धान की कटाई के बाद छत्तीसगढ़ के खेतों में अब रबी सीजन की तैयारियां तेज हो गई हैं। इस बार किसान परंपरागत फसलों से हटकर कुछ नए और फायदेमंद विकल्पों की ओर ध्यान दे रहे हैं। बदलते मौसम, बढ़ती लागत और बेहतर कमाई की जरूरत ने किसानों को वैकल्पिक खेती के लिए प्रेरित किया है। सरकार भी लगातार किसानों को दलहन और तिलहन जैसी फसलों की ओर बढ़ने की सलाह दे रही है, ताकि आमदनी के साथ-साथ मिट्टी की ताकत भी बनी रहे। इसी बीच कृषि वैज्ञानिक भी किसानों के साथ खड़े नजर आ रहे हैं।
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय से जुड़े ठाकुर छेदीलाल बैरिस्टर कृषि महाविद्यालय, बिलासपुर के विशेषज्ञ किसानों को रबी फसलों को लेकर जरूरी जानकारी दे रहे हैं। उनका मकसद है कि किसान कम लागत में सही फसल चुनें और अच्छा उत्पादन हासिल करें। वैज्ञानिक सलाह से खेती आसान हो सकती है और नुकसान का खतरा भी कम किया जा सकता है
दलहन–तिलहन क्यों हैं फायदेमंद
धान के बाद दलहन और तिलहन की खेती करने से खेतों की मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है। इससे जमीन उपजाऊ बनती है और अगली फसल पर रोग व कीट का असर भी कम होता है। साथ ही इन फसलों से किसानों की आय में भी अच्छा इजाफा होता है।
चना की उन्नत किस्में अपनाएं
कृषि रोग विशेषज्ञ डॉ. विनोद निर्मलकर के अनुसार, रबी सीजन में चना उगाने वाले किसान JAKI 9218, वैभव और JG-11 किस्मों का चयन कर सकते हैं। ये किस्में रोग-प्रतिरोधी हैं और कम लागत में बेहतर पैदावार देती हैं।
सरसों की खास किस्में छत्तीसगढ़ के लिए
तिलहन फसलों में सरसों लगाने वाले किसानों के लिए छत्तीसगढ़ सरसों किस्म और वरुण किस्म बेहतर विकल्प हैं। इन्हें इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने विकसित किया है। इन किस्मों की पैदावार ज्यादा होती है और रोगों का खतरा भी कम रहता है।
गेहूं की खेती में भी अच्छे विकल्प
गेहूं की खेती के लिए भी विश्वविद्यालय द्वारा विकसित उन्नत किस्में उपलब्ध हैं। इनमें मानवंती किस्म रबी सीजन के लिए खास मानी जाती है। यह रोटी बनाने में बेहतरीन है और उत्पादन भी अच्छा देती है।
किसानों के लिए जरूरी सलाह
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर किसान सही किस्म चुनें, समय पर बुवाई करें और वैज्ञानिक तरीके अपनाएं, तो दलहन–तिलहन और गेहूं की खेती से बेहतर पैदावार और मुनाफा दोनों मिल सकते हैं। यह पहल किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है।