Vipreet Rajyog: ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों का समय-समय पर अपना स्थान बदलना कोई नई बात नहीं है। लेकिन इस ज्योतिषीय घटना से कई राशियों पर शुभ-अशुभ प्रभाव पड़ते हैं और कई बार ग्रहों की स्थिति दूसरे ग्रहों के साथ मिल कर अच्छे-बुरे संयोगों का निर्माण करती है। इससे भी सभी राशियां प्रभावित होती हैं। खासतौर से बात अगर कर्मफलदाता शनि ग्रह को तो इसका असर कई गुना बढ़ जाता है, क्योंकि शनि एक राशि में लगभग ढाई साल तक रहते हैं। इस समय शनि ग्रह गुरु की राशि मीन में वक्री है। इस राशि में रहते हुए ये ग्रह अन्य ग्रहों के साथ युति कर शुभ-अशुभ योगों का निर्माण करेंगे और नवंबर के अंत में फिर मार्गी हो जाएंगे। दूसरी तरफ, गुरु वर्तमान में कर्क राशि में हैं। इस राशि में वह दिसंबर तक रहेंगे। गुरु के कर्क राशि में जाते ही शनि का उनके साथ वितरीत राजयोग बन गया है। यह स्थिति दसंबर तक बनी रहेगी। इससे तीन राशियां सीधे तौर से प्रभावित होंगी, जिन्हें पद-प्रतिष्ठा और मान-सम्मान सब मिलेगा। आइए जानें इन राशियों के बारे में।
धनु राशि : धनु राशि के जातकों के लिए विपरीत राजयोग अत्यंत लाभकारी हो सकता है। गुरु इस राशि के अष्टम भाव में उच्च स्थिति में विराजमान है, जिससे विपरीत राजयोग का निर्माण हो रहा है। ये राजयोग कठिन परिस्थितियों में भी लाभ प्रदान करता है। इसके प्रभाव से स्वास्थ्य बेहतर होगा और व्यक्तित्व में निखार देखने को मिलेगा। इसके अलावा गुरु धन भाव में दृष्टि जाल रहे हैं और शनि इस भाव के स्वामी हैं।
वृश्चिक राशि : इस राशि के जातकों के लिए भी गुरु-शनि का विपरीत राजयोग काफी लाभकारी हो सकता है। इस राशि के जातकों के लिए ये साल खुशियां लेकर आने वाला है। इस राशि में शनि पंचम भाव और गुरु भाग्य भाव में उच्च स्थिति में विराजमान है। ऐसे में इस राशि के जातकों को कर्म और भाग्य दोनों का साथ मिल सकता है। ऐसे में नकारात्मक प्रभाव काफी कम हो सकता है।
कर्क राशि : कर्क राशि के जातकों के लिए भी विपरीत राजयोग काफी लाभकारी हो सकता है। इस राशि में गुरु पहले और शनि नवम भाव में विराजमान है। गुरु की दृष्टि भी शनि पर पड़ रही है। ऐसे में इस राशि के जातकों को अशुभ फल कम और शुभ फल अधिक मिल सकते हैं। ऐसे में इस राशि के जातकों को कर्ज से निजात मिल सकती है। शत्रुओं पर विजय प्राप्त हो सकती है। नौकरी के क्षेत्र में भी लाभ मिलने के योग नजर आ रहे हैं।