यूनियन बजट 2025 से पहले इंडस्ट्री ने वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण को अपनी राय बता दी है। प्रमुख उद्योग चैंबर्स ने इनकम टैक्स में राहत देने के साथ ही आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए वेल्फेयर स्कीम शुरू करने की सलाह दी है। सीआईआई, पीएचडीसीसीआई और फिक्की जैसे प्रमुख उद्योग चैंबर्स का मानना है कि अगर वित्तमंत्री 1 फरवरी, 2025 को यूनियन बजट 2025 में कंजम्प्शन बढ़ाने वाले उपायों का ऐलान करती हैं तो इसका जीडीपी ग्रोथ पर अच्छा असर पड़ेगा। वित्त वर्ष 2024-25 की दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ घटकर 5.4 फीसदी पर आ गई है। सुस्त कंजम्प्शन को इसका कारण माना जा रहा है।
चैंबर्स के प्रतिनिधियों की 30 दिसंबर को सीतारमण से मुलाकात
इंडस्ट्री चैंबर्स के प्रतिनिधियों ने 30 दिसंबर को वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की। उन्होंने वित्तमंत्री को टैक्स स्ट्रक्चर को आसान बनाने की सलाह दी। इससे कंप्लायंस कॉस्ट में कमी आएगी। उनका मानना है कि इनकम टैक्स में राहत मिलने से लोगों के हाथ में ज्यादा पैसे बचेंगे। इससे कंजम्प्शन बढ़ेगा। इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों का मानना है कि सरकार को चीन से आने वाले सस्ते माल पर भी ध्यान देना होगा। चीन में कंजम्प्शन सुस्ती है, जिससे वह इंडिया सहित दुनियाभर में सस्ते माल का एक्सपोर्ट कर रहा है। इसका असर कई इंडियन कंपनियों पर पड़ रहा है।
वित्तमंत्री को पूंजीगत खर्च का टारगेट बढ़ाने का सुझाव
उद्योग के प्रतिनिधियों ने सरकार को FY26 में पूंजीगत खर्च का टारगेट बढ़ाने की सलाह दी है। उनका मानना है कि सरकार को FY25 के पूंजीगत खर्च के टारगेट में 20-25 फीसदी वृद्धि करनी चाहिए। FY25 में सरकार ने पूंजीगत खर्च के लिए 11.11 लाख करोड़ रुपये का टारगेट तय किया है। इंडस्ट्री को उम्मीद है कि सरकार अगले वित्त वर्ष के लिए फिस्कल डेफिसिट का टारगेट 4.5 फीसदी रखेगी। सबसे बड़े उद्योग चैंबर CII का कहना है कि पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाने से इनफ्लेशन को काबू में करने में मदद मिलेगी। साथ ही इनकम टैक्स में राहत मिलने से मिडिल क्लास के हाथ में ज्यादा पैसे बचेंगे। इससे कंजम्प्शन बढ़ेगा, जिसका पॉजिटिव असर ग्रोथ पर पड़ेगा।
कंजम्प्शन वाउचर्स इश्यू करने से होगा फायदा
सरकार अगर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के लिए कंजम्प्शन वाउचर्स इश्यू करती है तो इससे डिमांड को बढ़ावा मिलेगा। पीएचडीसीसीआई का कहना है कि सरकार कई इंडस्ट्री में इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर की प्रॉब्लम है। सरकार को इसे खत्म करने की जरूरत है। खासकर सीमेंट, एल्युमीनियम, स्टील, पैकेजिंग मैटेरियल, पेपर और पेपरबोर्ड इंडस्ट्री में यह प्रॉब्लम है। इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर की वजह से घरेलू कंपनियों के लिए उत्पादन की कॉस्ट बढ़ जाती है। इससे उनके प्रोडक्ट्स ग्लोबल मार्केट्स में महंगे हो जाते हैं।
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MSME को लोन की पर्याप्त उपलब्धता
एसौचेम ने अपने सुझाव में कहा कि सरकार को MSME को पर्याप्त लोन उपलब्ध कराने के उपाय करने चाहिए। एमएसएमई की जीडीपी में बड़ी हिस्सेदारी है। रोजगार के नए मौके पैदा करने में भी एमएसएमई काफी आगे हैं। ऐसे में अगर इन्हें वर्किंग कैपिटल और कारोबार के विस्तार के लिए कम इंटरेस्ट पर पर्याप्त पूंजी उपलब्ध होती है तो इसके अच्छे नतीजे देखने को मिलेंगे। सरकार को खासकर बैंकों को एमएसएमई को पर्याप्त लोन उपलब्ध कराने का निर्देश देना चाहिए।