Iran Crisis: ईरान में चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच एक खौफनाक खबर सामने आई है। 26 वर्षीय प्रदर्शनकारी इरफान सुल्तानी को कथित तौर पर बुधवार, 14 जनवरी को फांसी दी जाने वाली है। अगर यह सजा दी जाती है, तो यह सरकार विरोधी वर्तमान आंदोलन से जुड़ी फांसी की पहली आधिकारिक सजा होगी। मानवाधिकार संगठनों ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन बताया है।
इरफान सुल्तानी तेहरान के कराज (Karaj) इलाके के फर्दीस के रहने वाले हैं। उन्हें 8 जनवरी को सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों में शामिल होने के आरोप में उनके घर से गिरफ्तार किया गया था। उन पर 'मोहरेबेह' यानी 'ईश्वर के विरुद्ध युद्ध' छेड़ने का आरोप लगाया गया है, जिसके लिए ईरान में मौत की सजा का प्रावधान है।
कानूनी अधिकारों के हनन का लगा आरोप
मानवाधिकार समूहों ने इरफान के मामले में न्याय की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए है। इरफान को अपना बचाव करने के लिए वकील नहीं दिया गया। यहां तक कि उनकी बहन, जो एक लाइसेंस प्राप्त वकील हैं, उन्हें भी केस फाइल देखने या अपने भाई का प्रतिनिधित्व करने से रोक दिया गया। 8 जनवरी को उनकी गिरफ्तारी हुई थी, उसके मात्र 4 दिनों के भीतर उनके परिवार को मौत की सजा की सूचना दी गई। परिवार को केवल 10 मिनट की मुलाकात की अनुमति दी गई, जिसमें उन्हें बताया गया कि यह फैसला अंतिम है।
'ईरान ह्यूमन राइट्स' (IHR) ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यह 'सामूहिक फांसियों' के दौर की शुरुआत हो सकती है। सोशल मीडिया पर 'StopExecutionsInIran' हैशटैग के साथ इरफान सुल्तानी के लिए न्याय की मांग की जा रही है।
ईरान में प्रदर्शनों की वर्तमान स्थिति
ईरान में यह नया आंदोलन दिसंबर 2025 के अंत में आर्थिक बदहाली और महंगाई के खिलाफ शुरू हुआ था, जो अब राजनीतिक बदलाव की मांग में बदल चुका है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक 600 से अधिक प्रदर्शनकारी मारे जा चुके हैं और 10,000 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है। 8 जनवरी से देश में इंटरनेट और संचार सेवाओं पर कड़ा प्रतिबंध लगा दिया गया है, जिससे सही जानकारी बाहर आना मुश्किल हो गया है। विश्लेषकों का मानना है कि इरफान की फांसी का उद्देश्य जनता के मन में डर पैदा करना और प्रदर्शनों को कुचलना है।