पर नागरिक और कानून के शासन को कुचलने का आरोप लगाया। इस आंदोलन को 50501 नाम दिया गया है। जिसका मतलब '50 विरोध प्रदर्शन, 50 राज्य, 1 आंदोलन' है। प्रदर्शनकारियों ने व्हाइट हाउस के अलावा टेस्ला के शोरूमों का भी घेराव किया।
ट्रंप के खिलाफ लगाए शर्म करो के नारे
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ नाराजगी के बीच वाशिंगटन में बड़ी संख्या में लोग व्हाइट हाउस के बाहर इकट्ठा हुए। साथ ही ट्रंप के खिलाफ 'शर्म करो' जैसे नारे भी लगाए गए। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति पर नागरिक स्वतंत्रता और कानून के शासन को कमजोर करने के आरोप लगाए हैं। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि हमारा मकसद ट्रंप प्रशासन के तहत बढ़ते सत्तावादी रवैये से लोकतंत्र को बचाना है। उन्होंने इसे अहिंसक आंदोलन बताया है। इस विरोध प्रदर्शन में कई राजनीतिक दलों के भी शामिल होने की बात कही जा रही है। इतना ही नहीं प्रदर्शनकारियों ने अल साल्वाडोर से निर्वासित होने वाले किल्मर आर्मंडो अब्रेगो गार्सिया की वापसी की भी मांग की है। इसके साथ ही वाशिंगटन में मौजूद आरोन बर्क ने चिंता जताई कि सरकार बिना किसी प्रक्रिया के लोगों को निर्वासित कर रही है और यह सिलसिला कहीं नहीं रुकेगा।
ट्रंप के कामकाज से 45 फीसदी लोग खुश
अमेरिकी सर्वे एजेंसी गैलप के मुताबिक 45 फीसदी अमेरिकी मतदाता ट्रंप के 3 महीने के कामकाज से खुश हैं। वहीं इससे पहले के ट्रंप के कार्यकाल में 41 फीसदी मतदाता खुश थे। हालांकि यह बाकी राष्ट्रपति के मुकाबले बेहद कम है। साल 1952 से 2020 के बीच सभी राष्ट्रपति की पहली तिमाही की औसत रेटिंग 60 फीसदी है। इसकी तुलना में ट्रंप की रेटिंग कम दिख रही है। एजेंसी के मुताबिक ट्रंप के पदभार संभालने के वक्त उनकी रेटिंग 47 फीसदी थी। इसमें भी गिरावट आई है।