म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री को यूनियन बजट 2025 से काफी उम्मीदें हैं। अगर वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ये उम्मीदें पूरी करती हैं तो म्यूचुअल फंड इडस्ट्री को पंख लग जाएंगे। अभी म्यूचुअल फंड स्कीमों के लिए टैक्स स्ट्रक्चर अलग-अलग हैं। इससे इनवेस्टर्स को टैक्स लेकर कनफ्यूजन बना रहता है। म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था एंफी ने सरकार को टैक्स के नियमों में फर्क खत्म करने की सलाह दी है। इससे म्यूचुअल फंड्स में निवेश के मामले में पारदर्शिता आएगी और निवेश में इनवेस्टर्स की दिलचस्पी बढ़ेगी।
टैक्स स्ट्रक्चर को आसान बनाने की जरूरत
कंसल्टेंसी फर्म डेलॉयट ने भी टैक्स से जुड़ी कमियों को दूर करने की सलाह दी है। उसका मानना है कि खासकर जीएसटी के नियमों को आसान बनाने की जरूरत है। अभी जीएसटी के मामले में कई मीडियम और स्मॉल बिजनेसेज को दिक्कत का सामना करना पड़ता है। डेलॉयट का कहना है कि अगर सरकार जीएसटी फ्रेमवर्क को आसान बनाती है तो इससे कंप्लायंस बढ़ेगा। कप्लायंस बढ़ने का मतलब है कि सरकार के रेवेन्यू में वृद्धि होगी।
SME पर टैक्स का बोझ घटाना होगा
डेलॉयट का यह भी कहना है कि अभी SME पर टैक्स का बोझ ज्यादा है। टैक्स ज्यादा होने से एसएमई के लिए ग्रोथ की संभावना कम हो जाती है। सरकार को एसएमई के लिए टैक्स के नियम ऐसे बनाने चाहिए, जिसमें टैक्स कम हो और बिजनेस के विस्तार का उन्हें पूरा मौका मिले। अगर एसएमई को सरकार अनुकूल माहौल उपलब्ध कराती है तो रिन्यूएबल एनर्जी और टेक्नोलॉजी पर उनका निवेश बढ़ेगा। इससे उनकी उत्पादकता बढ़ेगी।
एंफी ने म्यूचुअल फंड के टैक्स नियमों को आसान बनाने की दी सलाह
एंफी का भी कहना है कि इंडिया के टैक्स स्ट्रक्चर में बड़े बदलाव करने की जरूरत है। टैक्स के नियमों को अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक बनाना होगा। इससे इकोनॉमिक ग्रोथ को बढ़ावा मिलेगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि विदेश निवेशी को आकर्षित करने के लिए भी टैक्स स्ट्रक्चर को आसान और पारदर्शी बनाना जरूरी है। इससे टैक्स चोरी के मामलों में भी कमी आएगी। इससे सरकार की कमाई भी बढ़ेगी। एक्सपर्ट्स की राय है कि विदेशी निवेशक तभी इनवेस्ट करते हैं जब उन्हें टैक्स के नियमों में स्टैबिलिटी दिखाई देती है।
जीएसटी फ्रेमवर्क को आसान बनाने की जरूरत
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर इंडिया को 2047 तक विकसित देश बनना है तो टैक्स के नियमों को आसान बनाना होगा। सरकार ने जुलाई 2017 में जीएसटी की शुरुआत की थी। लेकिन, 7 साल बाद भी टैक्स के नियमों में जटिलता बनी हुई है। इससे बिजनेसेज खासकर छोटे बिजनेसेज को दिक्कत आती है। अगर नियमों को आसान बनाया जाता है तो इससे बिजनेसेज की ग्रोथ तेजी होगी।
इनकम टैक्स के नियमों में भी बदलाव जरूरी
सरकार ने पिछले साल यूनियन बजट में जीएसटी के नियमों को आसान बनाने का वादा किया था। इसलिए यह उम्मीद है कि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण इनकम टैक्स के नियमों में बड़े बदलाव का ऐलान कर सकती हैं।