GST Collections in April: जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) के मोर्चे पर चालू वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत धमाकेदार रही। अप्रैल में ग्रास रेवेन्यू सालाना आधार पर 8.7% की रफ्तार से बढ़कर ₹2.42 लाख करोड़ पर पहुंच गया। मासिक आधार पर यानी मार्च के मुकाबले इसमें 21% की तेजी आई है। हालांकि एक्सपर्ट्स के मुताबिक अप्रैल में जीएसटी कलेक्शन का ज्यादा होना कोई नई बात नहीं है। मार्च में अधिक बिक्री, स्टॉक क्लियरेंस और अकाउंट क्लोजिंग की वजह से इसका असर अप्रैल में दिखता है। वित्तीय वर्ष के आखिरी महीने में होने वाले लेन-देन अप्रैल में फाइल होते हैं। हालांकि ये आंकड़े सामान्य हैं लेकिन खास बात आयात से होने वाली कमाई है।
एकेएम ग्लोबल के प्रमुख (इनडायरेक्ट टैक्स) इकेश नागपाल के मुताबिक अप्रैल में जीएसटी कलेक्शन आमतौर पर अधिक होता है। मार्च में बढ़ी हुई बिक्री, इन्वेंट्री क्लीयरेंस और बुक क्लोजर के कारण वित्त वर्ष के आखिरी में होने वाली तेजी स्वाभाविक रूप से अप्रैल में भी जारी रहती है। इस बार के आंकड़ों में कुछ अहम राज्यों का दबदबा बना रहा जैसे कि महाराष्ट्र से ₹42,467 करोड़, कर्नाटक से ₹18,939 करोड़ और गुजरात से ₹15,620 करोड़ की जीएसटी कलेक्ट हुई। नागपाल के मुताबिक यह हाई आउटपुट और ऊंची खपत वाले राज्यों के दबदबे को दिखाता है।
केपीएमजी के पार्टनर अभिषेक जैन का कहना है कि वित्त वर्ष के आखिरी में थोड़ी बढ़ोतरी होती है लेकिन इतने बड़े पैमाने पर कलेक्शन का बढ़ना इकॉनमी की मजबूती को दिखाता है। उन्होंने कहा कि बेहतर टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन, डिजिटल निगरानी और बढ़ते टैक्स बेस से इसे सपोर्ट मिला।
आयात से होने वाली कमाई में क्या रही खास बात?
अप्रैल के जीएसटी कलेक्शन में एक खास बात आयात से जुड़ी जीएसटी रेवेन्यू के दबदबे का कायम रहना रहा। आयात पर आईजीएसटी कलेक्शन सालाना आधार पर लगभग 26% तो नेट कस्टम जीएसटी रेवेन्यू 42.9% की रफ्तार से बढ़ा, जो वैश्विक अस्थिरता के बावजूद कारोबार की मजबूती को दिखा रहा है। डेलाइट इंडिया के इनडायरेक्ट टैक्स पार्टनर एमएस मणि के मुताबिक इससे आयात में तेजी का पता चलता है, लेकिन उनका यह भी कहना है कि कस्टम कलेक्शंस के आंकड़े नहीं होने के चलते इस तेज उछाल के कारणों का सटीक पता लगाना मुश्किल है।
घरेलू खपत स्थिर लेकिन ग्रोथ धीमी
आयात ने ओवरऑस ग्रोथ को तगड़ा सपोर्ट मिला लेकिन घरेलू जीएसटी कलेक्शन इसकी तुलना में सुस्त रही। ग्रास डोमेस्टिक रेवेन्यू अप्रैल महीने में सालाना आधार पर 4.3% की रफ्तार से बढ़कर ₹1.85 लाख करोड़ पर पहुंचा जिससे सितंबर 2025 में जीएसटी दरों में कटौती के बाद भी खपत में स्थिर रुझान का संकेत मिला है। एमएस मणि का कहना है कि दरों में तेज कटौती के बावजूद घरेलू खपत पर जीएसटी कलेक्शन का बढ़ना खपत में अच्छी बढ़ोतरी का संकेत है। हालांकि एक अहम बात ये है कि यह ग्रोथ सभी राज्यों में एक जैसी नहीं रही। कुछ बड़ी मैन्युफैक्चरिंग और कंज्यूमिंग स्टेट्स में लो-सिंगल-डिजिट ग्रोथ रही जैसे कि गुजरात में 3% और महाराष्ट्र, कर्नाटक और हरियाणा में करीब 5% की ग्रोथ रही।
ग्रास कलेक्शन में तेज उछाल लेकिन नेट रेवेन्यू की रफ्तार सुस्त
मजबूत ग्रास के बावजूद नेट जीएसटी रेवेन्यू ग्रोथ सुस्त रही और यह सालाना आधार पर 7.3% बढ़कर ₹2.11 लाख करोड़ तक पहुंचा। इसकी मुख्य वजह रिफंड की अधिक स्पीड रही। अप्रैल में सालाना आधार पर टोटल रिफंड 19.3% की रफ्तार से बढ़ा तो घरेलू रिफंड 54% से अधिक बढ़ गया। टैक्स कनेक्ट एडवायजरी सर्विसेज एलएलपी के विवेक जालान का कहना है कि नेट डोमेस्टिक कलेक्शंस में कोई खास बदलाव नहीं हुआ, क्योंकि रिफंड में तेज बढ़ोतरी हुई।