Ali Larijani: अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव चरम पर है। युद्ध की आहट के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने देश के अस्तित्व को बचाने के लिए एक अनुभवी चेहरे पर दांव लगाया है। वे चेहरा हैं अली लारीजानी (Ali Larijani)। रिपोर्ट्स के अनुसार, अगर युद्ध के दौरान खामेनेई की हत्या होती है या वे नेतृत्व करने की स्थिति में नहीं रहते, तो लारीजानी ही वह व्यक्ति होंगे जो ईरान की कमान संभालेंगे। 67 वर्षीय लारीजानी फिलहाल 'सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल' के सचिव हैं और उन्हें ईरान के सत्ता ढांचे का सबसे भरोसेमंद स्तंभ माना जाता है।
अली लारीजानी कोई नए नाम नहीं हैं, बल्कि वे दशकों से ईरान की राजनीति और सुरक्षा के केंद्र में रहे हैं। वे 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) के संस्थापक सदस्य रहे हैं, सरकारी रेडियो-टीवी के प्रमुख रहे हैं और 2008 से 2020 तक संसद के अध्यक्ष रह चुके हैं। 2021 में चीन के साथ 25 साल के रणनीतिक समझौते और रूस के साथ संबंधों को मजबूत करने में उनकी भूमिका अहम रही है। 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' के अनुसार, आज लारीजानी का दबदबा ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशक्यान से भी ज्यादा माना जाता है। यहां तक कि विदेश मंत्री भी अहम फैसलों के लिए राष्ट्रपति के बजाय लारीजानी की मंजूरी मांगते हैं।
युद्ध और उत्तराधिकार के लिए 'प्लान-बी'
खामेनेई ने लारीजानी को एक बेहद गुप्त और महत्वपूर्ण काम सौंपा है और वो है- सर्वोच्च नेता के मारे जाने की स्थिति में इस्लामी गणतंत्र को बचाए रखना। रिपोर्ट के मुताबिक, वरिष्ठ नेतृत्व को निशाना बनाए जाने की स्थिति के लिए एक चार-स्तरीय 'सक्सेशन प्लान' तैयार किया गया है। यदि शीर्ष नेतृत्व से संपर्क टूटता है, तो लारीजानी के नेतृत्व में एक छोटा समूह देश के सभी बड़े फैसले लेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि खामेनेई युद्ध और अपनी शहादत की संभावना को देखते हुए सत्ता का वितरण कर रहे हैं, ताकि उनके बाद भी सिस्टम और उनकी विरासत सुरक्षित रहे।
एक तरफ कूटनीति, दूसरी तरफ युद्ध की तैयारी
एक तरफ जहां ओमान की मध्यस्थता में अमेरिका के साथ परमाणु वार्ता का तीसरा दौर शुरू होने वाला है, वहीं दूसरी तरफ लारीजानी ने युद्ध के लिए तैयार रहने का संदेश भी दिया है। लारीजानी ने हाल ही में कहा कि ईरान ने पिछले सात-आठ महीनों में अपनी कमजोरियों को दूर कर लिया है और वह पहले से कहीं ज्यादा शक्तिशाली है।उन्होंने साफ किया कि ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अगर उन पर हमला थोपा गया, तो वे करारा जवाब देंगे। फिलहाल, लारीजानी की देखरेख में ही वाशिंगटन के साथ परमाणु समझौते की शर्तें तय की जा रही हैं।