बागेश्वर के पर्यावरणविद किशन मलड़ा के अनुसार, आम के पेड़ों में बौर आने का समय बेहद नाजुक और अहम माना जाता है। इसी चरण पर तय होता है कि पेड़ पर फल कितनी मात्रा में लगेंगे। इस दौरान मौसम का जरा सा भी बदलाव, जैसे तेज हवा चलना, अचानक बारिश होना या तापमान का ऊपर-नीचे होना, सीधे बौर को प्रभावित कर सकता है। कई बार फूल कमजोर होकर झड़ जाते हैं, जिससे फल बनने की संभावना काफी कम हो जाती है।
यही कारण है कि इस समय किसानों को पेड़ों की विशेष देखभाल करने की जरूरत होती है। थोड़ी सी लापरवाही भी नुकसान का कारण बन सकती है, जबकि सही समय पर ध्यान देने से अच्छी पैदावार मिल सकती है। इसलिए इस अवधि में सतर्क रहना ही सबसे जरूरी होता है
गांव के किसान सुबह-शाम पेड़ों का निरीक्षण करते हैं। जैसे ही किसी रोग या कीट का हल्का सा संकेत मिलता है, तुरंत देसी उपाय अपनाए जाते हैं। इससे पेड़ की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और ज्यादा फल लगने की उम्मीद बनी रहती है।
फंगस से बचाने का देसी तरीका
फफूंद से बचाव के लिए किसान नीला थोथा और बुझा चूना मिलाकर पेस्ट तैयार करते हैं। इसे बारिश के बाद पेड़ के तने और मोटी शाखाओं पर लगाया जाता है। यह एक सुरक्षात्मक परत बनाकर फंगस को फैलने से रोकता है और पेड़ की छाल को मजबूत करता है।
कीट भगाने के लिए नीम का सहारा
बौर पर कीटों का हमला आम बात है। इससे बचने के लिए नीम के तेल का छिड़काव किया जाता है। करीब 5 मिली नीम तेल को 1 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करने से कीट दूर रहते हैं और फूल सुरक्षित रहते हैं। यह तरीका पूरी तरह प्राकृतिक और सुरक्षित है।
गोबर-गोमूत्र से बढ़ती ताकत
ग्रामीण किसान गोबर की खाद और गोमूत्र का उपयोग भी करते हैं। इससे मिट्टी उपजाऊ बनती है और पेड़ को जरूरी पोषण मिलता है। साथ ही यह कीटों और रोगों से भी बचाव करता है, जिससे पेड़ लंबे समय तक स्वस्थ रहता है।
पेड़ के आसपास थोड़ी मात्रा में राख डालने से मिट्टी में पोटाश की पूर्ति होती है, जो फल बनने के लिए जरूरी है। साथ ही यह नमी बनाए रखने और कुछ हद तक कीटों को दूर रखने में भी मदद करती है।
बौर के समय ज्यादा पानी देना नुकसानदायक हो सकता है, क्योंकि इससे फूल गिर सकते हैं। इसलिए जरूरत के हिसाब से ही हल्की सिंचाई करें। जब फल बनने लगें, तब नियमित पानी देना फायदेमंद होता है।
मौसम से बचाव के छोटे उपाय
तेज हवा या बारिश से बचाने के लिए किसान मल्चिंग करते हैं और छोटे पौधों को जाल या कपड़े से ढकते हैं। हल्की छंटाई से भी हवा का संतुलन बना रहता है और रोग कम लगते हैं।
समय पर खाद, सही पानी, कीट नियंत्रण और नियमित देखभाल—यही अच्छी पैदावार की कुंजी है। अगर किसान समय-समय पर पेड़ का ध्यान रखें, तो न सिर्फ फल ज्यादा मिलते हैं बल्कि उनका स्वाद और क्वालिटी भी बेहतर होती है।