अब ईरान पर हमला नहीं कर पाएंगे ट्रंप! अमेरिकी सीनेट ने दिया बड़ा झटका, इस प्रस्ताव के बाद क्या पंगु हो गए राष्ट्रपति?

US Senate Iran Conflict Resolution: सीनेट में यह प्रस्ताव 50-48 के मामूली अंतर से पास हुआ। इस प्रस्ताव के आने के बाद अब ईरान पर हमला करना मुश्किल हो गया है। यह प्रस्ताव ट्रंप को निर्देश देता है कि जब तक अमेरिकी संसद सैन्य कार्रवाई की स्पष्ट अनुमति नहीं देती, तब तक वे ईरान के साथ चल रहे इस युद्ध से अमेरिकी सेना को दूर रखें

अपडेटेड Jun 24, 2026 पर 9:14 AM
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अमेरिकी संसद के दोनों सदन अब इस युद्ध के खिलाफ खड़े हैं

US Iran Conflict: मिडिल ईस्ट में कुछ दिनों से थोड़ी शांति है। हालांकि, सीजफायर समझौते के बाद कई ऐसे मौके हुए जब ऐसा लगा है कि कभी भी युद्ध भड़क सकता है। अब इस पर एक बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन यानी सीनेट ने एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पास किया है, जिसमें राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के ईरान के साथ युद्ध करने के अधिकार को चुनौती दी गई है। यह प्रस्ताव व्हाइट हाउस के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

सीनेट में यह प्रस्ताव 50-48 के मामूली अंतर से पास हुआ। इस प्रस्ताव के आने के बाद अब ईरान पर हमला करना मुश्किल हो गया है। यह प्रस्ताव ट्रंप को निर्देश देता है कि जब तक अमेरिकी संसद सैन्य कार्रवाई की स्पष्ट अनुमति नहीं देती, तब तक वे ईरान के साथ चल रहे इस युद्ध से अमेरिकी सेना को दूर रखें।

क्या है इस प्रस्ताव का मतलब?


चूंकि यह एक 'कनकरेंट रेजोल्यूशन' है, इसलिए इसे राष्ट्रपति ट्रंप के पास हस्ताक्षर या वीटो के लिए नहीं भेजा जाएगा। कानूनी रूप से इसकी बाध्यता को लेकर भले ही विवाद हो, लेकिन इस वोटिंग ने यह साफ कर दिया है कि अमेरिकी संसद के दोनों सदन अब इस युद्ध के खिलाफ खड़े हैं।

फरवरी 2026 के अंत में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद यह युद्ध शुरू हुआ था, जिसने वैश्विक ऊर्जा बाजारों को हिलाकर रख दिया था। यह अमेरिकी इतिहास में साल 1973 के 'वॉर पावर्स रेजोल्यूशन' के बाद पहला मौका है जब संसद के दोनों सदनों ने राष्ट्रपति को सैन्य कार्रवाई रोकने का निर्देश देने वाला ऐसा प्रस्ताव पारित किया है।

शांति समझौते के बीच क्यों बढ़ी ट्रंप की टेंशन?

यह वोटिंग ऐसे समय में हुई है जब ट्रम्प प्रशासन ईरान के साथ हुए शुरुआती शांति समझौते (MoU) को 60 दिनों के भीतर एक अंतिम समझौते में बदलने के लिए कूटनीतिक प्रयास कर रहा है। इस समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में ढील और होर्मुज जलडमरूमध्य का विवाद शामिल है।

सीनेट में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता चक शूमर ने इस वोटिंग के जरिए रिपब्लिकन सांसदों को भी घेर लिया। उन्होंने कहा, 'रिपब्लिकन बंद दरवाजों के पीछे ट्रंप के युद्ध, उनकी गोपनीयता और ईरान के साथ उनके खराब सौदे की जितनी चाहें उतनी शिकायत कर सकते हैं, लेकिन इस युद्ध को हमेशा के लिए खत्म करने का एकमात्र तरीका यह है कि रिपब्लिकन खुलकर सामने आएं और कार्रवाई करें।'

नवंबर चुनाव और महंगाई का डर

अमेरिकी सांसदों के बीच इस युद्ध को लेकर बढ़ती बेचैनी की एक बड़ी वजह आगामी नवंबर में होने वाले मिडिल-टर्म इलेक्शन हैं। युद्ध के कारण वैश्विक व्यापारिक मार्ग ठप हो गए हैं, जिससे ऊर्जा और तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। इससे अमेरिकी जनता महंगाई से बेहाल है और चुनाव से ठीक पहले यह ट्रम्प सरकार के लिए बड़ी राजनीतिक मुसीबत बन चुका है।

शांति वार्ता के बीच ईरान ने फिर दिखाए कड़े तेवर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के बीच शुरुआती बातचीत के बाद भी कई बड़े विवाद सुलझने का नाम नहीं ले रहे हैं:

परमाणु ठिकानों की जांच से इनकार: ईरान ने साफ कर दिया है कि संयुक्त राष्ट्र (UN) की परमाणु एजेंसी को उन ठिकानों का निरीक्षण करने की अनुमति नहीं दी जाएगी, जिन पर पिछले साल अमेरिका और इजरायल ने बमबारी की थी। हालांकि, ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया है कि ईरान 'सर्वोच्च स्तर' की जांच के लिए मान गया है।

होर्मुज जलमार्ग पर पाबंदी: ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बगेर गालिबाफ ने दोटूक कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य अब कभी भी युद्ध से पहले वाले 'फ्री पैसेज' के दिनों में नहीं लौटेगा। यानी इस अहम समुद्री तेल मार्ग पर पाबंदियां बनी रहेंगी।

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