ट्रंप चाह कर भी नहीं कर पाएंगे ईरान पर हमला? US हाउस में हुई प्रस्ताव पर वोटिंग, POTUS का अपनी पार्टी के सांसदों ने भी नहीं दिया साथ
215-208 वोटों से पास हुए इस प्रस्ताव को डेमोक्रेट सांसदों के साथ-साथ चार रिपब्लिकन सांसदों का भी समर्थन मिला। इसे ट्रंप की ईरान नीति के खिलाफ उनकी अपनी पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष के रूप में देखा जा रहा है। मिशिगन के रिपब्लिकन सांसद टॉम बैरेट ने कहा, युद्ध घोषित करने का अधिकार सिर्फ कांग्रेस के पास है और हमें इस अधिकार की रक्षा करनी चाहिए
तो ट्रंप चाह कर भी नहीं कर पाएंगे ईरान पर हमला? US हाउस में हुई प्रस्ताव पर वोटिंग
क्या अमेरिका ईरान युद्ध अब खत्म हो जाएगा, क्या ट्रंप अब ईरान पर चाह कर भी हमला नहीं कर पाएंगे और क्या अमेरिकी सांसद ने ही राष्ट्रपति के हाथ बांध दिए हैं? इस वक्त हर किसी के दिमाग में यही सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि अमेरिका की प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) ने एक अहम प्रस्ताव पास किया है, जिसका मकसद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान के खिलाफ आगे सैन्य कार्रवाई करने से रोकना है।
215-208 वोटों से पास हुए इस प्रस्ताव को डेमोक्रेट सांसदों के साथ-साथ चार रिपब्लिकन सांसदों का भी समर्थन मिला। इसे ट्रंप की ईरान नीति के खिलाफ उनकी अपनी पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष के रूप में देखा जा रहा है।
इस प्रस्ताव के तहत ट्रंप प्रशासन से कहा गया है कि या तो ईरान में चल रहे सैन्य अभियान से अमेरिकी सेना को वापस बुलाया जाए या फिर युद्ध जारी रखने के लिए कांग्रेस (संसद) की मंजूरी ली जाए।
हालांकि, इस प्रस्ताव का कानूनी असर कितना होगा, यह अभी साफ नहीं है। व्हाइट हाउस ने इसे राष्ट्रपति के अधिकारों को सीमित करने की "असंवैधानिक कोशिश" बताते हुए खारिज कर दिया है।
ट्रंप पर बढ़ सकता है राजनीति दबाव?
फिर भी राजनीतिक तौर पर यह ट्रंप के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। ईरान युद्ध के चलते अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें बढ़ी हैं और आम लोगों के बीच भी युद्ध को लेकर नाराजगी बढ़ रही है। ऐसे में यह वोट व्हाइट हाउस पर युद्ध खत्म करने का दबाव बढ़ा सकता है।
यह चौथी बार है जब अमेरिकी हाउस ने ट्रंप की युद्ध संबंधी शक्तियों को सीमित करने की कोशिश की है। इससे पहले मई में सीनेट में भी ऐसा ही प्रस्ताव आगे बढ़ा था, लेकिन उस पर अभी अंतिम मतदान नहीं हुआ है।
अगर यह प्रस्ताव रिपब्लिकन बहुमत वाली सीनेट से भी पास हो जाता है, तो इसे राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की जरूरत नहीं होगी। हालांकि, बाद में इसे अदालत में चुनौती दी जा सकती है।
ट्रंप की अपनी पार्टी के लोग भी नाराज!
वोटिंग से पहले हाउस स्पीकर माइक जॉनसन ने रिपब्लिकन सांसदों से इस प्रस्ताव का विरोध करने की अपील की थी। उनका कहना था कि ऐसा कदम "खतरनाक" होगा और इससे ट्रंप की ईरान के साथ समझौता करने की ताकत कमजोर पड़ जाएगी।
जॉनसन का तर्क था कि अगर कांग्रेस राष्ट्रपति के हाथ बांध देगी, तो युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत करना और मुश्किल हो सकता है। लेकिन उनकी अपील के बावजूद चार रिपब्लिकन सांसदों- थॉमस मैसी, ब्रायन फिट्जपैट्रिक, टॉम बैरेट और वॉरेन डेविडसन-ने पार्टी लाइन से हटकर डेमोक्रेट सांसदों के साथ मिलकर प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया।
नतीजा यह रहा कि प्रस्ताव 215-208 मतों से पास हो गया। इसे ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान मिली सबसे बड़ी संसदीय फटकारों में से एक माना जा रहा है। इस वोटिंग ने रिपब्लिकन पार्टी के भीतर मौजूद मतभेदों को भी उजागर कर दिया है।
मिशिगन के रिपब्लिकन सांसद टॉम बैरेट ने कहा, "युद्ध घोषित करने का अधिकार सिर्फ कांग्रेस के पास है और हमें इस अधिकार की रक्षा करनी चाहिए।"
डेमोक्रेट सांसद ग्रेगरी मीक्स ने इसे ट्रंप के "महंगे और गैरकानूनी ईरान युद्ध" के खिलाफ दोनों दलों की बड़ी फटकार बताया। उन्होंने कहा कि युद्ध अपने घोषित उद्देश्यों को हासिल करने में नाकाम रहा है, जबकि इससे ईंधन की कीमतें बढ़ी हैं और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कूटनीतिक समाधान की राह और मुश्किल हो गई है।
मीक्स ने कहा कि अब ज्यादा से ज्यादा रिपब्लिकन सांसद भी अपने मतदाताओं की आवाज सुन रहे हैं, जो मध्य पूर्व में एक और लंबे युद्ध के पक्ष में नहीं हैं।
अब आगे क्या होगा?
अगर यही प्रस्ताव सीनेट से भी पास हो जाता है, तो ट्रंप को या तो ईरान से अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाना होगा या फिर युद्ध जारी रखने के लिए कांग्रेस की मंजूरी लेनी होगी।
हालांकि व्हाइट हाउस पहले ही संकेत दे चुका है कि वह इस कानून को असंवैधानिक मानता है और इसे नजरअंदाज करने की कोशिश कर सकता है।
फिर भी इस वोटिंग का राजनीतिक संदेश काफी बड़ा है। इससे साफ हो गया है कि रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी ईरान युद्ध को लेकर धैर्य खत्म होता दिख रहा है। पार्टी के कुछ नेता अब ट्रंप को और समय देने के पक्ष में नहीं हैं और चाहते हैं कि युद्ध का जल्द समाधान निकाला जाए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप अब पहले की तुलना में ज्यादा दबाव में हैं। उनकी लोकप्रियता पहले ही रिकॉर्ड निचले स्तर पर बताई जा रही है और नवंबर में होने वाले चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को नुकसान होने की आशंका बढ़ रही है।
उधर, ईरान युद्ध भी लंबा और जटिल होता जा रहा है। ऐसे में ट्रंप के सामने चुनौती यह है कि वे युद्ध को कैसे खत्म करें और साथ ही अपनी राजनीतिक स्थिति को भी बचाए रखें।
कुल मिलाकर, हाउस में हुई यह वोटिंग सिर्फ एक प्रस्ताव नहीं, बल्कि ट्रंप के खिलाफ उनकी अपनी पार्टी के भीतर बढ़ती बेचैनी और असंतोष का बड़ा संकेत मानी जा रही है।