Budget 2026 Expectations: विशेषज्ञों का अनुमान है कि ₹12 लाख से ₹20 लाख के बीच की आय वाले मध्यम वर्ग के लिए टैक्स दरों को और तर्कसंगत बनाया जा सकता है। वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन की सीमा को ₹75,000 से बढ़ाकर ₹1 लाख करने की मांग की जा रही है
Budget 2026 Expectations: केंद्रीय बजट 2026 की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार, 1 फरवरी 2026 को अपना 9वां बजट पेश करेंगी। इस बार के बजट का मुख्य केंद्र 'उपभोग' को बढ़ावा देना माना जा रहा है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती और घरेलू मांग को स्थिर रखने की चुनौती के बीच, सरकार इस साल बुनियादी ढांचे पर भारी खर्च के बजाय आम आदमी की जेब में अधिक पैसा छोड़न
Budget 2026 Expectations: केंद्रीय बजट 2026 की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार, 1 फरवरी 2026 को अपना 9वां बजट पेश करेंगी। इस बार के बजट का मुख्य केंद्र 'उपभोग' को बढ़ावा देना माना जा रहा है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती और घरेलू मांग को स्थिर रखने की चुनौती के बीच, सरकार इस साल बुनियादी ढांचे पर भारी खर्च के बजाय आम आदमी की जेब में अधिक पैसा छोड़ने की रणनीति अपना सकती है।
उपभोग बढ़ाने पर क्यों है सरकार का ध्यान?
पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने सड़क, रेलवे और बंदरगाहों जैसे बुनियादी ढांचे पर भारी निवेश किया है। अब अर्थशास्त्रियों का मानना है कि विकास की अगली लहर के लिए घरेलू मांग का बढ़ना जरूरी है। टैक्स में राहत मिलने से मध्यम वर्ग के पास खर्च करने के लिए अधिक पैसा बचेगा। जब लोग एफएमसीजी (FMCG), इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल पर खर्च करेंगे, तो निजी क्षेत्र का निवेश अपने आप बढ़ेगा। गोल्डमैन सैक्स के अनुसार, भारत की शहरी खपत में 7.7% की वृद्धि का अनुमान है, जिसे यह बजट और रफ्तार दे सकता है।
मध्यम वर्ग को है इनकम टैक्स में बदलाव की उम्मीद
बजट 2025 में ₹12 लाख तक की आय को टैक्स फ्री करने के बाद, इस साल भी कुछ बड़े सरप्राइज मिल सकते है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि ₹12 लाख से ₹20 लाख के बीच की आय वाले मध्यम वर्ग के लिए टैक्स दरों को और तर्कसंगत बनाया जा सकता है। वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन की सीमा को ₹75,000 से बढ़ाकर ₹1 लाख करने की मांग की जा रही है। 2026 की शुरुआत में 8वें वेतन आयोग के लागू होने की संभावना है, जिससे 1.1 करोड़ कर्मचारियों के हाथ में पैसा बढ़ेगा। सरकार चाहेगी कि टैक्स स्लैब ऐसे हों कि यह अतिरिक्त पैसा टैक्स में न चला जाए।
बजट के 5 प्रमुख फोकस क्षेत्र
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, बजट इन क्षेत्रों के इर्द-गिर्द केंद्रित रहेगा:
MSME विकास: छोटे उद्योगों के लिए कर्ज आसान करना और अनुपालन लागत को कम करना।
रेलवे और इंफ्रास्ट्रक्चर: विद्युतीकरण के बाद अब ध्यान नई लाइनों, ट्रैक दोहरीकरण और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के विस्तार पर होगा।
रक्षा: 'मेक इन इंडिया' के तहत स्वदेशी रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए बड़े आवंटन की उम्मीद।
ग्रीन ट्रांजिशन: नवीकरणीय ऊर्जा और क्लीन-टेक क्षेत्र में निवेश के लिए विशेष प्रोत्साहन।
टैक्स सरलीकरण: TDS और TCS नियमों को और सरल बनाना ताकि टैक्स रिटर्न भरने की प्रक्रिया आसान हो सके।
क्या है उद्योग जगत की मांग?
ASSOCHAM और PHDCCI जैसे उद्योग निकायों का मानना है कि अब समय अल्पकालिक प्रोत्साहन का नहीं, बल्कि दीर्घकालिक नीतिगत स्थिरता का है। कंपनियां चाहती हैं कि सरकार टैक्स विवादों को कम करे और उभरती तकनीकों जैसे AI और सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार करे। इसके अलावा, कॉर्पोरेट बॉन्ड और बैंक FD के बीच टैक्स समानता लाने की भी मांग की जा रही है ताकि बचत को निवेश में बदला जा सके।