Dawood Hospitalised: छोटा शकील ने दी अंडरवर्ल्ड डॉन के हेल्थ की अपडेट, दाऊद के मरने की खबरें झूठीं

दाऊद इब्राहिम लंबे समय से पाकिस्तान के कराची को अपना गढ़ बनाए हुए हैं। ऐसे में खबर थी कि किसी ने उन्हें जहर दे दिया है और वो आखिरी सांसें गिन रहे हैं। हालांकि उनके सबसे करीबी छोटा शकील का कहना है कि उन्हें कुछ भी नहीं हुआ है वो पूरी तरह से स्वस्थ हैं और अभी जिंदा हैं।

अपडेटेड Dec 19, 2023 पर 8:11 AM
दाऊद इब्राहिम को लेकर 17 दिसंबर से खबरें सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं कि उन्हें जहर दे दिया गया है

Dawood Hospitalised: दो दिनों से सोशल मीडिया पर दाऊद इब्राहिम को जहर दिए जाने की खबरें छाई हुई हैं। खबरों की मानें तो दाऊद इब्राहिम की हालत बेहद खराब है। 65 साल के अंडरवर्ल्ड डॉन को कराची के अस्पताल में भर्ती करवाया गया है और वो अपनी आंखें सांसें गिन रहे हैं। ऐसे में उनके बेहद करीबी और राइट हैंड छोटा शकील ने सारी अफवाहों को खारिज किया है। छोटा शकील ने बताया है कि दाऊद पूरी तरह से सेहतमंद और स्वस्थ हैं।

फेक खबरों ने किया लोगों को गुमराह

कई सोशल मीडिया अकाउंट्स पर खबर है कि गैंगस्टर को जहर देने के बाद अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। पाकिस्तान के केयरटेकर प्रधानमंत्री अनवर उल हक काकड़ के अकाउंट से जारी की गई अपडेट्स का भी लोग स्क्रीनशॉट शेयर कर रह थे। जिसमें दाऊद के मरने की बात तक कह दी गई दी। हालांकि वो अकाउंट भी पूरी तरह से फेक था। पाकिस्तान के केयरटेकर पीएम के इस फेक वायरल मैसेज में लिखा था, “मानवता के मसीहा, हर पाकिस्तानी के दिल अजीज, हमारे प्यारे महामहिम दाऊद इब्राहिम का जहर खाने से निधन हो गया। उन्होंने कराची के एक अस्पताल में आखिरी सांस ली। अल्लाह उन्हें जन्नत में आला मकाम अता करे। इन्ना लिल्लाहि वा इन्ना इलैहि राजि उन।

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क्या है ये डी कंपनी

रत्नागिरी में एक पुलिस कांस्टेबल के घर पैदा हुए दाऊद इब्राहिम ने दुबई और कराची में एक विशाल साम्राज्य बनाया। इसके साथ ही वो ब्रिटेन और पश्चिमी यूरोप के ड्रग माफिया बन गए। CBI के मुताबिक अपनी पहचान छिपाने के लिए दाऊद 13 उपनामों का इस्तेमाल करता है। 1980 और 1990 के दशक की शुरुआत में वेश्यावृत्ति, जुआ और ड्रग्स की मदद से दाऊद मुंबई अंडरवर्ल्ड का बेताज बादशाह बन गया। 1980 के दशक में मुंबई के आर्थिक पतन ने नवगठित माफियाओं के लिए रास्ता बना दिया। अपराधिक मुकदमों से बचने के लिए इब्राहिम 1986 में दुबई चला गया। बाद में, इन्हें भारत, पाकिस्तान और नेपाल में डी-कंपनी के रूप में जाना जाने लगा।


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