Union Budget 2024 : वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) अपने अंतरिम बजट (Interim Budget) कैलकुलेशन में वित्त वर्ष 2024-25 के लिए 10.5 फीसदी नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ का अनुमान लगा सकता है। इकोनॉमिस्ट्स के बीच हुए पोल से यह पता चला है। इस पोल में 15 इकोनॉमिस्ट्स ने हिस्सा लिया। बजट कैलकुलेशन के लिए नॉमिनल ग्रोथ का अनुमान बहुत अहम है। उदाहरण के लिए अगले वित्त वर्ष के नॉमिनल ग्रोथ के फीसदी के रूप में कुल फिस्कल डेफिसिट होता है। इसे सरकार की वित्तीय सेहत का प्रमुख पैमाना माना जाता है। नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ ज्यादा रहने पर नॉमिनल जीडीपी भी ज्यादा रहेगी, जिससे फीसदी के रूप में फिस्कल डेफिसिट कम दिखेगा। इंडिया रेटिंग्स और रिसर्च ने कहा है कि इंडिया में फिस्कल कंसॉलिडेशन ज्यादातर रेवेन्यू-आधारित रहा है। इसलिए इकोनॉमिक ग्रोथ का टैक्स कलेक्शन पर काफी असर पड़ता है।
इस वित्त वर्ष में नॉमिनल जीडीपी 301 लाख करोड़ रहने का अनुमान लगाया गया था
होलसेल इनफ्लेशन इस वित्त वर्ष के पहले सात महीनों में जीरो से कम रहा। आने वाले महीनों में इसके बढ़ने की उम्मीद है। इसका नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ पर काफी असर है। स्टैटिस्टिक्स मिनिस्ट्री के 2023-24 के नेशनल इनकम के पहले अग्रिम अनुमान के मुताबिक, इस साल इंडिया की नॉमिनल जीडीपी 8.9 फीसदी बढ़कर 296.58 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। वित्त मंत्रालय ने 1 फरवरी, 2023 को पेश बजट के लिए अपने कैलकुलेशन में नॉमिनल जीडीपी 10.5 फीसदी की ग्रोथ के साथ 301.75 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया था।
नॉमिनल ग्रोथ ज्यादा रहने से फिस्कल डेफिसिट घटाने में मिली मदद
इकोनॉमिस्ट्स ने अगले वित्त वर्ष नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ 9.5 से 11.5 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। वित्त वर्ष 2020-21 और 2022-23 में नॉमिनल ग्रोथ ज्यादा रहने से सरकार को अपने फिस्कल डेफिसिट में कमी लाने में मदद मिली। फिस्कल डेफिसिट 2020-21 के 9.2 फीसदी से घटकर इस वित्त वर्ष में 5.9 फीसदी तक रहने की उम्मीद है। लेकिन, बेस इफेक्ट अब सामान्य हो जाने और अब तक होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) इनफ्लेशन के कम रहने से नॉमिनल ग्रोथ 2022-23 के 16.1 फीसदी और 2021-22 के 18.4 फीसदी से काफी नीचे आ गया है।
सरकार पर कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ाने का दबाव
इससे आगे केंद्र सरकार के फाइनेंस के मामले में मुश्किल हो सकती है। खासकर यह देखते हुए कि इंटरेस्ट पेमेंट्स, सेलरी और पेंशन जैसे जरूरी खर्च अपनी जगह बने रहेंगे। सरकार इनमें कमी नहीं कर सकती है, जबकि दूसरी तरफ उस पर कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ाने का दबाव होगा। हालांकि, इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि जीडीपी ग्रोथ अनुमान से ज्यादा रहने से यह सरकार के लिए अपनी वित्तीय स्थिति को ठीक करने का अच्छा मौका है। मशहूर इकोनॉमिस्ट माधवी अरोड़ा ने कहा कि हमें वित्त वर्ष 2024-25 में फिस्कल डेफिसिट और जीडीपी का रेशियो 5.4 फीसदी रहने की उम्मीद है।