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Potato Cultivation: आलू की खेती में सावधानी जरूरी, जरा सी चूक से चौपट हो सकती है पूरी फसल

Potato Cultivation: अगर आपने इस सीजन आलू की खेती की है, तो अब सावधानी बेहद जरूरी है। थोड़ी सी लापरवाही पूरी फसल को नुकसान पहुंचा सकती है। आलू किसानों की आमदनी का बड़ा जरिया है, लेकिन झुलसा, स्कर्फ और विषाणु रोग समय पर काबू न पाए जाएं तो मेहनत और लागत दोनों बेकार जा सकती हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 04, 2026 पर 1:55 PM
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अगर इस बार आपने अपने खेत में आलू की फसल लगाई है, तो अब सतर्क रहने का समय है। थोड़ी सी लापरवाही आपकी महीनों की मेहनत पर पानी फेर सकती है। आलू की खेती किसानों के लिए आय का एक अहम स्रोत मानी जाती है, लेकिन इसमें लगने वाली कुछ गंभीर बीमारियां पूरी फसल को नुकसान पहुंचा सकती हैं। कई बार किसान शुरुआत में लक्षणों को हल्के में ले लेते हैं, जिसका खामियाजा बाद में भारी नुकसान के रूप में भुगतना पड़ता है। झुलसा, स्कर्फ और विषाणु रोग जैसी समस्याएं आलू की पैदावार और गुणवत्ता दोनों को प्रभावित करती हैं। अगर इन रोगों की समय रहते पहचान न की जाए और सही उपाय न अपनाए जाएं, तो उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है।

इसलिए जरूरी है कि किसान फसल की नियमित निगरानी करें, रोगों के शुरुआती लक्षणों को समझें और तुरंत वैज्ञानिक तरीके से बचाव करें, ताकि अच्छी पैदावार और बेहतर कमाई सुनिश्चित की जा सके।

झुलसा रोग सबसे बड़ा खतरा

कृषि विशेषज्ञ प्रो. अशोक कुमार सिंह के अनुसार, आलू की खेती में झुलसा रोग सबसे खतरनाक माना जाता है। यह दो तरह का होता है—अगेती झुलसा और पछेती झुलसा। इसकी शुरुआत पत्तियों पर छोटे भूरे या काले धब्बों से होती है, जो धीरे-धीरे पूरी पत्ती को जला देते हैं। नमी बढ़ने पर पत्तियों के नीचे रुई जैसी फफूंद दिखने लगती है। तनों पर दाग पड़ते हैं और कंद छोटे होकर सड़ने लगते हैं।

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