Budget 2025-26: इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (EEPC) इंडिया ने केंद्र सरकार को बजट 2025 में गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) रिजीम के तहत फेसलेस ऑडिट असेसमेंट शुरू करने की सलाह दी है। EEPC का कहना है कि इस सुविधा से सरकार के ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा मिलेगा। आगामी बजट 2025-26 के लिए अपनी सिफारिश में EEPC ने कहा कि फेसलेस जीएसटी असेसमेंट जैसे कदम माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) को सशक्त बनाएंगे। EEPC इंडिया ने आम बजट 2025-26 के लिए सुझाव देते हुए यह सिफारिश की।
आयकर विभाग ने पहले ही फेसलेस ऑडिट सिस्टम लागू किया है, जिससे यह सिद्ध हुआ है कि ऐसी प्रणाली न केवल पारदर्शी होती है, बल्कि करदाताओं के लिए उपयोगी भी है। बता दें कि फेसलेस GST ऑडिट प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल होगी। इससे करदाता और अधिकारियों के बीच प्रत्यक्ष संपर्क खत्म होगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी। इससे प्रक्रियाएं सरल और तेज होंगी।
EEPC इंडिया के चेयरमैन पंकज चड्ढा ने कहा, "फेसलेस जीएसटी ऑडिट सिस्टम टेक्नोलॉजी का उपयोग करके और गोपनीयता सुनिश्चित करके कंप्लायंस कॉस्ट को कम करेगा। यह सिस्टम प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करेगी, जिससे MSME ग्रोथ और इनोवेशन पर फोकस कर सकें।"
EEPC इंडिया ने रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म (RCM) से संबंधित देनदारियों को भी एमनेस्टी स्कीम के लिए पात्र बनाने की सिफारिश की। चड्ढा ने कहा, "निर्यातकों को एमनेस्टी स्कीम के तहत राहत दी जानी चाहिए, भले ही धारा 74 के तहत कारण बताओ नोटिस (SCN) जारी किए गए हों।" EEPC India ने कहा कि उसके कई सदस्यों ने बताया है कि उन्हें RCM से संबंधित कारण बताओ नोटिस मिले हैं और इसलिए ऐसे मुद्दों के लिए एमनेस्टी स्कीम की तत्काल जरूरत है।