अमेरिका ने वेनेजुएला पर जमीनी हमले किए हैं और वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को पकड़ लिया है। मादुरो और उनकी पत्नी पर न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले में आपराधिक आरोप तय किए गए हैं और उन्हें आरोपों का सामना करने के लिए शहर लाया गया है। उन पर नार्को-आतंकवाद और ड्रग तस्करी जैसे आरोप हैं। क्या इसका भारत की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा? इसे लेकर भारत स्थित थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) का कहना है कि वेनेजुएला में चल रहे संकट का भारत की अर्थव्यवस्था या ऊर्जा सुरक्षा पर कोई खास असर पड़ने की संभावना नहीं है।
एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, GTRI ने एक नोट में कहा कि 2000 और 2010 के दशक में भारत, वेनेजुएला के कच्चे तेल का एक बड़ा खरीदार था। ONGC विदेश जैसी भारतीय कंपनियों की ओरिनोको बेल्ट में अपस्ट्रीम हिस्सेदारी थी। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण 2019 से भारत और वेनेजुएला के बीच द्विपक्षीय संबंध काफी कमजोर हो गए हैं। प्रतिबंधों के चलते भारत को वहां से तेल आयात में कटौती करनी पड़ी और सेकेंडरी प्रतिबंधों से बचने के लिए व्यावसायिक गतिविधियों को कम करना पड़ा। नतीजतन, वेनेजुएला के साथ भारत का व्यापार अब छोटा और घट रहा है।
वित्त वर्ष 2024-25 में वेनेजुएला से भारत का कुल आयात सिर्फ 36.45 करोड़ अमेरिकी डॉलर था, जिसमें से कच्चे तेल का हिस्सा 25.53 करोड़ अमेरिकी डॉलर था। वित्त वर्ष 2023-24 में कच्चे तेल का आयात 1.4 अरब अमेरिकी डॉलर था। GTRI के अनुसार, वेनेजुएला को भारत का निर्यात मामूली रहा, जिसका आंकड़ा 9.53 करोड़ अमेरिकी डॉलर था। इसमें फार्मास्यूटिकल्स का योगदान सबसे अधिक था, जिसके एक्सपोर्ट की वैल्यू 4.14 करोड़ अमेरिकी डॉलर रही।
GTRI का कहना है, "व्यापार की कम मात्रा, मौजूदा प्रतिबंधों की बाधाओं और बड़ी भौगोलिक दूरी को देखते हुए, वेनेजुएला में मौजूदा घटनाक्रम का भारत की अर्थव्यवस्था या ऊर्जा सुरक्षा पर कोई बड़ा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है।"
आगे कच्चे माल और ऊर्जा संसाधनों के लिए तेज हो सकता है युद्ध
GTRI ने कहा कि आने वाले सालों में कच्चे माल और ऊर्जा संसाधनों के लिए युद्ध तेज होने की संभावना है। भारत को इसलिए सावधानी से काम करना चाहिए, अपनी रणनीतिक स्वायत्तता की रक्षा करनी चाहिए, ऐसे सौदों से बचना चाहिए जो संप्रभुता या दीर्घकालिक हितों को कमजोर करते हैं। साथ ही भू-राजनीतिक दबाव के बिना महत्वपूर्ण कच्चे माल और ऊर्जा तक पहुंच सुरक्षित करनी चाहिए।
वेनेजुएला के तेल भंडार पर नियंत्रण था अमेरिका का मकसद
GTRI के अनुसार, वेनेजुएला के कच्चे तेल पर नियंत्रण हासिल करना अमेरिकी ऑपरेशन के मूल में था।वेनेजुएला के पास दुनिया के तेल भंडार का लगभग 18 प्रतिशत हिस्सा है। अमेरिका और रूस दोनों के कच्चे तेल के भंडार को मिला दें तो भी अकेले वेनेजुएला के पास कच्चे तेल का उससे ज्यादा भंडार है। GTRI के मुताबिक, संयुक्त राज्य अमेरिका ने यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया और यूनाइटेड किंगडम जैसे भागीदारों के साथ व्यापार समझौते किए हैं। साथ ही उनसे अमेरिकी पेट्रोलियम प्रोडक्ट और LNG खरीदने का वादा हासिल किया है। लेकिन उसके पास पर्याप्त कच्चा तेल या रिफाइनिंग क्षमता नहीं है। ऐसे में वेनेजुएला, जिसके पास दुनिया का सबसे बड़ा पेट्रोलियम भंडार है, अमेरिका के लिए कच्चे तेल का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। इसलिए वेनेजुएला के तेल तक मुफ्त पहुंच अमेरिका के लिए ताजा कदम को उठाने की एक मुख्य प्रेरणा थी।