Brinjal farming: इस खास बैंगन की खेती से बदल गई किसान की किस्मत, बाजार में रहती है जबरदस्त मांग

Brinjal farming: कम समय में ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए बैंगन की खेती किसानों के लिए फायदेमंद विकल्प बन रही है। मऊ जिले के किसान रामलेश मौर्य ने सिर्फ 3 हजार रुपये की लागत से छह महीने में करीब डेढ़ लाख रुपये की कमाई कर सब्जी खेती की सफलता दिखाई है

अपडेटेड Dec 30, 2025 पर 1:36 PM
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Brinjal farming: अगर किसान समय पर सही किस्म और सही तरीके से बैंगन की खेती करें

अगर आप किसान हैं और कम समय में अच्छी कमाई करना चाहते हैं, तो बैंगन की खेती एक बेहतरीन विकल्प बन सकती है। आजकल कई किसान पारंपरिक फसलों की जगह सब्जियों की खेती की ओर रुख कर रहे हैं, क्योंकि इसमें लागत कम और मुनाफा ज्यादा मिलता है। मऊ जिले की घोसी तहसील के पकड़ी बुजुर्ग गांव के प्रगतिशील किसान रामलेश मौर्य इसका जीता-जागता उदाहरण हैं। उन्होंने बहुत कम खर्च में बैंगन की ऐसी खेती की, जिससे छह महीने में शानदार आमदनी हुई। सब्जी की खेती में सही किस्म का चयन, समय पर बुवाई और बाजार की मांग को समझना बेहद जरूरी होता है।

बैंगन ऐसी सब्जी है, जिसकी बाजार में सालभर अच्छी मांग रहती है और सही देखभाल करने पर इसकी पैदावार भी काफी अच्छी मिलती है। यही वजह है कि अब कई किसान धान और गेहूं जैसी फसलों से हटकर बैंगन जैसी नकदी सब्जियों की खेती कर रहे हैं, जिससे उनकी आमदनी में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

खास किस्म का बैंगन बना कमाई का जरिया


रामलेश मौर्य ने बताया कि वह सामान्य बैंगन नहीं, बल्कि ISR 704 किस्म के बैंगन की खेती करते हैं। उन्होंने यह खेती 12 बिस्वा जमीन में की है। इस किस्म की खासियत यह है कि हर फल का वजन करीब 250 ग्राम तक होता है और पैदावार भी ज्यादा मिलती है।

खेती का सही समय और उत्पादन

किसान ने बताया कि जून-जुलाई में बैंगन की खेती करने से बेहतर परिणाम मिलते हैं। पौधे लगाने के करीब 45 दिन बाद फूल आने लगते हैं और 60 दिन बाद तुड़ाई शुरू हो जाती है। एक पौधे से लगभग 10 से 12 किलो तक बैंगन निकल रहा है।

मार्केट में ज्यादा मांग

इस बैंगन का रंग और स्वाद बाजार में अलग है, साथ ही इसमें बीज भी बहुत कम होते हैं। इसी वजह से इसकी मांग ज्यादा रहती है और बाजार में यह आसानी से बिक जाता है।

100 फीसदी ऑर्गेनिक खेती का कमाल

रामलेश मौर्य ने बताया कि वह पूरी तरह ऑर्गेनिक तरीके से बैंगन की खेती करते हैं। इसमें नीम खली, गोबर की खाद, सागरिका और नीम के घोल का इस्तेमाल किया जाता है। इस जैविक खेती से न सिर्फ फसल अच्छी हो रही है, बल्कि मुनाफा भी कई गुना बढ़ गया है।

अन्य किसानों के लिए सीख

अगर किसान समय पर सही किस्म और सही तरीके से बैंगन की खेती करें, तो कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है। यह खेती धान और गेहूं की तुलना में ज्यादा फायदेमंद साबित हो रही है।

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