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FY26 में सरकार के 4.4% के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य पर कायम रहने की उम्मीद, लेकिन खर्च में करनी होगी कटौती

केंद्र ने अनुदान की अपनी पहली सप्लीमेंट्री मांग में 41,455 करोड़ रुपये के अतिरिक्त खर्च की मांग की है। अप्रैल-नवंबर 2025 में केंद्र सरकार का नेट टैक्स रेवेन्यू 13.94 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल से 3.4 प्रतिशत कम है

Edited By: Ritika Singhअपडेटेड Jan 08, 2026 पर 1:16 PM
FY26 में सरकार के 4.4% के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य पर कायम रहने की उम्मीद, लेकिन खर्च में करनी होगी कटौती
पहले एडवांस एस्टिमेट से पता चला कि वित्त वर्ष 2026 में नॉमिनल GDP में 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की संभावना है।

टैक्स रेवेन्यू और विनिवेश से होने वाली कमाई में गिरावट आ सकती है और केंद्र सरकार को कुल खर्च में कटौती करनी पड़ सकती है। फिर भले ही नॉमिनल GDP बजट में लगाए गए अनुमान से ज्यादा हो। अथशास्त्रियों का मानना है कि अगर सरकार को पूरे साल के लिए राजकोषीय घाटे के GDP के 4.4 प्रतिशत पर रहने के लक्ष्य को पूरा करना है तो खर्च में कटौती करनी होगी। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने मनीकंट्रोल को बताया, "सरकार इस साल राजकोषीय घाटे के 4.4 प्रतिशत (GDP का) लक्ष्य पर कायम रहना चाहेगी, भले ही कुछ खर्चों को मैनेज करना पड़े।"

बुधवार को सांख्यिकी मंत्रालय के पहले एडवांस एस्टिमेट (FAE) से पता चला कि वित्त वर्ष 2026 में नॉमिनल GDP में 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की संभावना है। यह बजट में लगाए गए अनुमान 10.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी से कम है। पहले एडवांस एस्टिमेट के अनुसार वित्त वर्ष 2026 के लिए नॉमिनल GDP 357.14 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है, जबकि बजट में इसे 356.97 लाख करोड़ रुपये आंका गया था।

एक मोटे अनुमान के अनुसार, पहले एडवांस एस्टिमेट के आधार पर GDP के प्रतिशत के रूप में राजकोषीय घाटा 4.39 प्रतिशत है। इसका मतलब है कि केंद्र सरकार बजट अनुमानों से लगभग 20,000 करोड़ रुपये ज्यादा खर्च कर सकती है, लेकिन इसके लिए रेवेन्यू में गिरावट नहीं आनी चाहिए। ऐसा हुआ तो ज्यादा खर्च के बावजूद सरकार वित्त वर्ष 2026 में राजकोषीय घाटे के GDP के 4.4 प्रतिशत पर रहने का लक्ष्य हासिल कर सकती है।

दरअसल, केंद्र ने अनुदान की अपनी पहली सप्लीमेंट्री मांग में 41,455 करोड़ रुपये के अतिरिक्त खर्च की मांग की है। लेकिन अगर इस राशि को कुल खर्च में जोड़ा जाता है और बजट के रेवेन्यू गणित में बदलाव नहीं किया जाता है तो राजकोषीय घाटा GDP के 4.5 प्रतिशत तक बढ़ जाएगा।

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