US Sanctions: अमेरिका ने 4 भारतीय कंपनियों के साथ 3 नागरिकों को किया ब्लैकलिस्ट! ईरान से तेल डील पड़ी भारी

US Sanctions 4 Indian Firms: ईरान से तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पाद खरीदने पर अमेरिका ने भारत की 4 दिग्गज कंपनियों और 3 नागरिकों पर कड़ा बैन लगा दिया है। 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' के तहत ट्रंप प्रशासन की इस बड़ी स्ट्राइक में ₹1,000 करोड़ से ज्यादा के ट्रेड सौदे जांच के दायरे में आ गए हैं

अपडेटेड Aug 26, 2026 पर 11:13 AM
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इन कंपनियों ने ईरान से पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के बड़े सौदों में मुख्य भूमिका निभाई है

US Sanctions Indian Firms: अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक शिकंजा कसने के लिए अपने नए वैश्विक अभियान 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' के तहत बड़ा कदम उठाया है। न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी विदेश विभाग ने ईरान से पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के व्यापार में कथित संलिप्तता के आरोप में 4 भारतीय कंपनियों और 3 भारतीय नागरिकों पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं।

यह कार्रवाई अमेरिका द्वारा दुनिया भर में ईरान के सैन्य नेटवर्क, वित्तीय लेनदेन और तेल व्यापार से जुड़ी करीब 60 संस्थाओं, व्यक्तियों और जहाजों पर की गई व्यापक कार्रवाई का हिस्सा है।

किन 4 भारतीय कंपनियों पर लगा प्रतिबंध?


अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, इन कंपनियों ने ईरान से पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के बड़े सौदों में मुख्य भूमिका निभाई है:

Portease Partners LLP: यह एक कस्टम ब्रोकर फर्म है, जिस पर ईरान से भारत में पेट्रोकेमिकल उत्पादों की कई खेपों की आवाजाही को सुगम बनाने का आरोप है।

Sadashiva Overseas Ltd: अमेरिकी रिपोर्ट के मुताबिक, इस कंपनी ने फरवरी 2024 से जून 2025 के बीच लगभग $6.9 करोड़ (करीब ₹575 करोड़) मूल्य के ईरानी मूल के पेट्रोलियम उत्पादों का आयात किया।

PP Softtech Pvt Ltd: इस फर्म पर जनवरी 2024 से जून 2025 के दौरान लगभग $2.5 करोड़ (करीब ₹208 करोड़) के ईरानी तेल उत्पादों के आयात का आरोप है।

Prakrutees Infra Impex India Pvt Ltd: इस कंपनी ने मई 2023 से फरवरी 2026 के बीच करीब $2.5 करोड़ (करीब ₹208 करोड़) मूल्य के ईरानी पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद की।

प्रतिबंधित 3 भारतीय नागरिक कौन हैं?

अमेरिकी विदेश विभाग ने इन कंपनियों से जुड़े तीन प्रमुख अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से ब्लैकलिस्ट किया है:

  1. इद्रिसमिया अशरफमिया शेख (Indrismiya Ashrafmiya Shekh)– पोर्टीज पार्टनर
  2. हरीश रामचंद्र रंगी (Harish Ramchandra Rangi)– पोर्टीज पार्टनर
  3. प्रशांत गर्ग (Prashant Garg)– पीपी सॉफ्टटेक

अमेरिका ने इन सभी पर कार्यकारी आदेश 13846 के तहत कार्रवाई की है, जो जानबूझकर ईरानी तेल और पेट्रोकेमिकल से जुड़े बड़े वित्तीय लेनदेन करने वाली विदेशी संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार देता है।

क्या है 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट'?

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोमवार को इस नए और आक्रामक अभियान की घोषणा की। 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' का लक्ष्य ईरान के वित्तीय नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक संपर्कों को पूरी तरह से काटना है।

अमेरिका का कहना है कि इन प्रतिबंधों का मकसद ईरान सरकार के उन राजस्व स्रोतों को बंद करना है, जिनका इस्तेमाल वह अपने पड़ोसी देशों पर हमलों, सैन्य गतिविधियों और क्षेत्रीय तनाव को बढ़ावा देने में करता है।

वाशिंगटन ने दुनिया भर की सरकारों और निजी कंपनियों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे प्रतिबंधित ईरानी संस्थाओं के साथ किसी भी तरह के कारोबार से दूर रहें, अन्यथा उन्हें अमेरिका के द्वितीयक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।

अमेरिका द्वारा भारतीय फर्मों पर लगाए गए इन प्रतिबंधों का सीधा असर उनके अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग, डॉलर लेनदेन और विदेशी व्यापार पर पड़ेगा। वाशिंगटन द्वारा वैश्विक स्तर पर ईरान के व्यापारिक साझेदारों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने से भारत समेत कई देशों की आयात-निर्यात बेस्ड कंपनियों के लिए कंप्लायंस जोखिम बढ़ गया है।

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