Shani Asta in Meen Rashi: ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को सबसे महत्वपूर्ण ग्रहों में से एक माना जाता है। ये ग्रह किसी राशि में कम से कम ढाई साल तक रहते हैं। इतना ही नहीं किसी राशि में शनि का गोचर एक साथ तीन राशियों को प्रभावित करता है। माना जाता है कि शनि जिस जातक की राशि में गोचर करते हैं, उसे उसके कर्मों के हिसाब से फल देते हैं। इसलिए इन्हें कर्मफलदाता भी कहा हाता है। नवग्रहों में शनि को न्याय, अनुशासन और जिम्मेदारियों का कारक माना जाता है। शनि के राशि परिवर्तन से देश-दुनिया की घटनाएं भी प्रभावित होती हैं। कहते हैं कि जब भी शनि की चाल या स्थिति बदलती है, तो इन सभी क्षेत्रों में भी बदलाव आते हैं। इस साल 2026 में होली के बाद शनि की स्थिति में बदलाव होने जा रहा है। शनि ग्रह मीन राशि में अस्त होंगे, जो तीन राशियों के जीवन में शुभ साबित होगा।
शनि की स्थिति में 30 साल बाद होगा बदलाव
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, करीब 30 सालों के बाद मार्च में कर्मफलदाता शनि की स्थिति में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। द्रिक पंचांग के अनुसार, होली के बाद 13 मार्च 2026 को शाम 7 बजकर 13 मिनट मीन राशि में अस्त होंगे। शनिदेव मीन राशि में अस्त होंगे, तो इसका असर सभी 12 राशियों पर पड़ेगा, लेकिन यह बदलाव 3 राशियों के भाग्य के दरवाजे खोलेगा, जो नौकरी, धन और तरक्की से जुड़े क्षेत्रों में शुभ परिणाम देगा।
धनु राशि : धनु राशि के लिए शनि का अस्त होना भाग्य खोलने वाला साबित हो सकता है। इस राशि के जातकों के लिए शनि का अस्त भौतिक सुखों में बढ़ोतरी का संकेत दे रहा है। इस अवधि में आप घर, गाड़ी या संपत्ति से जुड़ा कोई बड़ा निर्णय ले सकते हैं। कमाई के शानदार मौके सामने आ सकते हैं।
कुंभ राशि : शनि का अस्त होने से कुंभ राशि वालों के लिए अचानक धन लाभ के योग हैं। इन जातकों को आर्थिक मामलों में राहत मिल सकती है। इस राशि के कारोबारियों का लंबे समय से अटका पैसा वापस मिल सकता है। कुंभ राशि के टीचिंग, मीडिया, सेल्स या मार्केटिंग से जुड़े जातकों के लिए यह समय उत्तम होगा।
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