ईरान के साथ जारी युद्ध के बीच अमेरिका में पानी की सप्लाई और उससे जुड़े सिस्टम पर साइबर हमलों का मामला सामने आया है। मिनेसोटा ने बताया कि राज्य के कम से कम 30 स्थानीय जल आपूर्ति सिस्टम को एक साथ साइबर हमले का निशाना बनाया गया। जुलाई के आखिर में इस घटना की जानकारी सामने आने के बाद अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई ने भी चेतावनी जारी की। एजेंसी के मुताबिक, खतरनाक साइबर हमलावरों ने अमेरिका के कम से कम सात राज्यों में पानी और गंदे पानी से जुड़े सिस्टम में सेंध लगाने की कोशिश की है।
इन साइबर हमलों से कुछ जगहों पर रोजमर्रा के कामकाज में परेशानी आई। साथ ही, इन घटनाओं ने पानी जैसी जरूरी सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े सिस्टम की सुरक्षा में मौजूद कमजोरियों को भी सामने ला दिया। मामला सामने आने के बाद जॉर्जिया, न्यू जर्सी और साउथ डकोटा ने भी अपने यहां इसी तरह के साइबर हमलों की जानकारी दी है। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि इन राज्यों में हुए हमले एफबीआई की ओर से बताए गए सात राज्यों वाले हमलों से जुड़े हैं या नहीं।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पूरे अमेरिका में करीब 1 लाख 52 हजार सार्वजनिक पेयजल सिस्टम और 16 हजार से ज्यादा गंदे पानी को साफ करने वाले प्लांट हैं। ज्यादातर शहरों और स्थानीय इलाकों में पानी झीलों, नदियों या जमीन के नीचे मौजूद जल स्रोतों से लिया जाता है। पानी को इलेक्ट्रिक पंप की मदद से पाइपलाइन के जरिए ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाया जाता है। यहां पानी में मौजूद गंदगी और दूसरी अशुद्धियों को हटाया जाता है और उसे कीटाणुओं से मुक्त किया जाता है। साफ होने के बाद पानी को बड़े टैंकों में जमा किया जाता है। इसके बाद पाइपलाइन के जरिए इसे घरों, दुकानों, कारोबार और सार्वजनिक जगहों तक पहुंचाया जाता है।
हैकर पानी के सिस्टम को कैसे निशाना बना रहे हैं?
साइबर अपराधी पानी की व्यवस्था में इस्तेमाल होने वाले प्रोग्रामेबल लॉजिक कंट्रोलर (पीएलसी) को निशाना बना रहे हैं। ये ऐसे उपकरण होते हैं जो पानी से जुड़े कई जरूरी औद्योगिक कामों को नियंत्रित और मॉनिटर करते हैं। सीएनएन के मुताबिक, ये कंट्रोलर पानी का दबाव और उसमें मिलाए जाने वाले केमिकल की मात्रा जैसी चीजों को नियंत्रित करते हैं। इसलिए इनकी सुरक्षा पानी की सप्लाई और उसकी गुणवत्ता के लिए बेहद जरूरी होती है।
अमेरिकन यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल सर्विस स्कूल में ग्लोबल सिक्योरिटी के सहायक प्रोफेसर विलियम अकोटो के मुताबिक, हमलावर इंटरनेट से जुड़े इन कंट्रोलरों और बाहरी कंपनियों के नेटवर्क को खोजते हैं। इसके बाद वे ऐसे सिस्टम तलाशते हैं, जिनमें दूर से पहुंच बनाई जा सके। हमलावर कई बार पहले से मौजूद डिफॉल्ट या चोरी किए गए पासवर्ड का इस्तेमाल करके सिस्टम में प्रवेश करने की कोशिश करते हैं। सिस्टम तक पहुंच मिलने के बाद वे पासवर्ड बदल सकते हैं या कुछ कमांड देकर उसके कामकाज में बदलाव करने की कोशिश कर सकते हैं। इस तरह साइबर हमलावर पानी की सप्लाई से जुड़े महत्वपूर्ण सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं।