Interim Budget 2024 : प्रमुख उद्योग चैंबर कनफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज यानी सीआईआई (CII) ने अंतरिम बजट (Interim Budget) से पहले वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) को सलाह दी है। उसने कहा है कि कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ाने, डिसइनवेस्टमेंट के प्रोसेस को तेज करने और पीएलआई (PLI) स्कीम का दायरा बढ़ाने के उपाय करने होंगे। सीआईआई ने कहा है कि उसने अंतरिम बजट को लेकर जो सलाह दी है, उससे इंडिया को साल 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनाने में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कह चुके हैं इंडिया साल 2047 तक डेवलप्ड इकोनॉमी बन जाएगा। 2047 में देश की आजादी के 100 साल पूरे होंगे। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को यूनियन बजट 2024 पेश करेंगी। यह अंतरिम बजट होगा। अप्रैल-मई में लोकसभा चुनावों के बाद जो नई सरकार बनेगी वह जुलाई में पूर्ण बजट पेश करेगी।
वित्तमंत्री के बजट भाषण में निगाहें उन उपायों पर होंगी, जो मोदी सरकार के ग्रोथ के लक्ष्य को हासिल करने में मददगार हो सकती हैं। लोकसभा चुनावों से पहले आने वाले इस बजट में सरकार का फोकस ग्रामीण और कृषि क्षेत्र पर रहने की उम्मीद है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि कृषि सेक्टर की ग्रोथ काफी सुस्त पड़ गई है। इस सेक्टर ने इकोनॉमी को तब सहारा दिया था, जब कोरोना की महामारी की वजह से आर्थिक गतिविधियां ठप पड़ गई थीं। ऐसे में कृषि क्षेत्र को मुश्किल वक्त में सरकार की मदद की जरूरत है।
CII ने अंतरिम बजट से पहले वित्तमंत्री को निम्नलिखित सलाह दी है :
1. कैपिटल एक्सपेंडिचर पर फोकस : इंडियन इकोनॉमी के शानदार प्रदर्शन में पूंजीगत खर्च पर सरकार के फोकस का बड़ा हाथ रहा है। सरकार ने सड़क, एयरपोर्ट्स, रेलवे ट्रैक और ब्रिज पर खर्च बढ़ाया है। सीआईआई का कहना है कि सरकार को इंफ्रास्ट्रक्चर पर अपना फोकस बनाए रखना चाहिए। उसने पूंजीगत खर्च को बढ़ाकर 12 लाख करोड़ रुपये करने की सलाह दी है।
2. फिस्कल कंसॉलिडेशन : वित्तमंत्री को इकोनॉमिक ग्रोथ पर फोकस के साथ ही फिस्कल कंसॉलिडेशन को भी ध्यान में रखना होगा। वित्त वर्ष 2024-25 में सरकार को फिस्कल डेफिसिट का टारगेट घटाकर 5.4 फीसदी करना चाहिए। इस वित्त वर्ष में यह टारगेट 5.9 फीसदी था।
3. जीएसटी स्ट्रक्चर में बदलाव : CII का कहना है कि सरकार को जीएसटी स्ट्रक्चर को आसान बनाने की जरूरत है। जीएसटी के रेट के सिर्फ तीन स्लैब होने चाहिए। सबसे कम रेट वाले स्लैब में जरूरी चीजें आनी चाहिए। ज्यादातर चीजों को मध्यम रेट वाले स्लैब में रखना चाहिए। सबसे ज्यादा रेट वाले स्लैब में लग्जरी गुड्स और सिगरेट जैसे सिन प्रोडक्ट्स आने चाहिए।
4. डिसइनवेस्टमेंट पर फोकस : सरकार को डिसइनवेस्टमेंट प्रोग्राम पर फोकस बढ़ाने की जरूरत है। पहले उन सरकारी कंपनियों का विनिवेश होना चाहिए, जिसमें निवेशकों की ज्यादा दिलचस्पी हो सकती है। सीआईआई का कहना है कि सरकार को सरकारी कंपनियों में विनिवेश के लिए तीन साल का रोडमैप बनाना चाहिए।
5. मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा : सीआईआई का कहना है कि शर्तें तय करने वाली मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के लिए 15 फीसदी कॉर्पोरेट टैक्स के रियायती दर की समयसीमा 31 मार्च, 2025 से आगे बढ़ानी चाहिए। उद्योग चैंबर का कहना है कि सरकार को अपैरल, खिलौने और फुटवियर जैसे सेक्टर को भी PLI Scheme के दायरे में लाने की जरूरत है।