Budget 2026 Foreign Ministry: वित्त और कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आम बजट पेश किया। अपने बजट में वित्त मंत्री सीतारमण ने विकास को लेकर देश की सोच का ही प्रदर्शन नहीं किया, बल्कि पड़ोसियों के साथ संबंधों पर नजरिया भी स्पष्ट किया। आज के बजट में वित्त मंत्री ने विदेश मंत्रालय के लिए बजट आवंटन के अपने प्रस्ताव से भारत के पड़ोसी देशों को संदेश दिया। उन्होंने जहां कुछ पड़ोसियों के बजट में इजाफा किया, वहीं कुछ अन्य के मद में कटौती करने का सुझाव दिया।
भारत की विदेश नीति में उसके पड़ोसी देशों का अहम स्थान है। हमारे पड़ोसियों में पाकिस्तान, चीन, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, अफगानिस्तान और मालदीव हैं। केंद्र सरकार ने आगामी वित्त वर्ष के लिए विदेश मंत्रालय (MEA) के बजट में करीब 1,600 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी करते हुए कुल 22,119 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। इसमें सबसे अहम संकेत भारत की नेबर फर्स्ट की पॉलिसी और क्षेत्रीय संतुलन को लेकर है। बांग्लादेश और मालदीव से जुड़े मामलों के बजट में जहां कटौती की गई है, वहीं अफगानिस्तान, नेपाल, भूटान और श्रीलंका के लिए मदद बढ़ाकर नई रणनीतिक दिशा दिखाई गई है।
अफगानिस्तान के लिए खोला खजाना
भारत ने अपने दोस्त अफगानिस्तान पर भरोसा बढ़ाते हुए आवंटन में 50 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी कर कुल 150 करोड़ रुपये आवंटित किया है। इसे क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। अफगानिस्तान में भारत की मौजूदगी बढ़ने से पाकिस्तान की क्षेत्रीय पकड़ पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
बांग्लादेश मामलों का बजट घटा
नेपाल-भूटान का बजट बढ़ा चीन को दी टेंशन
भारत ने अपने बजट आवंटन से सबसे बड़ा संदेश चीन को देने की कोशिश की है। वित्त मंत्रालय के बजट में नेपाल के लिए आवंटन बढ़ाकर 800 करोड़ रुपये कर दिया गया है। वहीं, भूटान के लिए 2,288 करोड़ रुपये आवंटन किया गया है। इन देशों में बढ़ा भारतीय निवेश चीन के उस कदम के जवाब में लिया गया है, जिसमें इन देशों में निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के जरिए अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। भारत के इस कदम से चीन की भी रणनीतिक टेंशन बढ़ जाएगी।
श्रीलंका को आर्थिक संकट से उबारने में मदद
श्रीलंका के लिए भी आवंटन 100 करोड़ रुपये बढ़ाकर कुल 400 करोड़ रुपये किया गया है, जो आर्थिक संकट से उबरने की कोशिश कर रहा है। इस तरह, विदेश मंत्रालय के बजट का यह ढांचा बताता है कि भारत ने तीन मोर्चों, संतुलन, मानवीय सहयोग और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा पर एक साथ कदम बढ़ाए हैं।