कैब बुक करने वालों के लिए बड़ा झटका! ओला, उबर और रैपिडो के राइड पीक आवर्स में होंगे दोगुना महंगे

New Rules for Cabs: एक तरफ तो इस कदम से आम लोगों को झटका लगता है वहीं दूसरी तरफ रैपिडो और उबर जैसे बाइक टैक्सी ऑपरेटरों को राहत मिली है। बता दें कि इसके पहले ये राइड-हेलिंग कंपनियां यात्रा के पीक आवर्स के दौरान 1.5 गुना तक किराया वसूल सकती थीं

अपडेटेड Jul 02, 2025 पर 3:37 PM
यदि बिना किसी विशिष्ट कारण के राइड रद्द की जाती है, तो ड्राइवरों पर किराए का 10 प्रतिशत जुर्माना भी लगाया जाएगा

Cab Booking: अगर आप ऑफिस जाने-आने या फिर कहीं बाहर जाने के लिए कैब बुक करते हैं, तो आपके लिए एक बुरी खबर है। केंद्र सरकार ने ओला, उबर, रैपिडो और अन्य जैसे कैब एग्रीगेटर्स को अपने नए दिशानिर्देशों के तहत पीक आवर्स के दौरान यात्रियों से बेस किराए का दोगुना तक वसूलने की अनुमति दे दी है। इसके अलावा, नॉन-पीक आवर्स के दौरान किराया बेस दरों के 50 प्रतिशत से कम नहीं हो सकता है। इसके पहले ये राइड-हेलिंग कंपनियां यात्रा के पीक आवर्स के दौरान 1.5 गुना तक किराया वसूल सकती थीं। नए आदेश के अनुसार अब वे दोगुना तक किराया वसूल पायेंगी है, जिससे आपकी जेब ढीली हो सकती है।

सरकार के इस फैसले से ऐसे समय में जब कुछ राज्य पुराने वाहनों पर सख्त फ्यूल प्रतिबंध लागू कर रहे हैं, उस दौरान यात्रा की लागत बढ़ने की संभावना है। यह कदम आम लोगों के लिए चिंता बढ़ा रहा है।

एक तरफ तो इस कदम से आम लोगों को झटका लगता है वहीं दूसरी तरफ रैपिडो और उबर जैसे बाइक टैक्सी ऑपरेटरों को राहत मिलती है, जिन्होंने लंबे समय से कानूनी रूप से अस्पष्ट क्षेत्र में काम किया है। खासकर कर्नाटक जैसे राज्यों में जहां बाइक टैक्सियों पर हाल ही में लगे प्रतिबंध के कारण व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिले थे।


बिना वजह राइड कैंसिल करने पर ड्राइवरों पर लगेगा जुर्माना

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी संशोधित दिशानिर्देश, मोटर वाहन एग्रीगेटर दिशानिर्देश (MVAG) 2025, में यह भी कहा गया है कि यदि बिना किसी विशिष्ट कारण के राइड रद्द की जाती है, तो ड्राइवरों पर किराए का 10 प्रतिशत जुर्माना लगाया जाएगा जो ₹100 से अधिक नहीं होगा। इसके अलावा राज्य सरकारों को अगले तीन महीनों में नए दिशानिर्देशों को अपनाने की सलाह दी गई है क्योंकि वे राइड एग्रीगेटर्स द्वारा वसूले जाने वाले किराए को तय करने के लिए जिम्मेदार होंगी। इसके अतिरिक्त ड्राइवरों के लिए किराए और प्रोत्साहन का हिस्सा राज्य सरकार की सिफारिशों पर आधारित होगा। यदि राज्यों द्वारा किराया अधिसूचित नहीं किया गया है, तो कंपनियों को अपनी बेस दरों की घोषणा करना आवश्यक है।

नियम यह भी स्पष्ट करता हैं कि पिक-अप की दूरी 3 किमी से कम होने पर डेड माइलेज शुल्क लागू नहीं किया जाएगा। बता दें कि डेड माइलेज शुल्क वह किराया है जो एक कैब ड्राइवर यात्री को लेने के लिए यात्रा करता है। नए दिशानिर्देश कंपनियों को ड्राइवरों के लिए कम से कम ₹5 लाख का हेल्थ इंश्योरेंस और कम से कम ₹10 लाख का सावधि बीमा सुनिश्चित करने का भी आदेश देते हैं।

उबर ने नए दिशानिर्देशों को नवाचार और रेगुलेटरी स्पष्टता को बढ़ावा देने की दिशा में एक दूरदर्शी कदम बताया है। उबर के एक प्रवक्ता ने कहा, 'राज्यों द्वारा समय पर कानूनी प्रक्रियाओं को सही समय पर अपनना सभी हितधारकों के लिए बढ़िया होगा। हम मंत्रालय के सुझाव और दृष्टिकोण की सराहना करते हैं, और ढांचे के प्रभावी और इंक्लूसिव रोलआउट का समर्थन करने के लिए सभी स्तरों पर सरकारों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।'

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