Trump-Xi Jinping: बीते दिनों बीजिंग में डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच दो दिवसीय शिखर सम्मेलन हुआ। इस बैठक से अब एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। 'फाइनेंशियल टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बैठक के दौरान एक वक्त ऐसा आया जब शी जिनपिंग अमेरिकी अधिकारियों के सामने ही तमतमा गए। उनका रुख बेहद आक्रामक था और वो काफी उत्तेजित हो गए थे।
दिलचस्प बात यह है कि चीनी राष्ट्रपति के इस गुस्से की वजह अमेरिका नहीं, बल्कि जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची और जापान का बढ़ता सैन्य दखल था। बैठक से पहले के एजेंडे में जापान कोई मुख्य मुद्दा नहीं था, इसलिए जिनपिंग के इस बदले तेवर ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल को भी हैरान कर दिया।
आइए आपको बताते हैं कि बंद कमरे में हुई इस बातचीत में ऐसा क्या हुआ, जो इस बैठक का सबसे हाई-वोल्टेज ड्रामा साबित हुआ।
क्या रही जिनपिंग के गुस्से की असली वजह
शिखर सम्मेलन के दौरान शी जिनपिंग ने जापान की नई सुरक्षा रणनीति और सैन्य विस्तार को लेकर अपनी गहरी नाराजगी जाहिर की। जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची के नेतृत्व में टोक्यो ने अपनी दशकों पुरानी रक्षात्मक नीति को बदलकर आक्रामक रुख अपना लिया है, जिससे चीन बौखलाया हुआ है। चीन की चिंता के पीछे जापान के ये 4 बड़े कदम हैं:
रिकॉर्ड सैन्य खर्च: जापान ने अपने रक्षा बजट को अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचा दिया है।
हथियारों के निर्यात पर ढील: जापान ने लड़ाकू विमान, मिसाइलें और युद्धपोत दूसरे देशों को बेचने पर लगी पुरानी पाबंदियां हटा दी हैं।
इंडो-पैसिफिक में नए गठबंधन: चीन को घेरने के लिए जापान ने ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों के साथ सैन्य साझेदारी मजबूत की है।
ताइवान को खुला समर्थन: जापान अब ताइवान की सुरक्षा को लेकर खुलकर चीन के सामने खड़ा हो रहा है।
ट्रंप का करारा जवाब- 'जापान की मजबूरी है सैन्य विस्तार'
शी जिनपिंग की इस तीखी आलोचना के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पीछे नहीं हटे। उन्होंने जापान के इस मजबूत सुरक्षा दृष्टिकोण का खुलकर बचाव किया। ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति को दोटूक कहा कि जापान को यह आक्रामक रुख मजबूरी में अपनाना पड़ रहा है, क्योंकि उत्तर कोरिया की तरफ से क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर लगातार खतरे बढ़ रहे हैं।
एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि ट्रंप ने जापानी लोगों के प्रति गहरा सम्मान जताया और पीएम सनाए ताकाइची के साथ अपने करीबी व्यक्तिगत संबंधों का भी जिक्र किया। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने चीनी पक्ष को साफ तौर पर याद दिलाया कि जापान में अमेरिकी सेना की बहुत बड़ी मौजूदगी है, जो वहां की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
'ताइवान' बना असली फ्लैशपॉइंट
जापान और चीन के रिश्तों में कड़वाहट तब और बढ़ गई थी, जब पिछले साल जापानी पीएम सनाए ताकाइची ने संकेत दिया था कि अगर चीन ताइवान पर हमला करता है, तो जापान अपनी सेना का इस्तेमाल कर सकता है। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और इसे अपने आंतरिक मामले में हस्तक्षेप देखता है।