eNAM स्कीम में सब्सिडी के लिए आधार अनिवार्य, लाभार्थियों की सही पहचान में मिलेगी मदद

eNAM योजना के तहत सब्सिडी और अन्य लाभ पाने के लिए अब आधार नंबर अनिवार्य होगा। इससे किसानों की पहचान की पुष्टि आसान होगी और योजना में पारदर्शिता बढ़ेगी।

अपडेटेड Apr 22, 2025 पर 4:33 PM
eNAM यानी इलेक्ट्रॉनिक नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट एक पैन-इंडिया इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग पोर्टल है।

 

केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट (eNAM) योजना के तहत सब्सिडी और अन्य लाभ प्राप्त करने के लिए आधार नंबर को अनिवार्य कर दिया है। कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने इस संबंध में सोमवार को अधिसूचना जारी की।

नए नियमों के अनुसार, eNAM योजना के अंतर्गत लाभ लेने वाले किसानों और अन्य हितधारकों को अपनी पहचान की पुष्टि के लिए आधार नंबर देना जरूरी होगा। जिनके पास आधार नहीं है, उन्हें पहले आधार के लिए नामांकन कराना होगा, तभी वे इस डिजिटल कृषि प्लेटफॉर्म से लाभ ले सकेंगे।


क्या है eNAM योजना?

eNAM यानी इलेक्ट्रॉनिक नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट एक पैन-इंडिया इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग पोर्टल है। इसे भारत की कृषि मंडियों को एक डिजिटल नेटवर्क से जोड़ने के लिए शुरू किया गया था। इसका मकसद किसानों को बेहतर मूल्य दिलाना, मंडी और राज्य स्तर पर व्यापार को आसान बनाना और मध्यस्थों की भूमिका कम करके पारदर्शिता बढ़ाना है।

सरकार अब eNAM को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। इसमें वेयरहाउस आधारित बिक्री (Warehouse-Based Sale) की सुविधा दी जाएगी। इलेक्ट्रॉनिक नेशनल वेयरहाउसिंग रिसिप्ट (eNWR) का एकीकरण होगा। वहीं, FPOs (Farmer Producer Organisations) के माध्यम से किसानों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी।

FPOs को मिल रही है खास तरजीह

इस योजना में किसान उत्पादक संगठन (FPOs) प्रमुख भूमिका में हैं। हर मंडी को एकमुश्त ₹75 लाख तक का अनुदान दिया जा सकता है। इसमें ₹30 लाख कंप्यूटर, इंटरनेट और परीक्षण उपकरणों के लिए होंगे। वहीं, ₹40 लाख छंटाई, ग्रेडिंग और खाद निर्माण इकाइयों के लिए दिए जाएंगे।

आधार क्यों जरूरी किया गया?

कृषि मंत्रालय के अनुसार, आधार को योजना से जोड़ने का मुख्य उद्देश्य है- पारदर्शिता, लाभार्थियों की सही पहचान, और स्कीम की कार्यक्षमता को बेहतर बनाना। इससे फर्जीवाड़ा रोका जा सकेगा और सरकारी संसाधन सही हाथों तक पहुंच सकेंगे।

आधार एक 12 अंकों की यूनिक आईडी है, जिसे UIDAI (भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण) जारी करता है। यह व्यक्ति की बायोमेट्रिक और डेमोग्राफिक जानकारी के आधार पर पहचान की पुष्टि करता है और अधिकांश सरकारी योजनाओं में इसे पहले ही शामिल किया जा चुका है।

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