ट्रंप की इमिग्रेशन पॉलिसी को झटका, बर्थराइट सिटिजनशिप पर आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने किया रद्द

डोनाल्ड ट्रंप की इमिग्रेशन नीति को बड़ा झटका देते हुए अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से निचली अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें ट्रंप के इस कार्यकारी आदेश पर रोक लगा दी गई थी

अपडेटेड Jun 30, 2026 पर 10:00 PM
अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बड़ा झटका दिया है।

अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बड़ा झटका दिया है। US सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को यूनाइटेड स्टेट्स में बर्थराइट सिटिजनशिप पर रोक लगाने की वाली उनकी कोशिश को खारिज कर दिया। अदालत का यह फैसला अमेरिका की इमिग्रेशन नीति और संविधान के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन के अनुसार, अमेरिका में जन्म लेने वाले लगभग सभी बच्चों को नागरिकता मिलने का अधिकार है। अदालत ने इस पुराने संवैधानिक प्रावधान को फिर से सही माना।

इस साल दूसरी बार हुआ है जब कोर्ट ने ट्रंप की किसी बड़ी पहल को अमान्य कर दिया है, इससे पहले फरवरी में उनके बड़े ग्लोबल टैरिफ को खत्म करने का फैसला लिया गया था।

ट्रंप की इमिग्रेशन पॉलिसी को झटका


दरअसल, जनवरी 2025 में राष्ट्रपति पद संभालने के पहले दिन डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। इस आदेश का उद्देश्य उन बच्चों को जन्म के साथ मिलने वाली अमेरिकी नागरिकता से वंचित करना था, जिनके माता-पिता अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे हों या अस्थायी वीजा पर हों। इस आदेश के तहत केवल उन्हीं बच्चों को जन्म के आधार पर अमेरिकी नागरिकता देने का प्रस्ताव था, जिनके कम से कम एक माता-पिता अमेरिकी नागरिक हों या कानूनी रूप से स्थायी निवासी (ग्रीन कार्ड धारक) हों। हालांकि, अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह आदेश लागू नहीं हो सकेगा।

बर्थराइट सिटिजनशिप  पर आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने किया रद्द

डोनाल्ड ट्रंप की इमिग्रेशन नीति को बड़ा झटका देते हुए अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से निचली अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें ट्रंप के इस कार्यकारी आदेश पर रोक लगा दी गई थी। डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से कहते रहे हैं कि जन्म के आधार पर अपने-आप मिलने वाली अमेरिकी नागरिकता की मौजूदा व्यवस्था का कुछ लोग गलत फायदा उठाते हैं, जिससे देश की इमिग्रेशन व्यवस्था प्रभावित होती है। वहीं, ट्रंप के विरोधियों का आरोप है कि उनकी सरकार की कई इमिग्रेशन नीतियां भेदभावपूर्ण रही हैं और उनका असर खास समुदायों के लोगों पर अधिक पड़ता है।

यह मामला अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन में मौजूद नागरिकता संबंधी प्रावधान से जुड़ा है। इस प्रावधान में कहा गया है कि अमेरिका में जन्म लेने वाले या कानूनी रूप से अमेरिकी नागरिक बनने वाले सभी लोग, जो देश के कानून के दायरे में आते हैं, अमेरिका के नागरिक माने जाएंगे। पिछले 150 से ज्यादा वर्षों से इस नियम का यही मतलब माना जाता रहा है कि अमेरिका में जन्म लेने वाले लगभग सभी बच्चों को जन्म के साथ ही अमेरिकी नागरिकता मिल जाती है, चाहे उनके माता-पिता का इमिग्रेशन स्टेटस कुछ भी हो।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अमेरिका के सॉलिसिटर जनरल डी. जॉन सॉयर ने ट्रंप प्रशासन की ओर से पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी संविधान के नागरिकता संबंधी प्रावधान का मुख्य उद्देश्य पहले गुलाम रहे लोगों और उनकी आने वाली पीढ़ियों को अमेरिकी नागरिकता का अधिकार देना था। सॉयर ने यह भी कहा कि "बर्थ टूरिज्म" यानी सिर्फ बच्चे को अमेरिकी नागरिकता दिलाने के लिए दूसरे देशों के लोगों का अमेरिका जाकर बच्चे को जन्म देने का चलन बढ़ रहा है। उनका दावा था कि कई विदेशी नागरिक इसी मकसद से अमेरिका आते हैं। हालांकि, जब सुप्रीम कोर्ट के जजों ने उनसे इस दावे के समर्थन में आंकड़े मांगे, तो उन्होंने स्वीकार किया कि इस तरह के मामलों की संख्या बताने वाला कोई ठोस या आधिकारिक डेटा उनके पास नहीं है।

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